Wenger’s Bakery Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में आज भी ऐसे-ऐसे ठिकाने मौजूद हैं जो अपने स्वाद के लिए न केवल मशहूर हैं, बल्कि एक सदी गुजरने के बाद भी उनके तौर-तरीके और जायके में कोई अंतर नहीं आया है, उल्टा अब वहां इतनी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं कि 15 मिनटों में शामी-कबाव की ट्रे साफ हो जाती है, क्रीम रोल और चिकन पेटीज बिक जाते हैं.
जी हां, हम बात कर रहे हैं दिल्ली के दिल में बसी एक शतक पुरानी बेकरी वेंगर्स (Wenger’s) की. राजधानी के बीचोंबीच कनॉट प्लेस में बनी इस बेकरी को 100 साल पूरे हो चुके हैं. यह सिर्फ एक दुकान नहीं है बल्कि दिल्ली के दिल और जुबां पर राज करने वाली मीठी जिंदा विरासत है. यहां की मीठी याद 100 साल से दादा और पोती-पोतों को यहां खींचकर ला रही है.
वेंगर्स बेकरी सिर्फ दिल्लीवासियों की ही पसंदीदा नहीं रही बल्कि यह वही बेकरी है जहां भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आते थे. बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान कभी यहां के केक और शामी कबाब के दीवाने थे और मदन लाल खुराना यहां बनी चीजों को अपने साथ ले जाना नहीं भूलते थे.
दिल्ली के सीपी में 100 साल पुरानी ये बेकरी स्वाद और जायके में आज भी दिल्ली की सबसे पसंदीदा है.
इस बेकरी के स्वाद का जादू आज भी बरकरार है और इसे इस बात से समझा जा सकता है कि आज जिस वक्त तक दिल्ली सोई रहती है, इस बेकरी में जायके के दावेदारों की लाइन लग जाती है. वेंगर्स के प्लेन केक से लेकर फ्लेवर्ड केक, क्रीम रोल्स, चिकन, पनीर और मशरूम पेटीज और शामी कबाब का स्वाद चखने के लिए लोग लाइनों में लगे रहते हैं.
आइए आपको बताते हैं इस बेकरी के बारें में…
100 साल पुरानी ये दुकान सिर्फ एक बेकरी नहीं है बल्कि पूरा अहसास है. कनॉट प्लेस के ब्लॉक-A के एक कोने में स्थित वेंगर्स (Wenger’s) के आउटलेट में सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगती है.
Wenger’s के बाहर सुनहरे अक्षरों वाला साइनबोर्ड लोगों का स्वागत करता है. जैसे ही ग्राहक अंदर घुसते हैं तो कांच की अलमारियों में सजे केक, पेस्ट्री और स्नैक्स नजर आते हैं. इस दुकान के खुलने का लोग ऐसे इंतजार करते हैं कि शटर खुलते ही महज 15 मिनट बाद ही शामी कबाब की ट्रे खाली हो चुकी होती है.
वेंगर्स के साथ ही इसकी पहचान 82 साल के चरनजीत सिंह भी हैं जो साल 2004 में रिटायर होने के 22 साल बाद भी यहां मौजूद रहते हैं और ग्राहकों को स्वाद चखते देख खुश होते हैं. चरनजीत Wenger’s के मैनेजर थे. हल्की नीली शर्ट, काली पैंट, नेवी ब्लू टाई, सिर पर पगड़ी और सुनहरे फ्रेम का चश्मा पहने सिंह की पहचान आज भी उतनी ही मजबूत है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, चरणजीत सिंह बताते हैं कि 1965 में वे एक एयर-कंडीशनिंग इंजीनियर के रूप में आए थे लेकिन तत्कालीन मालिक ओपी टंडन ने उनकी क्षमता देखकर मैनेजर बना दिया. 2004 में रिटायर होने के बावजूद वह आज भी दुकान के संचालन में मदद करते हैं.
कैसे और कहां शुरू हुई वेंगर्स की कहानी…
Wenger’s का असली पता कनॉट प्लेस नहीं है, बल्कि इसकी कहानी शुरू हुई थी कश्मीरी गेट से. 1924 में स्विस दंपति जीन सेटरची वेंगर और एच सी वेंगर ने यहां कैटरिंग बिजनेस शुरू किया. 1933 में यह दुकान कनॉट प्लेस आ गई और जल्द ही शहर की पहचान बन गई. ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर रॉबर्ट टॉर रसेल द्वारा डिजाइन की गई इस जगह में कभी कैफे, बॉलरूम और पार्टी शॉप भी हुआ करती थी. 1945 में स्वतंत्रता से ठीक पहले इसे बृज मोहन टंडन ने खरीद लिया.
चरनजीत सिंह बताते हैं कि जब वह यहां आए थे, तब सिर्फ चार तरह के केक मिलते थे, वनीला, स्ट्रॉबेरी, पाइनएप्पल और चॉकलेट. आज यहां दर्जनों फ्लेवर उपलब्ध हैं, बटरस्कॉच, रेड वेलवेट, न्यूयॉर्क चीजकेक और कई मौसमी स्पेशल केक लोगों को काफी पसंद आते हैं. यहां पर स्नैक्स मेन्यू भी बदल गया है, पहले जहां सिर्फ मटन और वेज पैटी मिलती थीं, वहीं अब चिकन, पनीर और मशरूम पैटी भी उपलब्ध हैं, लेकिन स्वाद की बात करें तो वह नहीं बदला है.
वे कहते हैं कि दिल्ली कितना बदल गई लेकिन वेंगर्स बेकरी का स्वाद और ग्राहक आज भी ऐसे ही हैं. यहां के प्लेन केक, प्लम केक, शॉर्टब्रेड बिस्किट और लेमन टार्ट जैसी पुरानी रेसिपियां अब भी ग्राहकों को वही पुराना स्वाद देती हैं. बेस्टसेलर की बात करें तो चिकन पैटी सबसे तेजी से बिकती है. पेस्ट्री में ब्लैक फॉरेस्ट और पाइनएप्पल अब भी पसंदीदा हैं, जबकि चरनजीत सिंह के अनुसार क्रीम रोल यहां का असली किंग है.
वे कहते हैं कि यहां भले ही सेलिब्रिटीज भी आते रहे हैं लेकिन असली ताकत वे परिवार हैं, जो पीढ़ियों से यहां आते रहे हैं, पहले दादा के साथ, फिर पिता के साथ और अब बच्चों के साथ लोग यहां का स्वाद लेने आते हैं.