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पॉलीबैग में लगाएं बिचड़ा, जल निकासी की करें व्यवस्था, मानसून में ऐसे...


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पॉलीबैग में लगाएं बिचड़ा, जल निकासी की हो व्यवस्था, मानसून में यूं उगाएं सब्जी

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Vegetable Farming In Monsoon: मानसून में कई बार अधिक बारिश से या खेत में पानी भरने से सब्जियों की फसल को खासा नुकसान पहुंचता है. ऐसे में बारिश के सीजन में सब्जियां किस तरह उगाएं, किन बातों का ध्यान रखें, इस पर डॉ. दिलीप पांडे ने विस्तार से जानकारी दी.

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पलामू. भीषण गर्मी के बाद जुलाई में शुरू होने वाला मानसून किसानों के लिए राहत तो लेकर आता है, लेकिन सब्जी उत्पादकों के लिए यह समय किसी चुनौती से कम नहीं होता. जहां एक ओर तेज धूप और उमस, तो दूसरी ओर लगातार होने वाली बारिश सब्जी की खेती को प्रभावित करती है. निचले खेतों में पानी भर जाने से टमाटर, बैंगन, मिर्च, भिंडी और दूसरी सब्जियों की फसल सड़ने लगती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे समय में सही तकनीक अपनाकर किसान भाई नुकसान से बच सकते हैं और बेहतर उत्पादन भी ले सकते हैं.

ऐसे तैयार करें सब्जियों का बिचड़ा
कृषि विज्ञान केंद्र पलामू के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे बताते हैं कि जुलाई में किसान सीधे खेत में बुवाई करने के बजाय पॉली ट्यूब या पॉलीबैग में सब्जियों का बिचड़ा तैयार करें. जब बारिश का पहला दौर खत्म हो जाए और खेत की स्थिति सामान्य हो जाए, तब इन पौधों को टांड़ या ऊंची जमीन पर रोपाई करें. खेत में उचित ढाल और जल निकासी की व्यवस्था रखना बेहद जरूरी है, ताकि वर्षा का पानी जमा न हो और पौधों की जड़ें सुरक्षित रहें. इस तरीके से तैयार फसल जुलाई के अंत तक बाजार में आने लगती है, जिससे किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

जरूरत के मुताबिक डालें खाद
उन्होंने बताया कि जिन किसानों या लोगों के पास खेत नहीं है, वे भी गमलों में टमाटर, बैंगन, मिर्च और लत्तर वाली सब्जियां आसानी से उगा सकते हैं. पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए महीने में एक-दो बार संतुलित मात्रा में डीएपी या दूसरे जरूरी उर्वरक का प्रयोग किया जा सकता है. इससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियां उगती हैं.

जरूरत के अनुसार करें पटवन
मानसून के दौरान जरूरत के अनुसार ही पटवन करें. अगर लगातार बारिश हो रही है, तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत नहीं होती, जबकि मौसम साफ रहने पर फसल की मांग के अनुसार तीन-चार दिन के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है. उन्होंने किसानों को टपक सिंचाई प्रणाली अपनाने की भी सलाह दी. इस तकनीक से पानी की बचत होती है, पौधों को जरूरी मात्रा में नमी मिलती है और खरपतवार की समस्या भी कम होती है.

मानसून में भी सफल खेती
सामान्यतः बहुत सी सब्जी के पौधों के लिए रोज लगभग 1.5 लीटर के आसपास पानी पर्याप्त होता है, (हालांकि यह किस्म और सब्जी पर भी निर्भर करता है), जिसे टपक सिंचाई के माध्यम से आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है. सही योजना और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान मानसून के मौसम में भी सब्जी की सफल खेती कर बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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