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पुणे ले जाने की थी योजना, आरपीएफ ने बच्चों को सीडब्ल्यूसी को सौंपा हटिया से पटना जा रही ट्रेन से मंगलवार रात बोकारो रेलवे स्टेशन पर 11 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया। सभी बच्चों की उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है। आरपीएफ ने बच्चों को ट्रेन से उतारकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया। फिलहाल उन्हें बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। जानकारी के अनुसार, सभी बच्चे बिहार के अररिया जिले के रामपुर कुदरकट्टी गांव के रहने वाले हैं। वे अररिया से रांची पहुंचे थे और वहां से हटिया-पटना एक्सप्रेस से धनबाद जा रहे थे। बताया जा रहा है कि धनबाद से उन्हें पुणे ले जाने की योजना थी। बच्चों के साथ मनोज नाम का एक संदिग्ध व्यक्ति भी था, जिस पर काम दिलाने के बहाने उन्हें ले जाने का आरोप है। आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान वह मौके से फरार हो गया। बच्चों के साथ कुछ वयस्क मजदूर भी यात्रा कर रहे थे। आरपीएफ ने वयस्कों को जाने दिया, जबकि सभी नाबालिगों को सुरक्षा के लिए उतार लिया। सीडब्ल्यूसी… बच्चे काफी घबराए हुए हैं, अलग-अलग जानकारी दे रहे
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष लीला देवी ने बताया कि बच्चे काफी घबराए हुए हैं और स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। कोई पढ़ाई के लिए जाने की बात कह रहा है, तो कोई धनबाद या पुणे जाने की। कई बच्चे अपना पूरा पता भी नहीं बता पा रहे हैं। फिलहाल उनकी काउंसिलिंग की जा रही है। यदि जांच में मानव तस्करी की पुष्टि होती है, तो आगे की कार्रवाई के लिए आरपीएफ को अनुशंसा की जाएगी।
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