Today Weather Live: देशभर में मानसून अब पूरी ताकत के साथ आ चुका है. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर मायानगरी मुंबई तक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई है. जून के आखिरी दिनों तक जिन इलाकों में लोग गर्मी और उमस से बेहाल थे, वहां अब बादलों ने डेरा डाल दिया है. मौसम विभाग (IMD) का ताजा पूर्वानुमान बताता है कि अगले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, 80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की आशंका है. ऐसे में शहरों में जलभराव, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ने और पेड़ गिरने जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. IMD का कहना है कि इस बार एक साथ सक्रिय कई वेदर सिस्टम मानसून को अतिरिक्त मजबूती दे रहे हैं. इसलिए यह सामान्य बारिश नहीं, बल्कि कई राज्यों में हाई इम्पैक्ट वेदर इवेंट साबित हो सकती है.
महाराष्ट्र में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है.
- देशभर में मानसून की उत्तरी सीमा अब दिल्ली, पूरे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों तक पहुंच चुकी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो-तीन दिनों में मानसून उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ेगा. इसका असर खेती-किसानी पर सकारात्मक पड़ सकता है, लेकिन जिन शहरों में ड्रेनेज व्यवस्था कमजोर है वहां जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.
- इस बार मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई वेदर सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं. उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर एरिया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके साथ मानसूनी ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ऑफ-शोर ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हैं. इन सभी के संयुक्त प्रभाव से कई राज्यों में एक ही समय पर तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. यही वजह है कि मौसम विभाग ने लोगों से गैर-जरूरी यात्रा टालने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
दिल्ली-NCR में मानसून की दमदार एंट्री
दिल्ली-एनसीआर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है. 3 जुलाई को राजधानी में भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग के मुताबिक कई इलाकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. सुबह और शाम के समय तेज बारिश के कारण जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है. अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. लगातार बारिश से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलेगी.
उत्तर प्रदेश में कई जिलों पर भारी बारिश का खतरा
उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय दिखाई देगा. सहारनपुर, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, मथुरा, बुलंदशहर, इटावा, बांदा, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, शाहजहांपुर, सोनभद्र और आसपास के जिलों में भारी बारिश और 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग के अनुसार कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी संभावना है. किसानों को खेतों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है.
बिहार में बारिश के साथ वज्रपात का अलर्ट
बिहार के भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, बक्सर, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, खगड़िया और मुंगेर समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. यहां 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग ने खासतौर पर वज्रपात को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की गई है. राजधानी पटना में अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, लेकिन बारिश के बाद तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी.
झारखंड में तीन दिन तक बारिश का दौर, नदियों पर भी नजर
झारखंड में 3 से 5 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है. रांची, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़, बोकारो, गिरिडीह, जामताड़ा, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा और सरायकेला में तेज बारिश के साथ 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश से छोटी नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है. मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.
मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का असर साफ दिखाई देगा. (फाइल फोटो PTI)
पश्चिम बंगाल में लो-प्रेशर का असर, कई जिलों में मूसलाधार बारिश
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल पर दिखाई देगा. कोलकाता, कालिम्पोंग, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, हुगली, नादिया, बीरभूम, पुरुलिया और दक्षिण 24 परगना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हवाएं चल सकती हैं. कई निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है. मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह भी दी है.
राजस्थान में रेगिस्तान पर बरसेगा मानसून, कई जिलों में भारी बारिश
राजस्थान में मानसून की सक्रियता तेजी से बढ़ रही है. झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, सिरोही, राजसमंद और जोधपुर में भारी बारिश और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवा चलने की संभावना है. लंबे समय से गर्मी झेल रहे प्रदेश को राहत मिलेगी, लेकिन अचानक तेज बारिश से शहरी इलाकों में जलभराव और ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी हुई है. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है.
मध्य प्रदेश में लो-प्रेशर का असर, कई जिलों में बारिश का रेड जोन
मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का असर साफ दिखाई देगा. भोपाल, खंडवा, देवास, धार, विदिशा, होशंगाबाद, बेतूल, छिंदवाड़ा, रीवा, सिंगरौली, उज्जैन और बालाघाट समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश से नर्मदा और अन्य नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है. किसानों को खेतों में जलभराव से बचाव के लिए पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है.
पंजाब-हरियाणा में तेज हवाओं के साथ बदलेगा मौसम, किसानों के लिए भी अलर्ट
- पंजाब और हरियाणा में मानसून अब तेजी से सक्रिय हो चुका है. मौसम विभाग ने पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर, रूपनगर और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के साथ 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है. हरियाणा के अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, भिवानी, हिसार और पंचकूला समेत कई जिलों में भी गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने की संभावना है. इससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी.
- हालांकि मौसम विभाग ने किसानों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी है. तेज हवा और लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर सकता है और कुछ फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है. खुले स्थानों पर खड़ी मशीनरी और बिजली के उपकरणों को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है. जिन इलाकों में निचले क्षेत्र हैं, वहां जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है.
पहाड़ों पर आफत की बारिश, भूस्खलन का खतरा बढ़ा
- उत्तराखंड में मानसून अब खतरनाक रूप ले सकता है. मौसम विभाग ने पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और ऋषिकेश समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश से पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, सड़क बंद होने और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका है. चारधाम यात्रा मार्गों पर भी प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.
- हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, बिलासपुर, सिरमौर और किन्नौर में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. मौसम विभाग के अनुसार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं. लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़कों के बाधित होने का खतरा बना रहेगा. मनाली और शिमला जैसे पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है.
- जम्मू-कश्मीर में 3 से 5 जुलाई के बीच उधमपुर, कठुआ, जम्मू, रामबन, राजौरी, पुंछ, कुलगाम, पुलवामा, बारामूला और कुपवाड़ा समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है. 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. ऊंचाई वाले इलाकों में भूस्खलन और अचानक पानी बढ़ने की घटनाएं हो सकती हैं. प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है.
महाराष्ट्र में बारिश का रौद्र रूप जारी, मुंबई-पालघर समेत कई जिले अलर्ट पर
महाराष्ट्र में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है. मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, पुणे, रत्नागिरी, बुलढाणा, अमरावती, गढ़चिरौली और गोंदिया में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. कई इलाकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पहले से जलभराव की स्थिति बनी हुई है. लगातार बारिश के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है. पालघर और तटीय इलाकों में प्रशासन ने लोगों को समुद्र और नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है.
दक्षिण भारत में भी नहीं थमेगा मानसून, केरल से कर्नाटक तक होगी झमाझम बारिश
दक्षिण भारत में भी अगले कई दिनों तक मानसून पूरी ताकत के साथ सक्रिय रहेगा. केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में हल्की से लेकर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है. कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. मौसम विभाग ने गरज-चमक, बिजली गिरने और तटीय क्षेत्रों में ऊंची लहरों की चेतावनी भी जारी की है. लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और कुछ इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है.
85 KM प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी कितनी खतरनाक होती है?
80 से 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी सामान्य हवा नहीं मानी जाती. इतनी तेज हवा बड़े पेड़ों की शाखाएं तोड़ सकती है, कमजोर पेड़ों को गिरा सकती है और बिजली के खंभों तथा होर्डिंग्स को नुकसान पहुंचा सकती है. शहरों में ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. ऐसे समय में खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए. मौसम विभाग की चेतावनी को हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है.
लो-प्रेशर एरिया बनने से बारिश अचानक क्यों बढ़ जाती है?
जब समुद्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनता है तो आसपास की नमी तेजी से उसकी ओर खिंचने लगती है. इससे बादलों का घनत्व बढ़ता है और लगातार वर्षा होने लगती है. यदि यह सिस्टम मजबूत हो जाए और मानसूनी ट्रफ भी सक्रिय हो, तो कई राज्यों में एक साथ भारी बारिश शुरू हो सकती है. यही वजह है कि इस बार बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर एरिया के कारण उत्तर, पूर्व और मध्य भारत में बारिश का दायरा तेजी से बढ़ने की संभावना जताई गई है.
पहाड़ी राज्यों में मानसून सबसे ज्यादा चुनौती क्यों बन जाता है?
पहाड़ों पर लगातार बारिश होने से मिट्टी कमजोर पड़ जाती है और चट्टानें खिसकने लगती हैं. इसी कारण भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने जैसी घटनाएं सामने आती हैं. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हर साल मानसून के दौरान यात्रा प्रभावित होती है. इसलिए प्रशासन लगातार मौसम अपडेट जारी करता है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह देता है.
क्या मानसून के सक्रिय होने से पूरे देश का तापमान एक साथ कम हो जाएगा?
ऐसा जरूरी नहीं है. जिन इलाकों में लगातार बारिश होगी वहां तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. लेकिन जहां बादल तो होंगे, पर बारिश कम होगी, वहां उमस बढ़ सकती है. तटीय राज्यों में नमी अधिक रहने से गर्मी महसूस होती रहती है, जबकि उत्तर भारत में तेज बारिश के बाद मौसम काफी सुहावना हो जाता है. इसलिए हर राज्य में मानसून का असर अलग-अलग दिखाई देता है.
अगले कुछ दिनों में लोगों को किन बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए?
भारी बारिश और तेज आंधी के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प है. जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें, क्योंकि वहां खुले बिजली के तार या गड्ढे हो सकते हैं. पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोग मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर मानें. किसान फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें और मछुआरे समुद्र में जाने से पहले मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन पर नजर रखें.