भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

नीलगाय से नहीं होता नुकसान, पिपरमेंट की खेती बनी ओमकार नाथ के...


होमताजा खबरकृषि

नीलगाय से नहीं होता नुकसान, पिपरमेंट की खेती बनी ओमकार नाथ के लिए वरदान

Last Updated:

Peppermint Farming Benefits: पलामू के किसान ओमकार नाथ ने नीलगाय से बचने के लिए पिपरमेंट और एरोमैटिक फसलों की खेती शुरू की जो उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक लाभ दे रही है. उन्होंने तेल निकालने की यूनिट भी लगा ली है, इससे उन्हें लागत से करीब तीन गुना अधिक फायदा मिल रहा है.

ख़बरें फटाफट

पलामू. खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में पलामू के किसानों के सामने खेती की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक नीलगाय द्वारा फसलों को पहुंचाया जाने वाला नुकसान है. जहां एक ओर किसान धान, मक्का और दलहन जैसी फसलें उगाते हैं, वहीं नीलगाय के कारण ये फसलें अक्सर बर्बाद हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में जिले के पड़वा प्रखंड के किसान ओमकार नाथ ने खेती का ऐसा विकल्प चुना है, जिसने न केवल नीलगाय की समस्या से राहत दिलाई, बल्कि कम लागत में बेहतर मुनाफे का रास्ता भी खोल दिया.

उन्होंने अपने खेत में पिपरमेंट की खेती शुरू की, जिसे नीलगाय नुकसान नहीं पहुंचाती. आज यह खेती जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. जानते हैं इस बारे में विस्तार से कि उन्होंने किस तरह की तैयारी की, क्या-क्या तरीके अपनाएं और किस प्रकार कमाई कर रहे हैं.

तेल निकालने की मशीन भी लगायी
पलामू जिले के विकसित किसान ओमकार नाथ पिपरमेंट की खेती का तेल निकालने के लिए मशीन भी लगा चुके हैं. जहां ओमकार नाथ ने सीएमएफ (सेंट्रल मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स संस्थान), लखनऊ से प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपने गांव में डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की. इस यूनिट के माध्यम से अब वे पिपरमेंट के साथ-साथ लेमन ग्रास, तुलसी, खस और अन्य एरोमैटिक फसलों का भी तेल आसानी से निकाल रहे हैं. इन फसलों से तैयार होने वाले आवश्यक (एसेंशियल) तेल की बाजार में काफी मांग है और इसकी अच्छी कीमत मिलती है.

रकबा बढ़ाने की योजना
ओमकार नाथ ने आगे बताया कि आज से करीब 26 वर्ष पहले उनकी बहन, जो बरेली में रहती हैं, वहीं से उन्होंने पहली बार पिपरमेंट का पौधा लाकर लगाया था. हालांकि व्यावसायिक स्तर पर उन्होंने पिछले दो वर्षों से इसकी खेती शुरू की है. शुरुआत में एक एकड़ में खेती करने पर 15 से 20 हजार रुपये की लागत आई, लेकिन उत्पादन और बाजार मूल्य ने उनकी उम्मीद से कहीं अधिक लाभ दिया. अब वे लगातार इसकी खेती का रकबा बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.

कम जोखिम, ज्यादा लाभ
वे आगे बताते हैं कि एक एकड़ में पिपरमेंट की खेती से लगभग 80 से 90 लीटर तक तेल मिलता है. डिस्टिलेशन यूनिट होने के कारण तेल निकालने के लिए उन्हें कहीं और नहीं जाना पड़ता. बाजार में पिपरमेंट तेल की कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति लीटर तक मिल जाती है. इस तरह एक एकड़ से होने वाली आय लागत से करीब तीन गुना तक पहुंच सकती है यानी अच्छा फायदा होता है.

ओमकार नाथ ने कहा कि जिन क्षेत्रों में नीलगाय फसलों को लगातार नुकसान पहुंचाती है, वहां एरोमैटिक फसलों की खेती किसानों के लिए बेहतर और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है. कम जोखिम, कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह खेती पलामू जैसे क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top