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Who is Bridge Man of india Girish Bharadwaj: ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर पद्मश्री गिरीश भारद्वाज का 76 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने अपने जीवन में 300 से अधिक कम लागत वाले सस्पेंशन ब्रिज बनाकर देश के सैकड़ों दूरदराज गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा. कर्नाटक के सुलिया से शुरू हुआ उनका सफर लाखों ग्रामीणों के लिए उम्मीद की नई राह बन गया. उनके बनाए पुलों ने बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और ग्रामीणों की आवाजाही को आसान बनाया. उनके निधन पर कर्नाटक समेत कई राज्यों में लोगों ने श्रद्धांजलि दी. जानिए कौन थे गिरीश भारद्वाज और क्यों उन्हें भारत का ‘ब्रिज मैन’ कहा जाता था.
पद्मश्री गिरीश भारद्वाज, जिन्हें ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ कहा जाता था, का निधन हो गया. (फोटो X)
नई दिल्ली: किसी इंजीनियर की पहचान आमतौर पर ऊंची इमारतों, बड़े हाईवे या विशाल परियोजनाओं से होती है. लेकिन कर्नाटक के गिरीश भारद्वाज ने यह साबित किया कि असली इंजीनियरिंग वह है, जो सबसे दूर बसे उस गांव तक पहुंचे जहां विकास की सड़क आज भी नहीं पहुंची. उन्होंने करोड़ों रुपए की परियोजनाओं की जगह ऐसे छोटे-छोटे सस्पेंशन ब्रिज बनाए, जिन्होंने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी बदल दी. बच्चे स्कूल पहुंचने लगे, मरीज समय पर अस्पताल जाने लगे और गांवों का संपर्क शहरों से जुड़ गया. यही वजह है कि उन्हें देशभर में ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया. अब 76 साल की उम्र में उनके निधन की खबर ने उन हजारों गांवों को भी भावुक कर दिया है, जिनकी जिंदगी उनके बनाए पुलों की वजह से बदल गई थी.
पद्मश्री सम्मान से सम्मानित गिरीश भारद्वाज का मंगलवार तड़के कर्नाटक के सुलिया स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह कुछ समय से हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. उनके निधन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार समेत कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि गिरीश भारद्वाज केवल इंजीनियर नहीं थे, बल्कि ऐसे तकनीकी नवोन्मेषक थे जिन्होंने दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया. उनके जाने से देश ने एक दूरदर्शी और समाजसेवी इंजीनियर खो दिया.
गिरीश भारद्वाज के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया.
गिरीश भारद्वाज के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2017 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. इसके अलावा मैसूर विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की. उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘सेतु बंधु’ बनाने की भी घोषणा की गई थी. उनकी इंजीनियरिंग को केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया.
आज भी उनके बनाए अधिकांश पुल हजारों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं. कई ऐसे गांव हैं जहां पहले लोग नाव या तैरकर नदी पार करते थे. अब वहीं बच्चे सुरक्षित स्कूल जाते हैं और मरीज समय पर अस्पताल पहुंचते हैं. गिरीश भारद्वाज हमेशा कहते थे कि पुल केवल दो किनारों को नहीं जोड़ता, बल्कि लोगों के जीवन में नए अवसर भी लाता है. यही सोच उन्हें बाकी इंजीनियरों से अलग बनाती थी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें
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