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Chikoo Cultivation: झारखंड की राजधानी रांची से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर पलांडू गांव है. यहां गांव की रहने वाली अल्बीना एक्का अंगूठा छाप हैं. उन्हें पढना लिखना भी नहीं आता है, लेकिन आज आलम यह है कि बिजनेस वुमन बन चुकी हैं. दरअसल, उन्होंने 2000 चीकू के पौधे लगाए जो आज बड़े पेड़ बन चुके हैं. आज एक टन एक दिन में निकलती है, जो कि बंगाल और अलग राज्यों में सप्लाई होती है. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में.
यह इसकी खेती करती हैं और उनके अंदर 25 से अधिक लोग काम करते हैं. अल्बीना की महीने की कमाई लाख पार है. अल्बीना बताती हैं कि उनके पास 2 एकड़ जमीन है और यह जमीन उनकी नहीं है. यह उन्होंने सरकार से लीज पर लिया है. सरकार की योजना के तहत उन्हें यह जमीन लीज पर मिली है. जहां पर उन्होंने चीकू की खेती की है. इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी मिली है. क्योंकि, जमीन लीज पर है तो मुनाफे का 20% सरकार को देना होता है.
अल्बीना बताती हैं कि हमारी चीकू की क्वालिटी काफी शानदार होती है. क्योंकि हम ऑर्गेनिक खादो का इस्तेमाल करते हैं. हर दिन 25 लोग इसकी देखभाल करते हैं. यह सीधे बंगाल से लेकर रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, धनबाद, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, यहां तक व्यापारी ले जाते हैं. जहां एक-एक दिन में एक टन तक चीकू निकलता है और सारा का सारा खत्म भी हो जाता है.
अल्बीना ने बताया कि उन्हें पढ़ने लिखने नहीं आता था, लेकिन आज वह बिजनेसमैन वुमेन बनी हैं. इतना ही नहीं, मेरे बच्चे हैं, जो पहले सरकारी स्कूल में पढ़ते थे. आज वह उनको प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं और अब वह निजी संस्था से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं और एक को तो नौकरी तक लग चुकी है.
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आज उनके पास गाड़ी से लेकर स्मार्टफोन सब कुछ है. कभी सोचा नहीं था कि दूसरे के खेत में मजदूरी करने के बाद उनके पास इतना सब कुछ होगा. अल्बीना बताती हैं कि अगर आपके पास हिम्मत और हौसला है तो सब कुछ सब होगा.
बस मेहनत करने का और आगे बढ़ने का जुनून होना चाहिए. बहाने तो बहुत होते हैं, आप जिस दिन बहाने बनाना छोड़ देते हैं, उस दिन रास्ते खुद पर खुद खुलते चले जाते हैं. आज महीने की कमाई आराम से लाख रुपए पार है. आज उन्होंने अपना पक्का मकान भी बना लिया है.