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West Asia Crisis: ईरान-इराक का एयरस्पेस बंद, भारतीय एयरलाइंस की बढ़ी टेंशन,...


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ईरान-इराक का एयरस्पेस बंद, एयरलाइंस की बढ़ी टेंशन, अब यूरोप जाना होगा महंगा

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वेस्‍ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर भारतीय एयरलाइंस और पैसेंजर्स पर भी पड़ने लगा है. ईरान और इराक का एयरस्पेस बंद होने के बाद भारत से यूरोप, यूके और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स को एक बार फिर लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है. जानिए, एयरस्पेस के बंद होने से भारतीय एविएशन सेक्टर और पैसेंजर्स पर कितना असर पड़ सकता है.

ईरान-इराक का एयरस्पेस बंद, एयरलाइंस की बढ़ी टेंशन, अब यूरोप जाना होगा महंगाZoom

वेस्‍ट एशिया का एयर स्‍पेस बंद होने के साथ एयरलाइंस के माथे पर फिर पसीना आना शुरू हो गया है.

West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की एयरलाइंस और पैसेंजर्स पर एक बार फिर दिखना शुरू हो गया है. ईरान और इराक के ऊपर से गुजरने वाला एयरस्पेस फिलहाल सेफ नहीं माना जा रहा है. इसी वजह से इंटरनेशनल सेफ्टी एजेंसियों ने एयरलाइंस को इन दोनों देशों के ऊपर से उड़ान नहीं भरने की सलाह दी है. इसका सबसे ज्यादा असर भारत से यूरोप, यूके और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स पर पड़ सकता है.

पहले भारत से निकलने वाली ज्यादातर लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स ईरान और इराक के ऊपर से होकर यूरोप पहुंचती थीं. यूरोप और अमेरिका जाने के लिए यह सबसे छोटा और सबसे आसान रूट माना जाता था. अब एयरलाइंस को लंबा चक्कर लगाकर अपनी फ्लाइट ऑपरेट करनी पड़ेंगी. इससे सफर भी लंबा हो गया है और खर्च भी तेजी से बढ़ेगा.

  • अब एयरलाइंस के पास दो बड़े ऑप्शन हैं. पहला नॉर्दर्न रूट है. इस रूट का ऑपशन लेने वाली फ्लाइट्स को कॉकस और सेंट्रल एशिया की तरफ से होकर जाना पड़ेगा.
  • वहीं दूसरा सदर्न रूट है. यह रूट मिस्र, सऊदी अरब, ओमान और अरब सागर के ऊपर से होकर गुजरता हे. इन दोनों रूटों पर दुनिया भर की एयरलाइंस पहुंच गई हैं.
  • ऐसे में एयर ट्रैफिक काफी बढ़ गया है और कई एयर कंजेशन जैसी स्थिति बनने लगी है. इसका सीधा असर फ्लाइट टाइम पर पड़ रहा है.
  • दिल्ली और मुंबई से लंदन, पेरिस, फ्रैंकफर्ट सहित दूसरे यूरोपीय शहरों के लिए उड़ान भरने वाली कई फ्लाइट्स अब पहले के मुकाबले करीब डेढ़ से दो घंटे ज्यादा समय हवा में रहना होगा.
  • हवा में डेढ़ से दो घंटा ज्‍यादा रहने का सीधा मतलब है कि प्‍लेन में फ्यूल की खपत ज्‍यादा होगी और ऑपरेटिंग कॉस्ट भी बढ़ेगी. इसका असर फ्लाइट शेड्यूलिंग पर भी पड़ सकता है.

फ्यूल के बढ़ते खर्च ने बढ़ाई एयरलाइंस की चिंता
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ी चिंता फ्यूल का बढ़ता खर्च है. एविएशन इंडस्ट्री में जेट फ्यूल कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. जब फ्लाइट को सैकड़ों किलोमीटर लंबा रूट लेना पड़ता है, तो हजारों गैलन एडिशनल फ्यूल जलता है. इसका सीधा असर एयरलाइंस के बजट पर पड़ रहा है. इसके साथ ही वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम भी काफी बढ़ गया है. यानी जिन इलाकों के आसपास तनाव है, वहां से गुजरने वाली फ्लाइट्स का इंश्योरेंस पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है.

पैसेंजर्स की जेब पर भी लगेगी सीधी सेंध
एयरलाइंस के बढ़ते खर्चों का असर अब पैसेंजर्स की जेब पर भी दिखने लगा है. भारत से यूरोप जाने वाले कई रूटों पर टिकट के दाम 5 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं. वेस्‍ट एशिया के कुछ डेस्टिनेशन के लिए किराए में इससे भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. कई एयरलाइंस ने अपनी कुछ इंटरनेशनल फ्लाइट्स की फ्रीक्वेंसी भी कम कर सकती है, ताकि बढ़ती कॉस्‍ट को कंट्रोल किया जा सके. इतना ही नहीं, पैसेंजर्स को सिर्फ महंगे टिकट ही नहीं, बल्कि लंबे लेओवर, लेट डिपार्चर, देरी से पहुंचने वाली फ्लाइट्स और मिस्ड कनेक्शन जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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