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मानसून में ड्राइविंग से पहले जान लें टायर से जुड़ी ये जरूरी...


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बारिश के दौरान तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए. जब सड़क पर पानी जमा होता है तो टायर और सड़क के बीच पानी की एक परत बन जाती है. इससे टायर की पकड़ कमजोर हो जाती है. इस स्थिति को हाइड्रोप्लानिंग कहा जाता है. ऐसे समय वाहन का नियंत्रण अचानक खत्म हो सकता है. इसलिए बारिश में हमेशा धीमी और नियंत्रित गति से वाहन चलाना चाहिए.

जमशेदपुर: मानसून की शुरुआत हो चुकी है. कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है. बारिश के दौरान सड़कें गीली और फिसलन भरी हो जाती हैं. ऐसे में वाहन चलाते समय थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. कई बार अनुभवी ड्राइवरों की गाड़ियां भी फिसल जाती हैं. ऐसे में सुरक्षित सफर के लिए टायरों की सही स्थिति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. इसलिए बारिश शुरू होने से पहले टायरों की अच्छी तरह जांच कर लेना जरूरी है. टायर के सीनियर टेक्नीशियन जे. भूषण बताते हैं कि सबसे पहले टायर की ग्रिप और ट्रेड की जांच करनी चाहिए. ट्रेड यानी टायर की सतह पर बने खांचे. यही खांचे बारिश का पानी बाहर निकालते हैं. इससे टायर की सड़क पर पकड़ बनी रहती है. यदि ये खांचे घिस चुके हैं तो टायर की ग्रिप कमजोर हो जाती है. ऐसी स्थिति में वाहन फिसल सकता है. इसलिए यदि टायर ज्यादा घिस चुके हों तो उन्हें समय रहते बदल देना चाहिए.

एयर प्रेशर का रखें विशेष ध्यान
जे. भूषण बताते हैं कि टायर में सही एयर प्रेशर होना भी बेहद जरूरी है. कई लोग जरूरत से ज्यादा या जरूरत से कम हवा भरवा लेते हैं. दोनों ही स्थितियां नुकसानदायक हैं. कम हवा होने पर टायर जल्दी घिसता है. वहीं, ज्यादा हवा होने पर टायर की सड़क पर पकड़ कम हो जाती है. इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए हमेशा वाहन निर्माता कंपनी द्वारा बताए गए मानक के अनुसार ही टायर में हवा भरवानी चाहिए. समय-समय पर एयर प्रेशर की जांच भी करानी चाहिए.

व्हील अलाइनमेंट और बैलेंसिंग भी जरूरी
बारिश के मौसम में व्हील अलाइनमेंट और व्हील बैलेंसिंग की जांच भी बेहद जरूरी है. यदि वाहन का अलाइनमेंट सही नहीं होगा तो गाड़ी एक तरफ खिंच सकती है. इससे टायर असमान रूप से घिसने लगते हैं. बारिश के दौरान ऐसे वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए मानसून शुरू होने से पहले किसी अच्छे सर्विस सेंटर पर इसकी जांच जरूर करानी चाहिए.

कट, दरार और उभार को न करें नजर अंदाज
टायर की साइड वॉल पर कट, दरार या उभार दिखाई दे तो उसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार यह समस्या छोटी लगती है. लेकिन तेज रफ्तार या खराब सड़क पर यही छोटी खराबी बड़े हादसे की वजह बन सकती है. ऐसे टायर कभी भी फट सकते हैं. इसलिए यदि टायर में किसी भी तरह की खराबी दिखाई दे तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए.

बारिश में रखें नियंत्रित गति
जे. भूषण बताते हैं कि बारिश के दौरान तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए. जब सड़क पर पानी जमा होता है तो टायर और सड़क के बीच पानी की एक परत बन जाती है. इससे टायर की पकड़ कमजोर हो जाती है. इस स्थिति को हाइड्रोप्लानिंग कहा जाता है. ऐसे समय वाहन का नियंत्रण अचानक खत्म हो सकता है. इसलिए बारिश में हमेशा धीमी और नियंत्रित गति से वाहन चलाना चाहिए. आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी भी बनाए रखनी चाहिए.

गाड़ी की सर्विसिंग कराना ही काफी नहीं
जे. भूषण ने कहा कि सुरक्षित सफर के लिए केवल गाड़ी की सर्विसिंग कराना ही काफी नहीं है. टायरों की नियमित जांच और सही देखभाल भी उतनी ही जरूरी है. यही कारण है कि समय रहते टायरों की जांच बेहद जरूरी है. वहीं, जरूरत पड़ने पर उनकी मरम्मत या बदलाव कर दिया जाए, तो बारिश के मौसम में सफर ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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