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बेटियों का कमाल:सलीमा टेटे को पहली बार एशियन गेम्स में भारतीय टीम...




20वें एशियाई खेल के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम घोषित, झारखंड की 4 खिलाड़ियों को एक साथ मिला मौका हॉकी इंडिया ने 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होने वाले 20वें एशियाई खेल-2026 के लिए 20 सदस्यीय भारतीय महिला हॉकी टीम की घोषणा कर दी है। टीम में झारखंड की चार खिलाड़ियों सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, दीपिका सोरेंग और ब्यूटी डुंगडुंग को जगह मिली है। सबसे बड़ी बात यह है कि सिमडेगा की स्टार मिडफील्डर सलीमा टेटे को पहली बार एशियाई खेल में भारतीय महिला टीम की कप्तानी सौंपी गई है। वहीं दीपिका सोरेंग और ब्यूटी डुंगडुंग पहली बार एशियाई खेल में खेलेंगी। सिमडेगा की सलीमा टेटे पिछले कई वर्षों से भारतीय महिला हॉकी टीम की सबसे भरोसेमंद मिडफील्डरों में शामिल हैं। वह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी टीम की कमान संभाल चुकी हैं। उनकी गति, फिटनेस, नेतृत्व क्षमता और खेल की रफ्तार को नियंत्रित करने की कला ने उन्हें टीम का स्वाभाविक नेता बनाया है। पहली बार एशियाई खेल में भारतीय टीम की कप्तानी मिलना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। सलीमा के नेतृत्व में भारतीय टीम से स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक क्वालिफिकेशन हासिल करने की उम्मीद भी की जा रही है। दीपिका सोरेंग और ब्यूटी डुंगडुंग करेंगी डेब्यू, निकी प्रधान दूसरी बार एश्यिान गेम्स खेलेंगी 1. सलीमा टेटे (मिडफील्डर)
सलीमा का जन्म झारखंड के हॉकी गढ़ सिमडेगा के एक किसान परिवार में हुआ। पिता सुलक्षण टेटे स्थानीय स्तर पर हॉकी खेलते थे। उन्होंने ही सलीमा को शुरुआती प्रशिक्षण दी। अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन बॉल कंट्रोल और आक्रामक मिडफील्ड खेल के दम पर सलीमा ने कम उम्र में भारतीय टीम में जगह बनाई और आज वह देश की सबसे भरोसेमंद मिडफील्डरों में गिनी जाती हैं। 2. निक्की प्रधान (डिफेंडर)
निक्की प्रधान का बचपन खूंटी के हेसेल गांव में बीता। अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय टीम तक का सफर तय किया। 2016 में रियो ओलंपिक के लिए चयनित होकर इतिहास रचा। वे झारखंड की पहली महिला ओलंपियन हॉकी खिलाड़ी बनीं। निक्की भारतीय टीम की रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान करती हैं। 3. ब्यूटी डुंगडुंग (मिडफील्डर)
ब्यूटी का जन्म सिमडेगा के करंगागुड़ी गांव में हुआ। उन्होंने सिमडेगा स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रशिक्षण लिया। 2023 में गंभीर घुटने की चोट के कारण वह लंबे समय तक मैदान से बाहर रहीं। गेंद पर नियंत्रण, सटीक पासिंग और पूरे मैदान में सक्रिय रहने की उनकी शैली ने उन्हें राष्ट्रीय टीम में पहचान दिलाई है। 4. दीपिका सोरेंग (फॉरवर्ड): उभरती स्ट्राइकर दीपिका सोरेंग अपनी तेज रफ्तार और गोल करने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं। 2023 जूनियर एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया। उन्हें भारतीय सीनियर टीम में जगह मिली। विपक्षी रक्षा पंक्ति को भेदने की उनकी क्षमता भारतीय टीम के आक्रमण को मजबूती देती है।



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