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Success Story: यूक्रेन में पढ़ाई, कोरोना और युद्ध की चुनौती फिर भी...


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Jamshedpur News: जमशेदपुर के नीलाभ सेनगुप्ता ने यूक्रेन युद्ध और कोरोना के बावजूद मेडिकल की पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए आयोजित होने वाली देश की सबसे कठिन FMGE परीक्षा में 168 अंक हासिल कर सफलता पाई. वह हड्डी के एक बड़े डॉक्टर बनना चाहते हैं.

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जमशेदपुर: नीलाभ सेनगुप्ता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है. जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं. जमशेदपुर के रहने वाले नीलाभ ने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था. उनके पिता निलय सेनगुप्ता और माता नीला सेनगुप्ता चाहते थे कि उनका इकलौता बेटा समाज की सेवा करे और चिकित्सा के क्षेत्र में अपना नाम बनाए. नीलाभ भी पढ़ाई में शुरू से ही काफी मेधावी रहे और उन्होंने अपने माता-पिता के सपने को अपना लक्ष्य बना लिया.

मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन का किया रुख

नीलाभ ने अपनी स्कूली शिक्षा जमशेदपुर के प्रतिष्ठित लोयोला स्कूल से पूरी की. 12वीं के बाद उन्होंने नीट परीक्षा दी और मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन का रुख किया. सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन तभी दुनिया ने एक ऐसी आपदा देखी जिसने करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया. कोरोना महामारी और उसके बाद युद्ध की स्थिति ने विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. कई भारतीय छात्र अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस लौटने लगे, लेकिन नीलाभ ने हार नहीं मानी.

मुश्किल परिस्थितियों के बीच उन्होंने जॉर्जिया में स्थानांतरण लिया और वहां अपनी मेडिकल शिक्षा जारी रखी. लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अपनी पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की. मार्च 2026 में वह जमशेदपुर लौटे और इसके बाद उन्होंने विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए आयोजित होने वाली देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक एफएमजीई (Foreign Medical Graduate Examination) में भाग लिया.

परीक्षा में हासिल किए इतने नंबर

इस परीक्षा में लगभग 36 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जबकि पास होने वालों का प्रतिशत मात्र 12 प्रतिशत रहा. ऐसे कठिन मुकाबले में नीलाभ ने 168 अंक हासिल कर सफलता प्राप्त की. उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व की बात है. नीलाभ का सपना यहीं समाप्त नहीं होता. वह आगे चलकर ऑर्थोपेडिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहते हैं और हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में लोगों की सेवा करना चाहते है.

बता दें कि पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों में भाग लिया. वहां लोगों को स्वास्थ्य, दवाइयों और बीमारियों से जुड़ी सही जानकारी देने का काम किया. उनका मानना है कि आज भी समाज में दवाइयों और इलाज को लेकर कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी है.

तबला वादन में रह चुके हैं स्कॉलर

वहीं, पढ़ाई के अलावा नीलाभ की रुचि कई अन्य क्षेत्रों में भी है. उन्हें संगीत और तबला वादन का शौक है. वह तबला में नेशनल स्कॉलर रह चुके हैं. इसके साथ ही वह उत्कृष्ट तैराक भी हैं और झारखंड स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. फोटोग्राफी भी उनका पसंदीदा शौक है. संघर्ष, मेहनत और बहुमुखी प्रतिभा का शानदार उदाहरण बने नीलाभ सेनगुप्ता आज युवाओं को यह संदेश देते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो दुनिया की कोई भी कठिनाई सफलता की राह नहीं रोक सकती है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें



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