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झारखंड के जंगली सुपरफूड रुगड़ा को जल्द ही जीआई टैग मिल सकता है. केवल जून और जुलाई में मिलने वाली इस अनोखी सब्जी की कीमत 1200 रुपये प्रति किलो तक होती है. पकने के बाद इसका स्वाद मटन जैसा होता है. औषधीय गुणों से भरपूर रुगड़ा कैंसर जैसे गंभीर रोगों से लड़ने में सक्षम माना जाता है.
रुगड़ा को जल्द मिलेगा जीआई टैग(फाइल फोटो)
रांचीः झारखंड के आदिवासियों के प्रसिद्ध सुपरफूड रुगड़ा को जल्द ही GI टैग मिल सकता है. अनोखे स्वाद के कारण इसे शाकाहारियों का मटन भी कहा जाता है. झारखंड के विभिन्न जंगलों में मानसून की शुरुआत होते ही इसकी प्राकृतिक उपज शुरू हो जाती है. यह जंगली सब्जी जंगलों से सटे स्थानीय बाजारों में कुछ ही दिनों के लिए उपलब्ध होती है. इसे प्रकृति का एक अनमोल खजाना माना जाता है. सबसे खास बात यह है कि इस सब्जी को खेतों में उगाना बिल्कुल भी संभव नहीं है.
कीमत 1200 रुपये किलो
आमतौर पर रुगड़ा हर साल केवल जून और जुलाई के महीने में ही बाजार में मिलता है. यह राज्य की सबसे अनोखी और बेहद लोकप्रिय वन उपजों में से एक है. राज्य के कई अलग-अलग इलाकों में लोग इसे ‘पुटू’ के नाम से भी पुकारते हैं. इस सब्जी की कीमत आपको हैरान कर सकती है. बाजार में यह 1000-1200 रुपये प्रति किलो के भाव में बिकती है.
जमीन के नीचे होता है रुगड़ा
रुगड़ा की बनावट और इसे खोजने का तरीका भी बेहद दिलचस्प है. यह सब्जी जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देती है. यह मिट्टी के अंदर लगभग 2 से 3 इंच नीचे आलू या कंचे जैसी गोल आकृति में विकसित होती है. जब इसका आकार बढ़ने लगता है, तो इसके दबाव से ऊपर की मिट्टी में हल्की दरारें पड़ जाती हैं. जंगलों का अच्छा अनुभव रखने वाले स्थानीय लोग इन्हीं बारीक दरारों को पहचान लेते हैं. वे लकड़ी की सहायता से बेहद सावधानीपूर्वक मिट्टी खोदकर रुगड़ा बाहर निकालते हैं.
औषधीय गुणों की खान है यह सुपरफूड
रुगड़ा न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक बेहतरीन सुपरफूड है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में काफी फायदेमंद साबित होता है. कई तरह के रोगों की दवा बनाने में भी रुगड़ा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो इंसानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने में मदद करते हैं.
इसके पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें उच्च कोटि का प्रोटीन पाया जाता है. इसके अलावा रुगड़ा में विटामिन सी, विटामिन बी, राइबोफ्लेविन, थाइमिन और विटामिन बी 12 की भरपूर मात्रा होती है. साथ ही इसमें फोलिक एसिड, आवश्यक लवण, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटैशियम, तांबा और विटामिन डी भी प्रचुर मात्रा में मौजूद रहता है.
जीआई टैग की रेस में झारखंड के कई उत्पाद
झारखंड के इस अनोखे रुगड़ा समेत कई अन्य पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी चल रही है. इसके लिए जीआई रजिस्ट्री में आवेदन जमा किए गए हैं. इस लिस्ट में रुगड़ा के अलावा झारखंड की संस्कृति से जुड़े कई और नाम शामिल हैं. इनमें मांदर, पैतकर पेंटिंग, लाह की चूड़ियां, देवघर का प्रसिद्ध पेड़ा, रागी, धुस्का और साल के बीज शामिल हैं. इन सभी को जल्द ही जीआई टैग मिलने की प्रबल संभावना है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.