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जसीडीह की खट्टी मीठी पापड़ी चाट, बाबा के दर्शन के बाद खाना...


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Jasidih Famous Papadi Chaat: बाबा बैद्यनाथ धाम की नगरी देवघर सिर्फ धार्मिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लजीज व्यंजनों के लिए भी दूर-दूर तक मशहूर है. अगर आप देवघर के जसीडीह पहुंचे और यहां की मशहूर पापड़ी चाट का स्वाद नहीं चखा, तो समझिए आपकी यात्रा अभी अधूरी है. जसीडीह में वर्षों पुरानी दो ऐसी दुकानें हैं, जहां बनने वाली स्पेशल पापड़ी चाट लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. यहां आलू टिक्की से ज्यादा लोग पापड़ी चाट खाना पसंद करते हैं. यही वजह है कि रोजाना शाम होते ही दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है. स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले लोग भी इस चाट का स्वाद लेने जरूर पहुंचते हैं.

सावन के महीने में इन दुकानों की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के बाद श्रद्धालु सीधे जसीडीह की इन मशहूर दुकानों का रुख करते हैं. खासकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालु हर साल यहां पहुंचकर पापड़ी चाट का स्वाद लेना नहीं भूलते. कई श्रद्धालु तो ऐसे भी हैं, जो हर सावन में दर्शन के साथ-साथ इस चाट का स्वाद लेने की परंपरा निभाते आ रहे हैं. यही वजह है कि वर्षों से यह चाट जसीडीह की पहचान बन चुकी है.

लोकल 18 से बातचीत करते हुए दुकानदार प्रकाश राउत ने बताया कि उनकी दुकान पिछले 45 वर्षों से लोगों की सेवा कर रही है. 1980-81 में इस दुकान की शुरुआत उनके पिता ने की थी और अब दूसरी पीढ़ी के रूप में वह इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उस समय कीमत मात्र 5 रुपये थी. उन्होंने बताया कि समय बदल गया, लेकिन स्वाद वही पुराना रखा गया है.

उनकी दुकान पर भेलपूरी, चाट और कई तरह के स्नैक्स मिलते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग हमेशा पापड़ी चाट की रहती है. सिर्फ 40 रुपये में मिलने वाली यह चाट स्वाद और क्वालिटी की वजह से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. कई ग्राहक तो वर्षों से लगातार उनकी दुकान पर आ रहे हैं और अब अपने बच्चों को भी यही स्वाद चखाने लाते हैं.

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वहीं, जसीडीह के ही दूसरे पुराने दुकानदार रमेश जी ने बताया कि वह करीब 40 वर्षों से पापड़ी चाट बना रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी दुकान की पहचान ही पापड़ी चाट है. जिले के हर कोने से लोग यहां पहुंचते हैं और बाहर से आने वाले पर्यटक भी एक बार इसका स्वाद जरूर चखते हैं. उनके अनुसार, स्वाद का सबसे बड़ा राज ताजी सामग्री, संतुलित मसाले और बनाने का वर्षों पुराना अनुभव है. यही कारण है कि एक बार यहां की चाट खाने वाला ग्राहक दोबारा जरूर लौटकर आता है.

अगर इस मशहूर पापड़ी चाट की रेसिपी की बात करें, तो सबसे पहले उबले हुए आलू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके साथ ताजे टमाटर को बारीक काटकर नमक, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस, भुजिया, दो-तीन प्रकार का नमकीन मिक्सचर और अन्य खास मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है.

इसके बाद एक प्लेट में कुरकुरी पापड़ी सजाई जाती है. उस पर मीठी चटनी डाली जाती है और फिर तैयार आलू-टमाटर का मसालेदार मिश्रण फैलाया जाता है. आखिर में ऊपर से भुजिया और मसाले डालकर इसे ग्राहकों को परोसा जाता है. खट्टा, मीठा और हल्का तीखा स्वाद इस पापड़ी चाट को बाकी चाट से बिल्कुल अलग बना देता है.

यही वजह है कि जसीडीह की यह पापड़ी चाट आज सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि देवघर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक खास पहचान बन चुकी है. बाबा धाम के दर्शन के बाद लोग इस स्वाद को अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं. स्वाद, परंपरा और वर्षों का भरोसा ही इन दुकानों को आज भी लोगों की पहली पसंद बनाए हुए है.

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