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देवघर के किसान वकील यादव ने आम के बागान में कद्दू की खेती शुरू की है. उन्होंने खाली पड़ी जमीन पर इंटरक्रॉपिंग तकनीक अपनाई. इससे खरपतवार की समस्या खत्म हुई और सिंचाई की बचत हो रही है. अब बागान से रोजाना 50 कद्दू टूट रहे हैं. किसान हर दिन अच्छी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं.
देवघर: आम का मौसम खत्म होते ही ज्यादातर बागान खाली नजर आने लगते हैं. पेड़ों पर फल नहीं रहते और किसान अगले सीजन का इंतजार करते हैं. लेकिन देवघर के एक किसान ने इस सोच को बदल दिया है. उन्होंने आम के बागान की खाली पड़ी जमीन को कमाई का जरिया बना दिया है. आम की फसल खत्म होने के बाद अब उसी बागान में वैज्ञानिक तरीके से एक एकड़ मे कद्दू की खेती कर रहे हैं और अच्छी-खासी अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं.खास बात यह है कि इससे बागान की देखभाल भी हो रही है और जमीन का पूरा उपयोग भी हो रहा है.
क्या कहते है किसान वकील यादव?
देवघर के प्रगतिशील किसान वकील यादव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि किसान अगर सिर्फ आम की बागवानी पर निर्भर रहते हैं तो साल में केवल एक बार ही अच्छी कमाई कर पाते हैं. लेकिन अगर उसी बागान में खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल अंतःफसलीकरण यानी इंटरक्रॉपिंग के लिए किया जाए तो उसी खेत से साल में कई बार आमदनी ली जा सकती है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करीब एक एकड़ आम के बागान में कद्दू की खेती शुरू की और अब इसका बेहतर परिणाम भी मिल रहा है.
कद्दू की खेती से किसान को मिला फायदा
वकील यादव बताते हैं कि कद्दू की खेती करने से सिर्फ अतिरिक्त कमाई ही नहीं हो रही, बल्कि आम के बागान को भी इसका सीधा फायदा मिल रहा है. कद्दू की फसल के लिए जो सिंचाई की जाती है, उसी पानी से आम के पौधों को भी नमी मिल जाती है. इससे अलग से बार-बार पटवन करने की जरूरत नहीं पड़ती.वहीं खेत में नियमित काम होने के कारण बागान की साफ-सफाई भी बनी रहती है और खरपतवार उगने का मौका नहीं मिलता. इससे पौधों का विकास भी बेहतर होता है और बागान हमेशा व्यवस्थित नजर आता है.
खरपतवार की समस्या होती खत्म
उन्होंने बताया कि आम के पेड़ों के बीच काफी जगह खाली रहती है.यदि इस जमीन को यूं ही छोड़ दिया जाए तो वहां सिर्फ घास और खरपतवार उगते हैं. लेकिन उसी जमीन पर कद्दू जैसी बेल वाली फसल लगाकर किसान आसानी से अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं.इससे जमीन की उत्पादकता बढ़ती है और एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिलता है. यही वजह है कि अब आसपास के कई किसान भी उनके इस मॉडल को देखने पहुंच रहे हैं और इसकी जानकारी ले रहे हैं.
रोजाना 50 कद्दू की कर रहे है बिक्री
वकील यादव के अनुसार इस समय बाजार में कद्दू की अच्छी मांग बनी हुई है.अभी करीब 25 रुपये प्रति पीस की दर से कद्दू बिक रहा है. रोजाना उनके खेत से 50 से अधिक कद्दू निकल रहे हैं, जिससे प्रतिदिन अच्छी आमदनी हो रही है. उनका कहना है कि अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें और खाली पड़ी जमीन का सही उपयोग करें तो खेती का खर्च आसानी से निकल सकता है और मुनाफा भी कई गुना बढ़ाया जा सकता है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.