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मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है गोकुल, यहां जन्म होने के बाद भगवान कृष्ण को वासुदेव द्वारा लाया गया था. भगवान कृष्ण के गंदे कपड़े इसी कुंड में धोए गए थे. द्वापर काल के इस कुंड को पोतरा कुंड के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस कुंड में आज भी नवजात शिशु के गंदे कपड़े धोए जाते हैं. तभी उसका छठी पूजन होता है. योगीराज श्रीकृष्ण ने अपने जीवन काल में अनेकों लीलाओं को किया.
मथुरा: गोकुल एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां भगवान कृष्ण अपनी बाल अवस्थाओं की लीला को करते थे. साथ ही एक कुंड ऐसा भी है. जन्म होने के बाद उनके गंदे कपड़े इसी कुंड में धोए जाते थे. हर दिन हजारों की संख्या में भक्त इस कुंड के दर्शन कर अपने आपको धन्य करते हैं. द्वापर युग की झलक आज भी गोकुल के इस पोतरा कुंड में दिखाई देती है. भगवान का स्वरूप इस कुंड को माना जाता है.
कृष्ण को लाए थे वासुदेव
मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है गोकुल, यहां जन्म होने के बाद भगवान कृष्ण को वासुदेव द्वारा लाया गया था. भगवान कृष्ण के गंदे कपड़े इसी कुंड में धोए गए थे. द्वापर काल के इस कुंड को पोतरा कुंड के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस कुंड में आज भी नवजात शिशु के गंदे कपड़े धोए जाते हैं. तभी उसका छठी पूजन होता है. योगीराज श्रीकृष्ण ने अपने जीवन काल में अनेकों लीलाओं को किया. कहीं गाय चराई तो कहीं दूध दही की मटकी फोड़ी. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी उस लीला के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आपने सुनी होगी. योगीराज श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के राजा कहे जाने वाले कंस की कारगार में हुआ. कंस के कारागार में जन्म होने के बाद श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने उनके वस्त्र और उपवस्त्र पोतरा कुंड में धोए थे.
जन्म लिए बच्चे का धुलते हैं वस्त्र
कुंड की मान्यता के अनुसार इस कुंड में जन्म लिए बच्चे के वस्त्र नहीं धुल जाते तबतक उसकी शुद्धि नहीं होती कहा ये भी जाता है कि पोतरा कुंड में पानी अंदरूनी स्रोतों के माध्यम से भरा जाता है. लोकल 18 की टीम जब गोकुल पहुंची और इस कुंड की मान्यता के बारे में लोकल 18 की टीम से गोकुल के स्थानीय निवासी और कुंड के पुजारी रामबाबू शर्मा से बात की. पोतरा कुंड में जगह-जगह शुरू हो तो बनाए गए हैं, जिससे कुंड में पानी भरा जा सके. काफी लंबे समय से कुंड में पानी ना भरा होने के कारण काई जम गई है. यहां आने वाले श्रद्धालु बड़े ही लालायित रहते हैं. कुंड में नीचे उतरने के लिए लेकिन कुंड की बैरिकेडिंग और किसी भी व्यक्ति को नीचे उतरने की परमिशन नहीं है. पोतरा कुंड की गहराई का आज तक पता नहीं चल पाया है कि कुंड की कितनी गहराई है. कुंड में नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें