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स्वाद में मटन से भी आगे है यह जंगली सब्जी, साल में...


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जमशेदपुर के बाजारों में देसी जंगली मशरूम की बहार है. बारिश में उगने वाला यह मशरूम 1000 रुपये किलो तक बिक रहा है. स्वाद में इसे शाकाहारियों का मटन कहा जाता है. इसका सीजन सिर्फ 10-15 दिनों का होता है. इससे ग्रामीणों को अच्छी आमदनी हो रही है.

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जमशेदपुर: मानसून की पहली बारिश के साथ ही जमशेदपुर के बाजारों में देसी मशरूम की बहार लौट आई है. स्टेशन रोड, साकची और आसपास के बाजारों में इन दिनों सरायकेला, पटमदा, बोड़ाम, हालीपोखर, सिनी और हाता क्षेत्र के ग्रामीण जंगलों से प्राकृतिक रूप से उगने वाले मशरूम लेकर पहुंच रहे हैं. बारिश के मौसम में मिलने वाला यह देसी मशरूम स्वाद और पौष्टिकता के कारण लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. बाजार में इसकी मांग इतनी अधिक है कि कई किस्मों के मशरूम 1000 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बिक रहे हैं.

जंगल में होता है यह मशरूम
ग्रामीण महिला प्रेमी मुर्मू बताती हैं कि बारिश शुरू होते ही गांव के लोग सुबह चार बजे जंगल और खेतों के आसपास निकल जाते हैं. पेड़ों की जड़ों, सड़ी-गली लकड़ियों, पुआल और नम जमीन पर उगने वाले मशरूम को सावधानी से एकत्र किया जाता है. इसके बाद इन्हें साफ कर टोकरी और थैलों में भरकर जमशेदपुर के बाजारों में बिक्री के लिए लाया जाता है. उनका कहना है कि यह काम केवल कुछ दिनों तक ही चलता है क्योंकि देसी मशरूम का मौसम बहुत छोटा होता है. जंगलों में उगने के कारण इसे जंगली मशरूम भी कहा जाता है.

बाजार में इस समय कई तरह के देसी मशरूम देखने को मिल रहे हैं. इनमें बटन मशरूम, पुआल मशरूम, बस करील, रुगड़ा और अन्य स्थानीय किस्में शामिल हैं. रुगड़ा और बस करील को झारखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इनका स्वाद इतना खास होता है कि कई लोग इसे मांसाहारी व्यंजनों से भी बेहतर बताते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इन मशरूमों की सब्जी, झोल और भुजिया बड़े चाव से बनाई जाती है.

शाकाहारियों का मटन
खरीदारों का कहना है कि देसी मशरूम की सब्जी का स्वाद बाजार में मिलने वाले सामान्य मशरूम से बिल्कुल अलग होता है. टेस्ट के मामले में इसे शाकाहारियों का मटन भी कहा जाता है. इसमें प्राकृतिक खुशबू और मिट्टी की सौंधी महक होती है, जो भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ा देती है. यही वजह है कि ऊंची कीमत होने के बावजूद लोग इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते. कई ग्राहक तो अपने परिचित ग्रामीणों को पहले से ही मशरूम लाने का आग्रह कर देते हैं.

देसी मशरूम में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और कई प्रकार के खनिज तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. हालांकि लोगों को केवल पहचान वाले और सुरक्षित मशरूम ही खरीदने और खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कुछ जंगली मशरूम जहरीले भी हो सकते हैं.

कुछ दिन ही उपलब्ध
ग्रामीणों के लिए यह मौसम अतिरिक्त आय का भी अच्छा अवसर लेकर आता है. केवल 10 से 15 दिनों तक मिलने वाले इन मशरूमों की बिक्री से कई परिवारों को अच्छी आमदनी हो जाती है. बरसात के इस छोटे से मौसम में जंगल की यह सौगात न केवल ग्रामीणों की जेब भर रही है, बल्कि शहरवासियों की थाली में भी देसी स्वाद का तड़का लगा रही है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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