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Kissa kargil Ka: भले ही पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ यह कहें कि कारगिल पर हमले की जानकारी उनको नहीं थे, लेकिन असल सच तो यही है कि नवाज शरीफ की सीढ़ी पर चढ़कर परवेज मुशर्रफ ने ऑपरेशन ब्रद की साजिश रची थी. बाद में पाकिस्तान के इसी ऑपरेशन बद्र को कारगिल वॉर के तौर पर जाना गया था. नवाज शरीफ के साथ मिलकर परवेज मुशर्रफ ने किस तरह रची कारगिल में हमले को किस तरह अंजाम दिया, जानने के लिए पढ़ें कारगिल का किस्सा का पहला भाग.
भले ही नवाज शरीफ कारगिल युद्ध की जानकारी को लेकर नकारते रहे हों, पर हकीकत यही है कि उनकी सीढ़ी पर चढ़कर ही मुशर्रफ ने ऑपरेशन बद्र को अंजाम दिया था. (एआई इमेज)
Kissa Kargil Ka: कारगिल युद्ध से पांच साल बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बयान दिया था कि परवेज मुशर्रफ को सेना प्रमुख बनाकर उन्होंने बड़ी भूल थी. अपने बयान में शरीफ ने यह भी कहा था कि उन्हें मुशर्रफ के ऑपरेशन बद्र और कारगिल युद्ध के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इस बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे कि क्या वाकई नवाज शरीफ इस बारे में कुछ नहीं जानते थे? या फिर वो भी इस साजिश का हिस्सा थे? तो इस सवाल का खरा-खरा जवाब यही था कि पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की तैयार की गई सीढ़ी पर चढ़कर ही परवेज मुशर्रफ में ऑपरेशन बद्र को अंजाम दिया था. असल में ऑपरेशन बद्र ही कारगिल में हमले का कोड था.
दस्तावेजों के अनुसार, नवाज शरीफ ने परवेज मुशर्रफ के साथ मिलकर अगस्त 1998 से ही ऑपरेशन बद्र की बिसात बिछाना शुरू कर दी थी. शायद यही वजह थी कि नवाज शरीफ ने मुशर्रफ को पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनाने के लिए तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जहांगीर करामत से बैर कर लिया था. कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले जहांगीर करामत नहीं चाहते थे कि परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ बने. दोनों का मनमुटाव तब खुलकर सामने आ गया था, जब नवाज शरीफ ने जहांगीर करामत की खुलकर सार्वजनिक आलोचना शुरू कर दी थी. इस आलोचना से आहत होकर करामत ने रिटायर होने से पहले ही आर्मी चीफ की पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था.
- परवेज को आर्मी चीफ बनाने के लिए शरीफ के हथकंडे: करामत के इस्तीफा देते ही परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनाने का रास्ता साफ हो चुका था. हालांकि, उस समय वरीयता के हिसाब से परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान आर्मी में तीसरे नंबर का शीर्ष सैन्य अधिकारी थे. बावजूद इसके, नवाज शरीफ ने दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को दरकिनार कर परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान का सेना प्रमुख बना दिया.
- आर्मी चीफ बनते ही परवेज मुशर्रफ ने दिए कई बड़े संकेत: पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनते ही मुशर्रफ एक्शन मोड़ में आ गए थे. उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल महमूद अहमद को 10वीं कोर का कमांडर बनाया. इससे पहले महमूद अहमद पाक अधिकृत कश्मीर का सैन्य प्रभारी थे. इसके अलावा, नियमों को ताक में रखकर आईएसआई में तैनात लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आजिज खान को पाक आर्मी का चीफ स्टाफ बनाया गया. ये बदलाव एक बड़ी साजिश का साफ संकेत दे रहे थे.
- मुशर्रफ ने शुरू की कारगिल में हमले के लिए ‘बद्र’ की तैयारी: ऑपरेशन बद्र की बिसात पर अपने प्यादों की तैनाती के बाद परवेज मुशर्रफ ने कारगिल पर हमले की तैयारी नवंबर 1998 में शुरू कर दी थी. इस हमले के जरिए वह जोजी ला दर्रे की पूर्वी नियंत्रण रेखा की दिशा बदलना चाहते थे. ऐसा करने से श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर भारत का नियंत्रण कमजोर हो जाता. साथ ही जम्मू और कश्मीर में घुसने का रास्ता साफ पूरी तरह से हो जाता.
- बेहद सीक्रेट रखी गई थी कारगिल में हमले की साजिश: कारगिल में हमले की साजिश को बेहद सीक्रेट रखा गया था. इस साजिश के बारे में पाकिस्तान के चुनिंदा सैन्य अधिकारियों को ही पता था. ‘बद्र’ को अंजाम देने के लिए नार्थ लाइट इन्फेंट्री बटालियनों को खास तौर पर तैयार किया गया था. हथियारों और गोला-बारूद को बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए नए रास्तों को तैयार किया गया. साथ ही, आतंकियों के भेष में घुसपैठ करने वाले सैनिकों को ड्रॉप करने के लिए हेलीपैड भी तैयार किए गए थे.
- तैयारियां पूरी होते ही पाक बनाने लगा पेट्रोलिंग पोस्ट: जमीनी स्तर पर सभी तैयारियां पूरी करने के बाद पाक सेना ने फरवरी 1999 से ही एक्शन शुरू कर दिया था. पहले पेट्रोलिंग पार्टियों को इलाके और भारतीय सेना की टोह लेने के लिए भेजा गया. इसके बाद, सीमावर्ती इलाकों की टोह लेने के बाद पाक सेना ने पेट्रोलिंग पोस्ट बनाना शुरू कर दिया था. साजिश के तहत ऑपरेशन बद्र को अप्रैल-मई 1999 में अंजाम दिया जाना था.
लेह से जोड़ता है.
क्या मुशर्रफ के साथ नवाज शरीफ भी थे शामिल?
पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कारगिल युद्ध को हमेशा अपने दामन में दाग की तरह पेश किया. उन्होंने बार-बार यह साबित करने की कोशिश की कि उन्हें मुशर्रफ के मंसूबों के बारे में नहीं पता था. कई मौकों पर उन्होंने कहा कि मुशर्रफ ने कभी उन्हें ऑपरेशन के मकसद के बारे में नहीं बताया. कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना शामिल है, इसकी जानकारी उन्हें तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से पता चली थी. बावजूद इसके, कई बातें ऐसी हैं, जो नवाज शरीफ के दावों पर सवाल खड़े करती हैं.
- नवाज शरीफ को दो बार दी गई थी जानकारी: खुफिया रिपोर्टें के मुताबिक, नवाज शरीफ को दिसंबर 1998 या जनवरी 1999 में पहली बार कारगिल में हमले के बारे में बताया गया था. फिर मार्च 1999 में उन्हें दोबारा इस बात की जानकारी दी गई थी. मुशर्रफ और उनके चीफ स्टाफ आजिज खान के बीच हुई सीक्रेट बातचीत से भी इस बात की तस्दीक होती है.
- नवाज शरीफ ने तेज किए भारत विरोधी बयान: नवाज शरीफ ने लाहौर घोषणा के बावजूद अप्रैल 1999 में भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया था. खासकर जब भारत ने अग्नि-2 का परीक्षण किया, तब पाक के विदेश मंत्री सरताज आजिज और सीनेटर अक्रम जाकी ने भारत पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया था.
- भारत को गुमराह करने के लिए लिया यह फैसला: नवाज शरीफ ने आईएसएफ के चीफ रहे लेफ्टिनेंट जनरल जावेद नासिरको पाकिस्तानी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का प्रमुख नियुक्त किया था. बैसाखी समारोह के नाम पर नवाज शरीफ ने 13 अप्रैल 1999 को सिख अलगाववादियों से खासतौर पर मुलाकात की. शरीफ भारत को यह दिखाना चाहते थे कि पाकिस्तान पंजाब में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की साजिश रच रहा है.
- युद्ध से पहले शरीफ ने मुशर्रफ को दी थीं स्पेशल पॉवर: कारगिल युद्ध से कुछ महीने पहले नवाज शरीफ ने मुशर्रफ को स्पेशल पॉवर देते हुए ज्वाइंट चीफ कमेटी का कार्यवाहक अध्यक्ष बना दिया था. इसके बाद मुशर्रफ को स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांडर को तैनात करने की पॉवर मिल गई थी. पॉवर मिलने के साथ परवेज मुशर्रफ ने पाकिस्तानी सेना के शीर्ष में व्यापक स्तर पर बदलाव किया था.
- सोची समझी चाल के तहत की थी चीन और अमेरिका की यात्रा: कारगिल युद्ध के दौरान नवाज शरीफ ने सोची समझी चाल के तहत चीन और अमेरिका का दौरा किया था. बाजी पलटने पर वहां के नेताओं से भारत पर दबाव बनाने की अपील की, ताकि भारत पाकिस्तान की शर्तों पर संघर्ष विराम के लिए राजी हो जाए. उन्होंने राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से यहां तक कहा कि अगर वो उनकी बात नहीं मानते, तो पाकिस्तान लौटने पर उनकी जान खतरे में पड़ जाएगी.
नवाज शरीफ को पता थी कारगिल में हमले की सच्चाई
खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सच है कि पाकिस्तानी सेना के आला अधिकारियों ने अपने प्रधानमंत्री को कारगिल ऑपरेशन के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी. लेकिन उससे भी बड़ा सच यह भी है कि नवाज शरीफ को लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर करने से पहले ही पता था कि पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा के पार कर कारगिल में हमले की तैयारी कर रही है. युद्ध के बाद यह बात भी सामने आई कि नवाज शरीफ मुशर्रफ के साथ पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों में गए. थे
वहां उन्होंने उत्तरी लाइट इंफेंट्री के सैनिकों के परिवारों से मुलाकात की थी. यह वही सैन्य परिवार थे, जिन्हें आतंकियों के भेष में कारगिल भेजा गया था. हालांकि यह बात दीगर है कि पाकिस्तान ने युद्ध में मारे गए सैनिकों को न केवल पहचानने से इंकार कर दिया था, बल्कि उनके शव लेने से भी इंकार कर दिया था. (इस खबर के कुछ अंश भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक की पुस्तक ‘कारगिल वॉर: फ्रॉम सप्राइज टू विक्ट्री’ से भी लिए गए हैं.)
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as <strong>Assistant Editor at News18 Hindi Digital</strong>, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…और पढ़ें