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Deoghar NEET Success Story: देवघर की नेहा कुमारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद नीट परीक्षा में 41,235वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया. न वो कभी शहर गईं न ही महंगी कोचिंग ली केवल सेल्फ स्टडी से नेहा ने परीक्षा पास की है.
देवघर. कभी खेतों में पसीना बहाते पिता तो कभी चूल्हे की चिंता करती मां. लेकिन इन सबके बीच बेटी ने एक ऐसा सपना देखा, जिसने आज पूरे परिवार को खुशियों की सौगात दे दी. देवघर के सारठ की नेहा कुमारी ने अपनी मेहनत के दम पर नीट में शानदार सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि सपने गरीब नहीं होते, उन्हें पूरा करने का हौसला बड़ा होना चाहिए.
देवघर जिले के सारठ प्रखंड के खखंडा गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो हर उस छात्र-छात्रा के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. गांव की बेटी नेहा कुमारी ने राष्ट्रीय स्तर की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल नीट परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती. नेहा ने नीट में ऑल इंडिया 41,235वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे सारठ और देवघर जिले को भी गौरवान्वित किया है.
ना बड़े शहर, ना महंगी कोचिंग, फिर भी नीट में पाई सफलता
नेहा की सफलता इसलिए और भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किसी बड़े शहर का सहारा नहीं लिया. न ही उन्होंने किसी महंगे कोचिंग संस्थान में जाकर तैयारी की. गांव के साधारण माहौल में रहकर, सीमित संसाधनों के बीच लगातार मेहनत की और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान बनाए रखा. कई बार संसाधनों की कमी और मुश्किल परिस्थितियां भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनकी यही लगन और मेहनत आज रंग लाई है.
सरकारी स्कूल से पास की है मैट्रिक और इंटर की परीक्षा
नेहा की शुरुआती पढ़ाई भी पूरी तरह सरकारी स्कूल से हुई है. उन्होंने अपनी मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई राय बहादुर जगदीश प्रसाद सिंह प्लस टू उच्च विद्यालय, बामनगामा से पूरी की. स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने घर पर रहकर ही नीट की तैयारी शुरू की. नियमित पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने यह बड़ी सफलता हासिल की. उनकी इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि अगर पढ़ाई के प्रति ईमानदारी और मेहनत हो, तो सरकारी स्कूल से पढ़ने वाला छात्र भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है.
पिता हैं पेशे से किसान
नेहा के पिता मृत्युंजय प्रसाद सिंह पेशे से किसान हैं. खेती-किसानी से परिवार का खर्च चलता है. वहीं उनकी मां मुन्नी देवी गृहिणी हैं और हमेशा बेटी का हौसला बढ़ाती रहीं. माता-पिता ने अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव सहयोग किया और बेटी ने भी उनकी उम्मीदों को टूटने नहीं दिया. आज जब नीट का परिणाम आया और नेहा की शानदार रैंक सामने आई, तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. गांव में भी लोग लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं.
गांव में है खुशी का माहौल
नेहा की इस सफलता से पूरे खखंडा गांव में खुशी का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बेटी ने जो कर दिखाया है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगा. स्थानीय लोग मानते हैं कि नेहा की मेहनत और सफलता से गांव के दूसरे बच्चे भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला जुटाएंगे. नेहा की कहानी सिर्फ एक परीक्षा में सफलता की नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष की कहानी है. यह सफलता बताती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे जरूरी चीज महंगे संसाधन नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और लगातार की गई मेहनत होती है. आज देवघर की यह बेटी हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें