भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

राफेल जेट पर भारत की मनचाही मुराद पूरी, 2070 तक नो टेंशन...


Last Updated:

Rafale Fighter Jet Deal: भारत अपने एरियल अटैक कैपेबिलिटी को लगातार बढ़ाने की कोशिश में जुटा है. फाइटर जेट इसमें काफी अहम है. इंडियन एयरफोर्स के लिए 42 स्‍क्‍वाड्रन सैंक्‍शन हैं, लेकिन मौजूदा समय में इसकी संख्‍या 29 है. सामरिक रूप से यह स्थिति इसलिए बेहद चिंताजनक है, क्‍योंकि भारत की सीमा एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती है. इन दोनों के साथ देश युद्ध लड़ चुका है. जमीनी हालात तो टू-फ्रंट वॉर की तैयारी की होनी चाहिए, पर स्थिति इसके बिल्‍कुल उलट है. लेकिन भारत अब लड़ाकू विमान की इस कमी को खत्‍म करने की दिशा में दो मोर्चों पर लगातार आगे बढ़ रहा है – आयात और देसी टेक्‍नोलॉजी से घर में ही फाइटर एयरक्राफ्ट का प्रोडक्‍शन.

राफेल फाइटर जेट पर भारत की मनचाही मुराद पूरी, 40 साल तक कोई टंटा नहींZoom

मेड इन इंडिया राफेल फाइटर जेट डील के तहत डसॉल्‍ट एविएशन 40 साल तक ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्‍यूफैक्‍चरर सपोर्ट देने के लिए तैयार हो गई है. (फाइल फोटो/Reuters)

Rafale Fighter Jet Deal: हाल में आई एक रिपोर्ट की मानें तो चीन के पास फिलहाल 500 स्‍टील्‍थ फाइटर जेट का बेड़ा है. संभावना जताई जा रही है कि पाकिस्‍तान अपने मित्र देश चीन से 5th जेनरेशन का फाइटर जेट खरीद सकता है. इसको लेकर जल्‍द ही डील होने की संभावना भी जताई जा रही है. वहीं, भारत अभी भी 4th जेनरेशन लड़ाकू विमान पर ही डिपेंड है. भारत इस गैप को खत्‍म करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है, जिसके तहत नेक्‍स्‍ट जेनरेशन (मुख्‍य रूप से पांचवीं और छठी पीढ़ी) का फाइटर जेट डेवलप किया जाएगा. इसके परियोजना के तहत तेजी से काम चल रहा है. फिलहाल IAF के अटैकिंग फ्रंट पर Su-30MKI और राफेल फाइटर जेट्स अहम रोल में हैं. भारत ने फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का करार किया है. इसमें अधिकांश विमान को भारत में ही डेवलप किए जाएंगे. यह सौदा 3.25 लाख करोड़ रुपये का बताया जा रहा है, जो भारत के इतिहास की सबसे बड़ी डिफेंस डील है. अब इसी महाडील को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. राफेल फाइटर जेट की निर्माता कंपनी डसॉल्‍ट एविएशन 40 साल तक मैन्‍यूफैक्‍चरर्स सपोर्ट देने को तैयार हो गया है. मेड इन इंडिया राफेल फाइटर जेट के लिए सपोर्ट टाइमलाइन साल 2030 से स्‍टार्ट हो सकता है. इस तरह साल 2070 के दशक तक डसॉल्‍ट एविएशन की तरफ से टेक्निकल सपोर्ट दिया जाएगा.

IAF के लिए प्रस्तावित मेड इन इंडिया राफेल प्रोग्राम से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) ने भारत में निर्मित प्रत्येक राफेल लड़ाकू विमान के लिए उसके रोलआउट या डिलीवरी की तारीख से 40 वर्षों तक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) सपोर्ट उपलब्ध कराने का कमिटमेंट जताया है. यदि प्रोडक्‍शन तय समयसीमा के अनुसार होता है तो पहले मेड इन इंडिया राफेल का रोलआउट वर्ष 2030 के आसपास होगा, जबकि अंतिम विमान 2036-37 तक भारतीय वायुसेना को सौंपा जा सकता है. ऐसे में इस बेड़े को 2070 के दशक तक स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और टेक्निकल सपोर्ट का लाभ मिलता रहेगा.

इसके क्‍या फायदे होंगे?

‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस दीर्घकालिक सपोर्ट पैकेज में स्पेयर पार्ट्स की निरंतर उपलब्धता, रखरखाव, तकनीकी सहायता और समय-समय पर आवश्यक अपग्रेड शामिल होंगे. यह व्यवस्था राफेल के मौजूदा F4 मानक के साथ-साथ भविष्य में आने वाले F5 कॉन्फिगरेशन तक के अपग्रेडेशन को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. इससे भारतीय वायुसेना को पूरे सर्विस लाइफ के दौरान विमान की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता स्वदेशीकरण (Indigenisation) पर दिया गया जोर है. योजना के तहत राफेल के स्पेयर पार्ट्स, प्रमुख कंपोनेंट्स और कई महत्वपूर्ण सिस्‍टम्‍स का निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ ही अन्य भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की योजना है. साथ ही देश में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) हब विकसित किए जाएंगे. इंजन से जुड़े कुछ क्षेत्रों में फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रान (Safran) के साथ सहयोग की भी संभावना जताई जा रही है. इससे फ्रांसीसी सप्‍लाई चेन पर निर्भरता कम होगी, रखरखाव लागत में कमी आएगी और भारतीय एयरोस्पेस इंडस्‍ट्री को नई मजबूती मिलेगी.

भारत ने फ्रांस से 3.25 लाख करोड़ रुपये में 114 राफेल फाइटर खरीद को लेकर करार किया है. इसमें ज्‍यादातर विमान भारत में ही बनेंगे. (फाइल फोटो/Reuters)

मिराज-2000 डील से मिला अनुभव आया काम

यह मॉडल भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 बेड़े से मिले अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. मिराज-2000 का उत्पादन बंद होने के बाद उसके स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता लगातार चुनौती बन गई थी. कई बार पुराने विमानों से पुर्जे जुटाने पड़े और अपग्रेड कार्यक्रम भी अपेक्षा से अधिक महंगे साबित हुए. नई राफेल परियोजना में शुरुआत से ही लॉन्‍ग टाइम सपोर्ट और स्थानीय उत्पादन को शामिल कर ऐसी समस्याओं से बचने का प्रयास किया गया है.

इंडियन एयरफोर्स को मिलेगी नई ताकत

क्षमता के लिहाज से राफेल के F4 और भविष्य के F5 संस्करण भारतीय वायुसेना को नई ताकत देंगे. इनमें अत्याधुनिक सेंसर, एडवांस नेटवर्क सेंट्रिक वॉर कैपेबिलिटी, मॉडर्न वेपन्‍स का इंटीग्रेशन एवं भविष्य में Manned-Unmanned Teaming जैसी क्षमताएं शामिल होंगी. इसके अलावा भारतीय मूल के अस्त्र और रुद्रम जैसी मिसाइलों के इंटीग्रेशन की भी योजना है, जिससे स्वदेशी हथियारों का उपयोग बढ़ेगा. साल 2070 तक OEM सपोर्ट की गारंटी भारतीय वायुसेना को ऑपरेशनल लेवल पर अधिक भरोसा और दीर्घकालिक वित्तीय योजना बनाने में सहायता देगी. ऐसे समय में जब वायुसेना स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ाने का प्रयास कर रही है और दूसरी ओर तेजस MK2 तथा एएमसीए जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम अभी विकास के चरण में हैं, राफेल बेड़ा एक महत्वपूर्ण अंतरिम क्षमता प्रदान करेगा.

About the Author

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top