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चेन्नई में थे मजदूर, गांव लौटकर बने इस कारोबार के मालिक, अब...


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कोडरमा के राजकुमार साव कभी चेन्नई में मजदूरी करते थे. गांव लौटकर उन्होंने झाड़ू बनाने का स्टार्टअप शुरू किया. आज वे अपनी फैक्ट्री में हर दिन 300 झाड़ू बनाते हैं. उनका मासिक टर्नओवर 4 से 5 लाख रुपये है. उन्होंने पांच स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है.

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कोडरमा: मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास के दम पर कोई भी व्यक्ति अपनी तकदीर बदल सकता है. इसका जीता जागता उदाहरण कोडरमा जिले के बेकोबार निवासी राजकुमार साव हैं. कभी झारखंड से दूर चेन्नई की एक कंपनी में मजदूर के रूप में काम करने वाले राजकुमार आज अपने जिले में सफल उद्यमी बन चुके हैं. उन्होंने मोरियावां रोड स्थित अपनी झाड़ू निर्माण इकाई स्थापित कर न केवल खुद का व्यवसाय खड़ा किया है. बल्कि पांच लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है.

चेन्नई में 3 वर्षों तक की मजदूर 
राजकुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वे रोजगार की तलाश में चेन्नई गए थे. वहां एक कंपनी में 3 साल तक झाड़ू बनाने का काम करते हुए उन्होंने अलग-अलग डिजाइन, गुणवत्ता और वजन के झाड़ू तैयार करने की तकनीक सीखी. काम का अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने काम छोड़ने का फैसला किया और अपने गांव लौटकर खुद का कारोबार शुरू करने की ठानी. मई 2026 में उन्होंने कोडरमा के मोरियावां रोड में अपनी झाड़ू निर्माण इकाई की शुरुआत की. शुरुआत छोटे स्तर से हुई. लेकिन बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइन के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई. आज उनकी इकाई में ऐसे कई मॉडल और डिजाइन के झाड़ू तैयार किए जा रहे हैं. जो पहले झारखंड में नहीं बनते थे.

कई डिजाइन के झाड़ू हो रहे हैं तैयार
उन्होंने बताया कि एक झाड़ू तैयार करने में लगभग तीन मिनट का समय लगता है. उनकी इकाई में प्रतिदिन करीब 300 झाड़ू तैयार किए जाते हैं. उनकी फैक्ट्री में अलग-अलग ब्रांड नाम, डिजाइन और वजन के झाड़ू तैयार किए जाते हैं. इनमें जेबरा, डबल लॉक, स्टील, 5डी स्टील, 7 स्टार, हीरो, चौड़ा पट्टी नारियल झाड़ू, नारियल झाड़ू, तीन तार झाड़ू और छोटा झाड़ू जैसे कई मॉडल शामिल हैं. इनकी कीमत लगभग 24 रुपये से 57 रुपये तक है. जिससे ग्राहकों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प मिल जाते हैं.

राजकुमार ने बताया की इकाई में तैयार होने वाले झाड़ू स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी भेजे जा रहे हैं. गुणवत्ता और उचित कीमत के कारण व्यापार लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान में उनकी यूनिट से हर महीने करीब 4 से 5 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है. राजकुमार ने केवल अपना भविष्य ही नहीं संवारा, बल्कि पांच स्थानीय लोगों को भी स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरणा मिल रही है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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