Last Updated:
केरल की पाल नगर पालिका में बड़ा खेल देखने को मिला है. सीपीएम समर्थित LDF के अविश्वास प्रस्ताव के पास होने के बाद कांग्रेस नीत UDF की सत्ता खत्म हो गई और देश की सबसे युवा नगर अध्यक्षों में शामिल दिया बीनू पुलिक्ककंदम को पद छोड़ना पड़ा. प्रस्ताव के पक्ष में 17 वोट पड़े, जिसमें कांग्रेस के चार बागी पार्षदों की भूमिका अहम रही.
देश की सबसे युवा नगर पालिका अध्यक्षों में शामिल दिया बीनू पुलिक्ककंदम (बाएं) को कुर्सी से हाथ धोना पड़ा.
अभी मई में ही हुए केरल विधानसभा चुनाव में मिली जीत से गदगद कांग्रेस को बड़ा जोर का झटका लगा है. यहां पाल नगर पालिका में मंगलवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला. सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के समर्थन से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव ने कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सत्ता खत्म कर दी. इसके साथ ही देश की सबसे युवा नगर पालिका अध्यक्षों में शामिल दिया बीनू पुलिक्ककंदम की कुर्सी भी चली गई.
बीनू के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 17 वोट पड़े, जबकि कांग्रेस के चार पार्षदों ने पार्टी व्हिप को नजरअंदाज करते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया. इस बगावत ने UDF की सरकार गिराने में अहम भूमिका निभाई.
कांग्रेस के चार पार्षदों ने बदला खेल
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस के चार पार्षदों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया. इन पार्षदों का कहना है कि उन्हें पार्टी की ओर से कोई व्हिप नहीं मिला था और उन्होंने स्थानीय कांग्रेस कमेटी के फैसले के आधार पर कदम उठाया.
बागी पार्षदों ने दावा किया कि पाल नगर पालिका में कांग्रेस का प्रभाव अभी भी कायम रहेगा और सत्ता में वापसी की संभावना बनी हुई है.
कुर्सी जाने के बाद क्या बोलीं बीनू?
कुर्सी गंवाने के बाद दिया बीनू ने लोकतांत्रिक फैसले को स्वीकार करने की बात कही. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद या किसी अवैध गतिविधि का कोई आरोप साबित नहीं हुआ है. दिया बीनू ने कहा कि बतौर अध्यक्ष उन्होंने हर फैसला कानून, पारदर्शिता और जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लिया.
‘पद अस्थायी, मूल्य हमेशा रहते हैं’
दिया बीनू ने नगर पालिका अधिकारियों, कर्मचारियों, पार्षदों और जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि सार्वजनिक पद सत्ता नहीं बल्कि जनता की ओर से दी गई जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन ईमानदारी और सिद्धांत हमेशा बने रहते हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अब भी निर्वाचित पार्षद के तौर पर जनता की सेवा, पारदर्शिता और कानून के शासन के लिए काम करती रहेंगी.
पाल नगर पालिका का यह घटनाक्रम केरल की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद और LDF की रणनीतिक बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है.
About the Author
<strong>साद बिन उमर</strong> मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
<strong>कहां से …और पढ़ें