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अंचल ऑफिस में 2012-2015 के दौरान तैनात कर्मचारी भी रडार पर झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद रांची के नामकुम अंचल में हुए करोड़ों रुपए के जमीन घोटाले और सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच और तेज कर दी है। अपनी खुफिया जांच (आईआर) में बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक जांच (पीई संख्या 3/2026) दर्ज की है। इसमें नामकुम की तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार समेत अन्य को जांच के दायरे में लिया गया है। एसीबी ने इसके लिए 8 मई को ही सरकार से अनुमति मांगी थी। जांच में सामने आया है कि घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं। इसी वजह से एजेंसी ने वर्ष 2012-13 से 2014-15 के बीच नामकुम अंचल में तैनात रहे कई अधिकारियों और कर्मचारियों को भी रडार पर लिया है। इसी सप्ताह से उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ शुरू की जाएगी। वर्तमान सीओ ने मांगी फाइल, पर नहीं दी गई जांच में यह भी सामने आया कि वर्तमान सीओ कमल किशोर सिंह ने फाइल उपलब्ध कराने के लिए तत्कालीन डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार को कई बार पत्र भेजे, लेकिन उसने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि अंचल के राजस्व कर्मचारी विक्रम महली की वर्ष 2023 में सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो चुकी है। एसीबी के अनुसार दीपक कुमार कथित तौर पर उसी का सहारा लेकर जिम्मेदारी मृत कर्मचारी पर डालने की कोशिश कर रहा है। वह विक्रम महली का मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर खुद को बचाने का प्रयास कर रहा है। एसीबी ने रिपोर्ट में कहा है कि कार्यालय से महत्वपूर्ण फाइल का गायब होना केवल लापरवाही नहीं हो सकती।
तत्कालीन सीओ डॉ. श्वेता वर्मा ने 11 मई 2013 को म्यूटेशन केस संख्या 356 आर 27/2013-14 में प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्रा. लि. के निदेशक चंद्र प्रकाश धेलिया के नाम जमाबंदी मंजूर कर दी। यह म्यूटेशन डीड संख्या 30931/26404 (15 दिसंबर 2010) के आधार पर किया गया था। जब परिवादी ने म्यूटेशन केस की प्रमाणित प्रति मांगी तो अंचल कार्यालय ने दस्तावेज देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका (डब्ल्यूबी (सी) संख्या 109/25) दायर की। हाईकोर्ट के आदेश पर जब रिकॉर्ड की तलाश शुरू हुई तो पता चला कि पूरे म्यूटेशन केस की मूल सरकारी फाइल ही गायब है।
अब आगे क्या… अंचल में तैनात कर्मियों को एसीबी भेजेगा नोटिस
एसीबी वर्ष 2012 से 2015 के बीच नामकुम अंचल में तैनात रहे सभी क्लर्क, अंचल निरीक्षक (सीआई) और राजस्व कर्मचारियों को एक-एक कर नोटिस भेजेगा। हाईकोर्ट के आदेश के तहत अवर निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री ऑफिस), रांची के उन कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने 15 दिसंबर 2010 को डीड संख्या 30931/26404 के सत्यापन में संदिग्ध सहायता की थी। पीई के दौरान गायब दस्तावेजों और कथित अवैध म्यूटेशन से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद एसीबी जल्द ही तत्कालीन सीओ डॉ. श्वेता वर्मा और डीलिंग असिस्टेंट दीपक कुमार के खिलाफ नियमित प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। यह मामला रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के ग्राम डुंडू स्थित खाता संख्या-32 के प्लॉट संख्या 776, 820, 821 और 822 (1.22 एकड़) से जुड़ा है। परिवादी के अनुसार उनकी मां ने तीन पंजीकृत विक्रय विलेखों के जरिए कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसका पंजीकरण संख्या 23आर/1978-79 है। मां की मृत्यु के बाद भाइयों के बीच बंटवारा हुआ। 17 अगस्त 2016 को परिवादी को अंचल कार्यालय से दोहरी जमाबंदी का नोटिस मिला। अंचल कार्यालय पहुंचने पर पता चला कि उसी जमीन पर प्रकाश कमर्शियल प्रा. लि. के नाम से दूसरी जमाबंदी खोल दी गई है।
मृत मां की जमीन पर खोल दी थी दूसरी जमाबंदी
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