हमने पहले ही आपको बता दिया था. कॉकरोच के नाम पर जो ये सब चल रहा है, उसकी स्क्रिप्ट क्या है. जिस तरह से माहौल बनाया जा रहा था, जिस तरह से कॉकरोच के मंच पर इंडी के नेता पहुंच रहे थे. उससे यही लग रहा था कि इनके टारगेट पर नरेंद्र मोदी हैं. आज वही सब दिल्ली में दिखा. जंतर मंतर से लेकर संसद तक इस लेवल का भयंकर बवाल हुआ, इस लेवल का भयंकर हंगामा हुआ, कि संसद के गेट तक बंद करने पड़ गए. संसद के आसपास जहां परिंदा भी पर नहीं मारता, वहां तक लोग पहुंच गए. और ये लोग कर क्या रहे थे. कहीं पत्थर चल रहे थे, कहीं गाड़ियां तोड़ी जा रही थी, कहीं पुलिसवालों के सिर फोड़े जा रहे थे.
एक तरफ वो लोग थे जो पेपरलीक जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रदर्शन करने आए थे, लेकिन इन्हीं के बीच में ऐसे भी लोग थे, जो हिंसा पर उतारू थे. जो पहले ही सोच कर आए थे कि नेपाल बांग्लादेश जैसा बवाल हो जाए, किसी तरह से संसद में घुसकर कांड कर दिया जाए. ऐसी तस्वीरें बन जाए जिससे ये कहा जाए कि नरेंद्र मोदी तो किसी की सुनते नहीं, मोदी तो छात्रों को पिटवाते हैं, मोदी को एंटी यूथ हैं
संसद के पास बढ़ा तनाव, सुरक्षा बलों को संभालना पड़ा मोर्चा
जिन्हें छात्रों को इस्तेमाल करके ऐसा नैरेटिव बनाना था, वो इसमें आज कुछ कुछ कामयाब भी हो गए, क्योंकि शुरू से ये कहा गया कि कॉकरोचों का प्रदर्शन तो शांतिपूर्ण है, उन्हें सिर्फ संसद तक मार्च करना है, लेकिन सड़क पर तो कुछ और ही स्क्रिप्ट दिखी. शाम होते-होते ये बातें कहीं जाने लगी कि छात्रों को पीटा गया, उन पर लाठियां चलाई गईं, नरेंद्र मोदी ने पुलिस से छात्रों को पिटवा दिया.
इसी नैरेटिव को लेकर पूरा इंडी गठबंधन नरेंद्र मोदी पर फायर हो गया. क्या राहुल गांधी हो, क्या अखिलेश यादव, क्या केजरीवाल. सभी लोग माहौल को और भड़काने में जुट गए. लेकिन इधर ये सब हंगामा होता रहा, गजब पॉलिटिक्स होती रही, उधर कॉकरोच वालों की सरकार से क्या डील हो गई. जेपी नड्डा से कॉकरोच वाले मिलकर क्या बोले…
आज आपको ये भी बताएंगे कि मोदी को पीटने से लेकर संसद तोड़ने तक.. कॉकरोच पार्टी के संसद मार्च में क्या क्या गजब हुआ? नेपाल जैसे GEN Z आंदोलन की धमकी कौन देने लगा. उधर छात्रों को भड़कानेवाली पाकिस्तान की कौन सी साजिश पकड़ी गई?
लेकिन पहले यह जान लीजिए कि इस वक्त जिन तस्वीरें की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. वो तस्वीरें है कि किस तरह से कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में पुलिसवाले के सिर फोड़े गए, किस तरह से पथराव किया गया, किस तरह से गाड़ियों को तोड़ा गया. बड़े-बड़े ईंट-पत्थर मारे जा रहे थे. पुलिसवाले जान बचाकर भाग रहे थे. लगातार पथराव हो रहा था. इस तरह से पथराव कर रहे कई लोगों ने अपना फेस भी कवर किया हुआ था. चेहरे को कपड़े से ढका हुआ था जिससे इनकी पहचान ना हो सके. किसी ने रूमाल बांध रखा था. किसी ने गमछा बांध रखा था. और ये सब पुलिस वालों और सुरक्षा बलों पर पत्थर चला रहे थे
इसी से शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट पर सवाल उठ रहे हैं. वीडियो में देखिए कोई पुलिस बैरिकेड के अंदर से पथराव कर रहा है. कोई बैरिकेड के बाहर आकर पत्थर चला रहा है. ये लोग इसलिए भी उछल रहे हैं, क्योंकि कल से ही कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में कुछ लोग मोदी शाह के मरने के नारे लगा रहे थे. ये लोग संसद भवन को उखाड़ने की धमकी दे रहे थे. प्रधानमंत्री को पीटने की बातें कर रहे थे.
कानून व्यवस्था बनाए रखना जरूरी था
इधर तो मोदी को मारने पीटने की बातें हो रही हैं, उधर ये लोग कह रहे हैं कि मोदी ने पुलिस से छात्रों को पिटवा दिया. आप देखिए कि क्या नैरेटिव बनाया गया और इस नैरेटिव में कैसे इंडी वालों ने तुरंत आग लगाकर भड़का दिया. भीड़ जब आगे बढ़ रही थी तो पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की. पर जब हालात बिगड़ते दिखे तो फोर्स इस्तेमाल करना पड़ा. हालात को कंट्रोल में करने के लिए लाठियां चलानी पड़ी. इसी भगदड़ में लोग गिरते-पड़ते वहां से भागते दिखे. कई लोग पुलिस की लाठी से बचने की कोशिश कर रहे थे.
पुलिस लगातार कोशिश कर रही थी कि उग्र भीड़ को पीछे धकेला जाए. इसी में आंसू गैस के गोले भी चलाए गए. क्योंकि कई लोग पुलिस की बैरिकेडिंग और सुरक्षाकर्मियों के घेरे को तोड़ते हुए काफी आगे बढ़ चुके थे. कई लोग तो बदहवासी में इधर उधर भाग रहे थे. इनके चप्पल जूते पीछे छूट गए. आप देखिए कि कई जगहों पर रोड पर डस्टबीन पड़े हुए थे. चप्पल-जूते पड़े थे. कुर्सियां उल्टी गिरी हुई थीं. इसी में कई लोगों को चोटें आईं. किसी का सिर फटा तो किसी को टांगकर ले जाना पड़ा. चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया था. लोग भाग रहे थे. सड़क पर गिर रहे थे. RAF के जवान उन्हें खदेड़ रहे थे.
विपक्ष ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
अब इन्हीं सब तस्वीरों को दिखाकर इंडी वाले अपना नैरेटिव सेट कर रहे हैं और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेर रहे हैं. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं – इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते. 152 पेपर लीक. 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को. और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए – तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत. लीक करने वाले अपराधी आज़ाद – और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं. यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही – उनपर टूट पड़ी है.
प्रदर्शन में लाठीचार्ज की तस्वीरों को लेकर पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. कॉकरोच पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने मोदी-शाह के कहने पर टारगेट किया. अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने 12 साल की बच्ची का सिर फोड़ दिया है. जबकि दिल्ली पुलिस ने अपने इस दावे को फर्जी बताया है.
आप ये भी सोचिए कि अगर पुलिस को इस तरह से मारना पीटना ही होता तो कैसे ये लोग संसद तक पहुंच गए. अगर मारना पीटना ही मकसद होता तो ये लोग संसद तक नहीं पहुंच पाते. क्योंकि संसद मार्च के लिए ना पुलिस से परमीशन ली गई, ना पुलिस की इजाजत दी. और इजाजत इसलिए नहीं थी क्योंकि संसद का सत्र आज से शुरू हुआ और ये बहुत ही सेंसटिव जोन है. यहां पर हजारों लोगों को इकट्ठा होने देना रिस्की है. लेकिन आप देखिए कि धारा 144 यानी बीएनसी 163 लगी थी फिर भी ये लोग संसद तक पहुंच गए. ऐसा कभी नहीं देखा कि संसद के गेट बंद करने पड़े हो. क्योंकि संसद भवन के बेहद करीब प्रदर्शनकारी इकट्ठा होने लगे थे. बार-बार अपील के बावजूद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे तो उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मोर्चा संभाला और एक के बाद एक आंसू गैस के कई गोले दागे गए.
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान हालात ऐसे बन गए कि कई जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प की स्थिति हो गई. जब आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया तो लोग इधर-उधर भागते नजर आए. एकदम से भगदड़ मच गई. आंसू गैस और लाठीचार्ज के बीच भी ये लोग माने नहीं. नारेबाजी करते हुए आगे ही बढ़ते रहे. इसी से संसद की सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया.
प्रदर्शनकारी जब संसद भवन परिसर के बेहद करीब पहुंच गए तो वहां संसद के सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए. आनन-फानन में संसद भवन के मेन गेट को बंद कर दिया गया. भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के लिए मोर्चा संभाल लिया. संसद भवन आंसू गैस और लाठीचार्ज के बीच भी ये लोग माने नहीं. नारेबाजी करते हुए आगे ही बढ़ते रहे. इसी से संसद की सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया.
संसद के अंदर और बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई. CISF की फायर विंग को भी तैनात कर दिया गया था. आग लगने की स्थिति में तुरंत हालात को कंट्रोल करने की पूरी तैयारी थी. फायरमैन ने भी संसद भवन परिसर में अपनी-अपनी पोजिशन ले ली थी. संसद के अंदर आज अगर कुछ हो जाता तो कौन इसकी जिम्मेदारी लेता. इंडी वाले तो अपनी राजनीति चमका रहे हैं, नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए आज भी जंतर मंतर पहुंच गए.
आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता CJP के प्रोटेस्ट में शामिल हुए, जिनके लिए अभिजीत दीपके पहले काम किया करते थे. प्रदर्शन में मनीष सिसोदिया पहुंचे. आतिशी भी वहां पर पहुंच गईं. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह भी वहीं पर दिखे. उधर CJP के प्रोटेस्ट में भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद की पुलिस के साथ बहस हो गई. दिल्ली पुलिस के एक अफसर के साथ चंद्रशेखर की बहस एक गाड़ी खड़ी करने को लेकर हुई, क्योंकि पुलिस सुरक्षा के लिहाज से उस गाड़ी को अंदर नहीं ले जाने दे रही थी, जिसके लिए परमिशन नहीं था.
उधर, समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए. डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने बच्चों को बेरहमी से पीटा. CJP के प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई. शबाना आजमी केरल भवन के पास धरने पर बैठी थीं. उन्हें किसी तरह से उठाकर लोग भीड़ से अलग लेकर गए.
सरकार और प्रदर्शनकारियों में बातचीत का रास्ता खुला
इंडी वाले कह रहे हैं कि पीएम मोदी किसी की सुन नहीं रहे. अगर सुन नहीं रहे तो फिर कैसे आज कॉकरोच पार्टी वालों की जेपी नड्डा से मीटिंग हुई. आज कॉकरोच पार्टी के नेता और मोदी सरकार के बीच बातचीत भी शुरू हो गई. कॉकरोच पार्टी से जुड़ सौरभ दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की कॉकरोच पार्टी की तरफ से मोदी सरकार के सामने तीन मांग रखी गई हैं
- पहली मांग- सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए
- दूसरी मांग – धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, उन्हें या तो कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए या वे खुद इस्तीफा दें. जब तक उनका इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
- तीसरी मांग – NEET की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिनमें से 20 से ज़्यादा छात्रों की मौत हो चुकी है.
कॉकरोच पार्टी ने दावा किया कि जेपी नड्डा ने उन्हें ये भरोसा दिया है कि उनकी मांगों को लेकर सही स्तर पर चर्चा की जाएगी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई भरोसा नहीं दिया गया है.
दूसरी तरफ जेपी नड्डा ने इस मुलाकात के बारे में ये कहा कि आज सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव आया, सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुलाकात हुई. उनके डेलीगेशन के साथ विस्तार से पहले मौखिक चर्चा हुई और उनके द्वारा लगभग 4 बजे मुझे लिखित याचिका दी गई.
यानी सरकार कह रही है कि पहली बार प्रदर्शनकारियों की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव आया और इस प्रस्ताव के बाद उनसे बातचीत हुई है. चाहे किसी भी स्तर पर और चाहे कैसे भी… लेकिन बातचीत का ये रास्ता खुलना एक सकारात्मक पहल है, लेकिन कांग्रेस को इस पर भी दिक्कत है. कांग्रेस के नेता अब ये कह रहे हैं कि जेपी नड्डा बात किस हैसियत से बात कर रहे हैं.
इधर धर्मंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बवाल मचा हुआ है, उधर सरकार के अंदर भी हलचल दिख रही है. धर्मेंद्र प्रधान ने आज संसद भवन में अमित शाह से मुलाकात की. ये मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक चली. इस मुलाकात में NEET के पेपर और उससे जुड़े कुछ और मुद्दों पर बात हुई. ये मुलाकात ऐसे वक्त में हुई जब एक तरफ सरकार और कॉकरोच पार्टी के बीच बात हो रही थी. और दूसरी तरफ संसद के बाहर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बवाल हो रहा था
उपद्रवियों पर पुलिस का एक्शन शुरू
आप ये भी देखिए कि इंडी वाले पुलिस के एक्शन को लेकर तो बवाल कर रहे हैं लेकिन कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में जिन लोगों ने हिंसा फैलाई, उन पर कोई बात नहीं हो रही है.
कॉकरोच पार्टी के प्रदर्शन में जिन जिन लोगों ने हिंसा फैलाई, दिल्ली पुलिस को टारगेट किया अब उनके खिलाफ तगड़े एक्शन की तैयारी शुरू हो गई है. पथराव, हिंसा फैलाने वालों के चेहरे कैमरे में रिकॉर्ड है. अब इस फुटजे के आधार पर प्रदर्शन की हाड़ में हुड़दंग मचाने वालों का हिसाब होगा. हिंसा फैलाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करना शुरू कर दिया है. पुलिस ने अभी तक 70 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. करीब 50 से ज़्यादा पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के जवान घायल हुए है ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है.सरकारी काम में बांधा डालना सरकारी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने के मामले में भी FIR दर्ज होगी.