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Telangana Komaram Bheem Asifabad District History: तेलंगाना का ‘कोमराम भीम आसिफाबाद’ जिला महान गोंड स्वतंत्रता सेनानी कोमराम भीम के नाम पर बसा है, जिन्होंने निज़ाम के कड़े जंगल नियमों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए ‘जल, जंगल, जमीन’ का नारा दिया था. साल 2016 में आदिलाबाद से अलग होकर बने इस जिले में जोड़ेघाट में कोमराम भीम का भव्य मेमोरियल और आदिवासी म्यूजियम स्थित है. महाराष्ट्र सीमा से सटे इस जिले में तेलुगु, मराठी, गोंडी और लम्बाडी संस्कृति का संगम दिखता है. प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध इस जिले में प्रणिता नदी, केरमेरी की पहाड़ियाँ, सप्तकुंडला झरने और बेजूर में दुर्लभ गिद्धों का संरक्षण केंद्र स्थित है. यहाँ स्थित ऐतिहासिक सिरपुर पेपर मिल्स के कारण कागज़नगर बना और श्री कोमराम भीम परियोजना यहाँ की जीवनरेखा है.
Telangana: भारत में जब भी आदिवासी अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और स्वतंत्रता संग्राम की बात होती है, तो ‘जल, जंगल, जमीन’ का अमर नारा सबसे पहले गूँजता है. इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी नारे को देने वाले महान गोंड आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी कोमराम भीम के नाम पर तेलंगाना का एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक जिला बसा हुआ है, जिसे ‘कोमराम भीम आसिफाबाद’ (Komaram Bheem Asifabad) के नाम से जाना जाता है.
साल 2016 में तेलंगाना राज्य में जिलों के पुनर्गठन के दौरान इसे आदिलाबाद जिले से अलग करके एक नए स्वतंत्र जिले के रूप में गठित किया गया था. यह जिला केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र ही नहीं है, बल्कि देश के गौरवशाली आदिवासी इतिहास और संघर्ष का एक जीवंत प्रतीक भी है.
निज़ाम के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन और जोड़ेघाट का अमर बलिदान
इतिहासकार और वरिष्ठ पत्रकार शाहिद उमेर के अनुसार, 1930 के दशक में कोमराम भीम ने हैदराबाद के तत्कालीन निज़ाम शासन के कड़े और शोषक जंगलात नियमों के खिलाफ एक बड़ा सशस्त्र आंदोलन चलाया था. उन्होंने क्षेत्रीय आदिवासियों को उनके प्राकृतिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया.
ऐतिहासिक बलिदान: “अक्टूबर 1940 में निज़ाम की सेना से अदम्य साहस के साथ लड़ते हुए कोमराम भीम जोड़ेघाट के जंगलों में शहीद हो गए थे. आज उसी जोड़ेघाट गाँव में तेलंगाना सरकार ने एक भव्य मेमोरियल और अत्याधुनिक आदिवासी म्यूज़ियम (Museum) बनाया है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनके सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है.”
भाषाओं और संस्कृतियों का अनूठा संगम
महाराष्ट्र की सीमा से सटा होने के कारण यह जिला सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से बेहद समृद्ध और अनूठा है. यहाँ मुख्य रूप से बोली जाने वाली तेलुगु भाषा के साथ-साथ मराठी, गोंडी और लम्बाडी भाषाओं का एक सुंदर और अद्भुत संगम देखने को मिलता है. घने वनों से आच्छादित होने के कारण यह पूरी तरह से एक आदिवासी बहुल और वन-समृद्ध क्षेत्र है.
प्रकृति प्रेमियों के लिए जन्नत और दुर्लभ गिद्धों का आशियाना
प्रकृति प्रेमियों और ईको-टूरिस्ट्स के लिए यह जिला किसी जन्नत से कम नहीं है. यहाँ बहने वाली प्रणिता नदी, हरियाली से ढकी केरमेरी की घुमावदार पहाड़ियाँ और सप्तकुंडला जैसे खूबसूरत झरने इसकी नैसर्गिक सुंदरता में चार चांद लगाते हैं.
वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से भी यह जिला अत्यंत महत्वपूर्ण है: लुप्तप्राय गिद्धों का प्राकृतिक केंद्र: इसके बेजूर इलाके में स्थित ‘पालरपु गुट्टलू’ की ऊँची चट्टानें लुप्तप्राय हो रहे लॉन्ग-बिल्ड (Long-billed) गिद्धों का एक प्रमुख प्राकृतिक निवास और प्रजनन केंद्र हैं.
सिंचाई परियोजना, ऐतिहासिक ‘कागज़नगर’ और राजनीतिक ढांचा
विकास और कृषि के क्षेत्र में श्री कोमराम भीम सिंचाई परियोजना इस जिले की मुख्य जीवनरेखा है, जो हज़ारों एकड़ कृषि योग्य खेतों को सींचने के साथ-साथ कई गाँवों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराती है.
- औद्योगिक पहचान: औद्योगिक दृष्टि से यहाँ स्थित ‘सिरपुर पेपर मिल्स’ (Sirpur Paper Mills) भारत की सबसे पुरानी कागज मिलों में से एक है. निज़ाम के दौर में स्थापित हुई इसी ऐतिहासिक मिल की वजह से इस इलाके का नाम ‘कागज़नगर’ पड़ा, जो आज इस जिले का सबसे बड़ा औद्योगिक और रेलवे हब है.
- राजनीतिक ढांचा: राजनीतिक रूप से इस जिले में आसिफाबाद और सिरपुर नाम की दो प्रमुख विधानसभा सीटें शामिल हैं, जो आदिलाबाद लोकसभा क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें