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Vegetable Farming In Monsoon: मानसून फसलों के लिए अच्छा होता है लेकिन कई बार ज्यादा बारिश सब्जियों की फसल को सड़ा देती है. अगर कुछ छोटी तैयारियां पहले से कर लेंगे तो ज्यादा बारिश होने की स्थिति में भी आपकी फसल बर्बाद नहीं होगी. एक्सपर्ट ने दिए काम के टिप्स.
पलामू. आज के समय में किसान पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तरीके से सब्जी की खेती कर रहे हैं. जहां किसान मानसून के सीजन में भी सब्जी की खेती करते हैं. इन महीनों को सब्जी उत्पादक किसानों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है. भीषण गर्मी के बाद शुरू होने वाला मानसून जहां फसलों के लिए राहत लेकर आता है, वहीं लगातार और अत्यधिक बारिश कई बार सब्जी की पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देती है. खासकर निचले खेतों में पानी भर जाने से पौधों की जड़ें सड़ने लगती हैं, फफूंद का प्रकोप बढ़ जाता है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह दे रहे हैं.
समय पर नर्सरी तैयार करें, बारिश कम होते ही करें रोपाई
कृषि विज्ञान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने बताया कि मानसून के सीजन में सीधे खेत में सब्जियों की बुआई करने के बजाय पॉली ट्यूब या पॉलीबैग में नर्सरी तैयार करना अधिक सुरक्षित रहता है. इससे पौधे बारिश के दौरान सुरक्षित रहते हैं. जैसे ही खेत से पानी निकल जाए, उन्हें ऊंची क्यारियों या टांड़ भूमि में उचित ढाल बनाकर रोपाई कर दें. इस तकनीक से टमाटर, बैंगन, मिर्च जैसी सब्जियां जुलाई के अंत तक बाजार में पहुंच जाती हैं और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. वहीं, रेज एंड फरो तकनीक से भी सब्जी लगा सकते हैं.
जल निकासी और संतुलित पोषण है सबसे जरूरी
उन्होंने आगे बताया कि मानसून में खेत में पानी रुकना सबसे बड़ा खतरा है. इसलिए ऊंची क्यारियां बनाकर खेती करें और खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था रखें. पानी निकलने के बाद प्रति बीघा दो से ढाई किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर का छिड़काव करने से मिट्टी में फफूंद का प्रभाव कम होता है. पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए अन्य संतुलित उर्वरकों का सीमित मात्रा में प्रयोग करें. इसमें जैविक खाद का इस्तेमाल भी किसान कर सकते हैं.
टपक सिंचाई से होगी पानी की बचत
उन्होंने आगे बताया कि लगातार बारिश होने पर अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं होती. बारिश रुकने और मिट्टी सूखने पर ही सिंचाई करें. टपक सिंचाई प्रणाली अपनाने से हर पौधे को प्रतिदिन लगभग 1.5 से 2 लीटर पानी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है. इससे पानी की बचत होती है, जड़ों तक नमी बनी रहती है और उत्पादन बेहतर मिलता है, जिससे किसानों को ज्यादा लाभ मिलता है.
जड़ सड़न और फल खराब होने से बचाने के देसी उपाय
बरसात के मौसम में किसान कई पारंपरिक उपाय भी अपना सकते हैं. नीम की खली या नीम की पत्तियों का चूर्ण पौधों की जड़ों के आसपास डालने से फफूंद का प्रकोप कम होता है. एक लीटर गौमूत्र में 8-10 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करने से कई प्रकार के फफूंद और कीटों का असर घटता है. इसके अलावा लकड़ी की राख को पौधों के चारों ओर हल्की मात्रा में डालने से अतिरिक्त नमी कम होती है और जड़ सड़न की संभावना घटती है.
वहीं, लत्तर वाली सब्जियों के फलों को जमीन पर सीधे न रहने देकर मचान पर चढ़ाने या नीचे सूखी घास बिछाने से फल सड़ने से बचते हैं. खेत की नियमित निगरानी, समय पर रोगग्रस्त पत्तियों को हटाना और साफ-सफाई बनाए रखना भी फसल को सुरक्षित रखने का प्रभावी उपाय है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें