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100 साल पुराना है बोकारो का यह मंदिर, मनोकामना पूरी होने पर...


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Bokaro Famous 100 Year Old Temple: बोकारो के ओरदाना गांव में खुटा बाबा का मंदिर है जो 100 साल से अधिक पुराना बताया जाता है. यहां आदिवासी रीति-रिवाजों से पूजा होती है लेकिन महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं. श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर बलि चढ़ाते हैं.

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बोकारो. बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड के ओरदाना गांव में खुटा बाबा मंदिर एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां आस्था की जड़ें 100 से भी अधिक वर्षों से गहरी मानी जाती हैं. इस मंदिर में न तो मूर्तियां हैं, न आधुनिक सुख-सुविधाएं हैं. फिर भी बोकारो, रामगढ़ और दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु यहां खिंचे चले आते हैं, क्योंकि यहां मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से मनोकामना मांगता है, उसे खुटा बाबा जरूर पूरा करते हैं. यह मंदिर किसी सामान्य धर्मस्थल से बहुत अलग है, क्योंकि यहां पूजा पाहन (आदिवासी पुजारी) द्वारा पूरी तरह आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार जमीन में ही देवता की पूजा की जाती है.

चढ़ती है अलग भेंट
पूजा में खुटा बाबा देवता को अरवा चावल, सिंदूर, नारियल और धूना के साथ देसी दारू भी अर्पित की जाती है. मंदिर में बलि प्रथा भी है और मनोकामना के रूप में काली मुर्गी और लाल मुर्गी अर्पित की जाती है, जबकि मन्नत पूरी होने पर सफेद बकरे और सफेद मुर्गी की बलि देने की परंपरा है. बलि के प्रसाद बनने के बाद उसे इसी परिसर में खाने की परंपरा है, लेकिन इसे बाहर नहीं ले जाया जा सकता.

100 वर्षों से अधिक समय से पुराना मंदिर
मंदिर कमेटी की ओर से बलि प्रथा में मुर्गी के लिए ₹11 और बकरे के लिए ₹21 का शुल्क लिया जाता है. मंदिर में हर दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक पूजा होती है. मंदिर के इतिहास को लेकर पाहन अर्जुन ने बताया कि इस धर्मस्थल पर पांच पीढ़ियों और 100 वर्षों से भी अधिक समय से आदिवासी समाज के पूर्वजों द्वारा पूजा-अर्चना की जा रही है.

शुरुआत में यह आस्था केवल ओरदाना गांव तक सीमित थी, लेकिन जैसे-जैसे लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती गईं, खुटा बाबा की ख्याति रिश्तेदारों और जान-पहचान के लोगों के जरिए दूर-दूर तक फैलती गई. आज झारखंड और बंगाल के दूर-दराज इलाकों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

महिलाओं के प्रवेश पर रोक
वहीं, खुटा बाबा मंदिर में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. इसलिए महिला श्रद्धालु मंदिर के बाहर से ही प्रणाम कर आशीर्वाद लेती हैं. लेकिन कुछ श्रद्धालुओं का मानना है कि अगर कोई महिला मंदिर परिसर में प्रवेश करती है, तो उसके साथ अनहोनी हो सकती है या वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकती है.

वहीं, पूजा करने आए श्रद्धालु नितेश बेदिया ने बताया कि वह 40 किलोमीटर दूर लुदरु बेड़ा से यहां आए हैं. उन्होंने अपने गांव के लोगों से खुटा बाबा की महिमा सुनी थी, जिसके बाद मन में श्रद्धा जागी और वह यहां पहुंचे हैं.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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