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भास्कर न्यूज|गुमला सदर अस्पताल गुमला का इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) वार्ड जिले के अति गंभीर मरीजों के उपचार में एक महत्वपूर्ण और वरदान साबित हो रहा है। अस्पताल में स्थापित 10 बेड के इस आधुनिक आईसीयू में उन मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिन्हें जीवनरक्षक प्रणाली (लाइफ सपोर्ट सिस्टम) और लगातार कड़ी चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की बदौलत यहां कई गंभीर मरीजों को समय पर उच्च कोटि का उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे न केवल मरीजों की जान बचाई जा रही है बल्कि परिजनों को आर्थिक और मानसिक राहत भी मिल रही है।
मरीजों की सुरक्षा और देखभाल को ध्यान में रखते हुए आईसीयू वार्ड में 24 घंटे प्रशिक्षित चिकित्सकों और नर्सों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए यहां हर समय मेडिकल टीम मुस्तैद रहती है। वार्ड में वेंटिलेटर, मल्टीपैरामीटर मॉनिटर और ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम सहित कई अन्य अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से मरीजों के स्वास्थ्य की हर पल निगरानी की जाती है। किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी होने पर तत्काल और प्रभावी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है,
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनुपम किशोर ने बताया कि आईसीयू वार्ड का निर्माण मुख्य रूप से कोरोना महामारी के दौर में किया गया था। उस वक्त संक्रमण बेहद तेजी से फैल रहा था और जिले में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार के लिए एक विशेष और सुरक्षित व्यवस्था की अत्यंत आवश्यकता थी। महामारी का दौर थमने के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने इस वार्ड को बंद करने के बजाय इसे और अधिक उन्नत और सुसज्जित बनाने का निर्णय लिया।
डॉ. अनुपम किशोर ने जानकारी दी कि महामारी के बाद आयुष्मान भारत योजना व अस्पताल प्रबंधन मद से लगभग पांच लाख रुपए की राशि खर्च की गई। इस फंड के जरिए वार्ड में पार्टीशन (विभाजन) का कार्य कराया गया तथा मरीजों की जरूरत के अनुसार सभी आवश्यक आधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए गए। इन सुधारों के बाद से वार्ड की कार्यप्रणाली में और अधिक सुधार आया है। आईसीयू वार्ड में भर्ती लक्ष्मी देवी के पुत्र शिवकुमार पासवान ने बताया कि उनकी मां पिछले 10 दिनों से सदर अस्पताल में भर्ती हैं। 15 जुलाई को उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां लगातार चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यहां सुविधा नहीं होती, रांची ले जाना पड़ता। दूसरा मामला पालकोट थाना क्षेत्र के मलाई गांव की 85 वर्षीय झरियो देवी का है। उन्हें 18 जुलाई को गंभीर स्वास्थ्य समस्या के कारण सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उन्हे आईसीयू में भर्ती किया, परिजनों बोले कि आईसीयू की सुविधा मिलने से बाहर के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ा केस 1 केस 2
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