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Sawan Grahan Effect: इस बार सावन महीने में दो ग्रहण पड़ रहे हैं. ऐसे में भक्तों के मन में सवाल है कि इस दौरान क्या पूजा-पाठ स्थगित रहेगा. इसका जवाब देते हुए देवघर के ज्योतिषाचार्य ने बताया कि, ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा इसलिए किसी प्रकार का सूतक नहीं लगेगा न ही पूजा पर रोक होगी.
देवघर. सावन का महीना शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं. सनातन धर्म में इस पूरे महीने का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि सावन का एक-एक दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित होता है और इस दौरान की गई सच्ची श्रद्धा से पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का कई गुना फल मिलता है. यही वजह है कि सावन आते ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. खासकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में देशभर से लाखों कांवरिये जल चढ़ाने पहुंचते हैं.
लेकिन इस बार सावन को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है. वजह है कि साल 2026 के सावन महीने में दो-दो ग्रहण पड़ रहे हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता है कि क्या ग्रहण के कारण शिव पूजा पर रोक लगेगी, क्या मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और क्या सूतक काल का असर पड़ेगा? इन्हीं तमाम सवालों का जवाब देवघर के ज्योतिषाचार्य ने दिया है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल बताते हैं कि इस वर्ष सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह सावन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी महीने दो ग्रहण पड़ने वाले हैं. पहला 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और दूसरा 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा. दो ग्रहण एक ही सावन में पड़ने की वजह से लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं हैं, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
भारत में नहीं दिखेगा
पंडित नंदकिशोर मुदगल बताते हैं कि इन दोनों ग्रहणों का भारत में दृश्य प्रभाव नहीं रहेगा. यानी भारत में न तो सूर्य ग्रहण दिखाई देगा और न ही चंद्र ग्रहण. यही कारण है कि इन ग्रहणों का सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा. जब सूतक काल ही प्रभावी नहीं होगा तो मंदिरों के कपाट बंद करने, भगवान की पूजा रोकने या जलाभिषेक बंद करने जैसी कोई आवश्यकता नहीं है. श्रद्धालु पहले की तरह पूरे विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा कर सकेंगे.
इस दिन करें मंत्र का जाप
उन्होंने बताया कि सावन के दौरान भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है. अगर ग्रहण के दिन भी श्रद्धालु शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नमः शिवाय का अधिक से अधिक जाप करते हैं तो यह आध्यात्मिक रूप से काफी शुभ माना जाता है. ग्रहण का समय साधना, ध्यान और मंत्र जाप के लिए हमेशा से विशेष माना गया है. इसलिए भक्त इस दिन अपना अधिक समय भगवान शिव के स्मरण में लगाएं.
फिर भी करें परंपराओं का पालन
ज्योतिषाचार्य ने यह भी कहा कि ग्रहण भले ही भारत में दिखाई नहीं देगा, फिर भी गर्भवती महिलाओं को थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, नुकीली वस्तुओं का प्रयोग कम करें और भगवान का स्मरण करते रहें. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं है, लेकिन धार्मिक परंपराओं का पालन श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है.
सावन में ग्रहण के दिन पूजा-पाठ पर कोई रोक नहीं रहेगी
सावन धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है. दो ग्रहण जरूर पड़ रहे हैं, लेकिन भारत में इनके दृश्य न होने के कारण शिव पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंदिरों की नियमित पूजा-पाठ पर किसी तरह की कोई रोक नहीं रहेगी. ऐसे में श्रद्धालु बिना किसी भ्रम के भगवान भोलेनाथ की आराधना करें, अधिक से अधिक मंत्र जाप करें और सावन के पावन महीने का आध्यात्मिक लाभ उठाएं. यही संदेश देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल ने श्रद्धालुओं को दिया है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …
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