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झारखंड में दो जुलाई तक बारिश की संभावना:अब तक राज्य में 25%...




झारखंड के विभिन्न जिलों में बारिश होने का सिलसिला जारी है। हालांकि बुधवार को दोपहर बाद मौसम साफ हो गया। इसकी वजह से लोगों को थोड़ी उमस भरी गर्मी का भी सामना करना पड़ा। वहीं, राज्य में अब तक सामान्य से 25% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। गुरुवार को सामान्यत आसमान में बादल छाए रहेंगे और राज्य के कुछ स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश या मेघ गर्जन होने की संभावना है। वहीं, आकाशीय बिजली गिरने और 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की संभावना है। 2 अगस्त तक रोजाना बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, 2 अगस्त तक मौसम का यही रुख बने रहने का अनुमान है। हालांकि इस दिन देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्‌डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहेबगंज में भारी बारिश होने की संभावना है। इधर, पिछले 24 घंटे में राज्य में लगभग सभी स्थानों पर गर्जन के साथ हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की गई। जबकि एक जगह भारी बारिश भी दर्ज की गई। सर्वाधिक बारिश 72.0 एमएम बंदगांव (पश्चिम सिंहभूम) में दर्ज की गई। वहीं, सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस डाल्टेनगंज में जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस लातेहार में रिकॉर्ड किया गया। अगले चार दिनों में बढ़ेगा का तापमान
मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। इसके बाद अगले चार दिनों में दो-चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। अब भी झारखंड में 25% कम बारिश 1 जून से 29 जुलाई तक बारिश के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 489.2 मिमी की जगह मात्र 362.8 मिमी वर्षा हुई है। यह अब भी औसतन 25% कम है। कई जिलों में स्थिति और भी खराब है, जहां 50% से अधिक तक बारिश की कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक कमी चतरा (-61%), गढ़वा (-62%), पाकुड़ (-58%), देवघर (-56%) और गोड्डा (-48%) में है। बोकारो (-35%), गिरिडीह (-47%), कोडरमा (-50%) और पलामू (-42%) जैसे जिलों में भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। दूसरी ओर कुछ जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है, जहां पश्चिमी सिंहभूम में 19 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि सिमडेगा (-1%) और सरायकेला-खरसावां (-3%) सामान्य के करीब रहे। राजधानी रांची में भी अब तक 15% कम बारिश हुई है। मौसम विभाग का मानना है कि आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से इस कमी की आंशिक भरपाई हो सकती है।



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