Last Updated:
झुमरी तिलैया में जल संकट के बीच क्लोरोफिल स्कूल के निदेशक अजय अग्रवाल ने जल संरक्षण का अनूठा मॉडल बनाया है. मात्र एक लाख की लागत से बने इस ‘लखटकिया’ सिस्टम में तीन-स्तरीय फिल्टर तकनीक का इस्तेमाल होता है. यह हर साल 10 लाख लीटर बारिश और इस्तेमाल किए गए पानी को साफ कर भूजल स्तर को रिचार्ज करता है. इससे गर्मी में भी उनका कुआं पानी से लबालब रहता है.
कोडरमाः लगातार गिरते भूजल स्तर ने झुमरी तिलैया शहर के लिए चिंता बढ़ा दी है. नगर परिषद के सिटी मैनेजर के अनुसार यदि बारिश के पानी का संरक्षण नहीं किया गया और भूजल का अत्यधिक दोहन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले पांच वर्षों में शहर भूजल स्तर के मामले में रेड जोन में पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में लोगों को पेयजल की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है. इसी चुनौती के बीच झुमरी तिलैया के महाराणा प्रताप चौक स्थित क्लोरोफिल स्कूल के निदेशक अजय अग्रवाल ने जल संरक्षण का ऐसा मॉडल विकसित किया है. जो न केवल लाखों लीटर पानी को बर्बाद होने से बचा रहा है. बल्कि भूजल स्तर को भी लगातार रिचार्ज कर रहा है. उनका यह मॉडल अब शहर के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है.
बारिश का पानी ऐसे होता है साफ
अजय अग्रवाल ने बताया कि लगभग 15-16 वर्ष पहले रोटरी क्लब के एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी जो अब सेवानिवृत हो चुके हैं एवं जल संरक्षण विशेषज्ञ महेंद्र मोदी ने लोगों को वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक किया था. उस समय लोगों ने इस दिशा में गंभीर पहल नहीं की. लेकिन उनकी बातें अजय अग्रवाल के मन में हमेशा बनी रहीं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान भीषण गर्मी में उनके परिसर स्थित कुएं का जलस्तर घटकर मात्र 6 से 7 इंच रह गया था.
यही वह समय था जब उन्होंने वर्षा जल संचयन की दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया. उन्होंने स्कूल की छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप के माध्यम से एक विशेष तीन स्तरीय फिल्टर सिस्टम से जोड़ दिया. सबसे पहले पानी गिट्टी, ईंट के टुकड़े और बालू से भरे चबूतरे से होकर गुजरता है, जहां पहली बार फिल्टर होता है. इसके बाद दूसरा फिल्टर गिट्टी से भरे दूसरे चैंबर में होता है और अंत में कुएं के बाहर लगे जाल से तीसरी बार फिल्टर होकर पानी सीधे कुएं में पहुंचता है.
गर्मियों में लबालब रहता है कुआं में पानी
अजय अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा. पहले जहां गर्मियों में कुआं लगभग सूख जाता था. वहीं अब भीषण गर्मी के दिनों में भी उनके कुएं में 12 से 15 फीट तक पानी उपलब्ध रहता है. इसी पानी से पूरे स्कूल परिसर के बगीचे की सिंचाई की जाती है. जिससे सालभर हरियाली बनी रहती है. गर्मी के मौसम में भी हरे भरे गार्डन को देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि कुएं में चार मांगुर मछलियां छोड़ी गई हैं. जो पानी को प्राकृतिक रूप से साफ रखने में मदद करती हैं.
बाथरूम के पानी भी होता है फिल्टर
इसके अलावा स्कूल के हैंड बेसिन और बाथरूम से निकलने वाले पानी को अलग-अलग फिल्टर यूनिट के माध्यम से साफ कर जमीन के भीतर रिचार्ज किया जाता है. इससे एक बूंद पानी भी नाली में नहीं बहता और भूजल स्तर लगातार मजबूत होता है. अजय अग्रवाल के अनुसार इस संपूर्ण जल संचयन प्रणाली को तैयार करने में लगभग एक लाख रुपये की लागत आई, इसलिए वह इसे लखटकिया प्रोजेक्ट मॉडल कहते हैं. उनका दावा है कि इस मॉडल के माध्यम से वे हर वर्ष करीब 10 लाख लीटर बारिश और उपयोग किए गए पानी को दोबारा संरक्षित कर भूजल रिचार्ज में इस्तेमाल करते हैं.
About the Author
प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
और पढ़ें