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मप्र के छतरपुर जिले के 81 वर्षीय डॉ. राजेश अग्रवाल जो अब तक 3.5 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं और हर साल हजारों पौधे गरीबों को खुद के खर्च पर वितरित करते हैं. पेशे से डॉक्टर रहे डॉ. अग्रवाल ने 2014 में रिटायरमेंट के बाद अपना पूरा जीवन पर्यावरण सेवा को समर्पित कर दिया है.
छतरपुर के डॉ राजेश अग्रवाल जिन्हें लोग ट्री मैन के नाम से पहचानते हैं. दरअसल, डॉ अग्रवाल ने 2014 में रिटायरमेंट के बाद अपना पूरा जीवन पर्यावरण सेवा को समर्पित कर दिया है. वह साल 2014 से पूरे छतरपुर जिले को हरा-भरा बनाने में लगे हुए हैं. सालों से वो इसी सपने को साकार करने में जुटे हुए हैं. अपनी जेब से पैसा खर्च कर रहे है. हर तरफ पेड़ लगा रहे हैं. ज़मीन चाहे सरकारी हो या गैर-सरकारी वो हर जगह पेड़ लगाते हैं. डॉक्टर साहब पेड़ बांटते भी हैं. जो भी उनसे पौधे मांगता है, वो उसे मुफ़्त में बांट देते हैं.
साढ़े तीन लाख से ज्यादा लगाए पौधे लगाए
डॉ राजेश अग्रवाल बताते हैं कि अब तक 3.5 लाख से अधिक पौधों का रोपण और वितरण कर चुके हैं. उनकी यह मुहिम सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि हर पौधा उनकी आत्मा से जुड़ा है.
अपने खर्च पर गांव-गांव तक पौधे पहुंचाते
डॉ अग्रवाल बताते हैं कि उनके पास पैसों की कमी नहीं हैं. वह खुद डॉक्टर रहे हैं. उनके बेटे और बेटी विथेशों में रहते हैं. इसलिए वह पेड़ लगाने का काम एनजीओ या सरकारी सहायता से नहीं, खुद के पैसों से ट्रैक्टर और पिकअप में डीज़ल भरवाकर गांव-गांव जाकर गरीब किसानों और ज़रूरतमंदों को पौधे वितरित करते हैं. उनका एक ही नियम है – “पौधे सिर्फ उन्हें जो सच में उनकी देखभाल करेंगे.
संतान की परवरिश जैसा करते
डॉ. अग्रवाल सुबह 4 बजे उठ जाते हैं और देर रात तक पौधों की देखभाल में जुटे रहते हैं. “पैसा तो बहुतों के पास है, लेकिन जज़्बा नहीं. मैं पौधों को बच्चों की तरह पालता हूं,” वे भावुक होकर कहते हैं.
छायादार और फलदार पौधों को देते हैं प्राथमिकता
उनकी खुद की नर्सरी में इस समय 53,000 से अधिक पौधे तैयार हैं. इनमें नीम, पीपल, बरगद जैसे छायादार पेड़ हैं, तो वहीं आम, अमरूद, कटहल, नींबू और अनार जैसे फलदार पौधे भी लोगों को वितरित किए जाते हैं.