रांची: झारखंड की राजधानी रांची से 10 किमी की दूरी पर एक नगरी गांव है, जिसे इंडस्ट्रियल हब भी कहा जाता है. क्योंकि, इस गांव में कम से कम 6 बड़े इंडस्ट्री के कारखाने महज 50 मीटर के अंदर देखने को मिलेंगे. मदर डेयरी, स्वीटकॉन कंपनी, शुगर कंपनी, फूड प्रोसेसिंग कंपनी. यह सारी यहां पर खेत के बीचों बीच हैं. इस गांव को समृद्ध इसलिए कहा जाता है. क्योंकि यहां पर 1 इंच भी जमीन आपको खाली नहीं नजर आएगी.
इस गांव के निवासी मनीष महतो बताते हैं कि यहां उनकी खुद 2 एकड़ जमीन है. यहां पर जितने भी लोग हैं, कम से कम 2 डिसमिल जमीन तो यहां पर हर व्यक्ति के पास है. वह 2 डिसमिल में ही 3 तरह की सब्जी उगाते हैं. यहां पर हर घर में लोग खुद सब्जी उगा कर खाते हैं. खासतौर पर गन्ने और स्वीट कॉर्न की खेती व्यापक रूप में देखी जाती है.
यहां एक इंच जमीन भी नहीं है खाली
मनीष बताते हैं कि यहां पर 1 इंच जमीन भी आपको खाली नहीं नजर आएगी. कुछ ना कुछ उसमें उगा ही मिलेगा. अगर मान लीजिए जमीन बहुत थोड़ी है तो उसमें परवल जैसी सब्जी या भिंडी या रोजमर्रा खाने के लिए प्याज, लहसुन, मिर्ची यह उगा रहेगा, लेकिन खाली नहीं रहेगा. इसीलिए यहां पर आप देखेंगे चारों ओर आपको सिर्फ और सिर्फ हरियाली मिलेगी.
यहां मिट्टी की उर्वरक शक्ति और पीएच लेवल बहुत ही बैलेंस है. इसीलिए यहां पर कोई भी फसल काफी बढ़िया से हो जाती है. यहां गन्ना 60 से 70 टन एक-एक किसान उगाते हैं और स्वीट कॉर्न पूछिए मत. यहां पर लगभग 100 एकड़ में इसकी खेती हो रही है. यही कारण है कि स्वीटकॉर्न प्रोसेसिंग कंपनी यहां पर खेत के बीच लगाई गई है. इसी कंपनी में जाते हैं और इसके बदले किसानों को अच्छा खासा रकम दिया जाता है.
यहां बड़ी संख्या में हैं फूड प्रोसेसिंग कंपनी
यहां पर आपको खेत के बीचो-बीच मदर डेयरी कंपनी देखने को मिलेगी. जहां पर किसान गाय का दूध जाकर दे देते हैं. उन्हें मार्केट की जरूरत नहीं पड़ती. निश्चित पैसा महीने के अंतिम में उनको मिल जाता है. ऐसे में यहां के किसानों को ऐसा लगता है कि जैसे वह कोई नौकरी कर रहे हैं और समय से सैलरी उनको मिल जाती है. उनको अपने प्रोडक्ट बेचने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. यहां सारी चीज कंपनी ले लेती है.
स्वीट कॉर्न से लेकर शुगर, यहां कई तरह का प्रोडक्ट है. चीनी गुड़ यह सारी चीज बनती है. यही कारण है कि यहां महिलाओं को भी रोजगार मिलता है. यहां पर हर जगह स्वीट कॉर्न यूनिट है. जहां पर एक साथ 200 महिलाएं बैठकर मकई के दाने निकालने का काम करती हैं. जिसके लिए उन्हें महीने के 12000- 15,000 मिलते हैं और हर दिन मात्र चार घंटा काम करना पड़ता है. ऐसे में समझ सकते हैं कि इस गांव में एक भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है. इसलिए इसे समृद्धि गांव कहा जाता है.
सिर्फ रोजगार से ही समृद्धि नहीं पर्यावरण भी
मनीष बताते हैं कि यहां सिर्फ रोजगार हीं नहीं, बल्कि यहां आसपास आपको चारों ओर गजब की हरियाली और खूबसूरती देखने को मिलेगी. चारों ओर पहाड़, हर तरफ हरियाली, हर तरफ फसल हर तरफ खेती यह सारी चीजें देखना भी काफी अच्छी लगता है. इसलिए खासतौर पर यहां पर लोग लॉन्ग ड्राइव के लिए आते हैं और यूं ही समय बिताने के लिए भी आते हैं.