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6 साल बाद नई दिल्ली आ रहे शी जिनपिंग, तो क्या SCO...


नई दिल्ली: 12 से 13 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है. इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई नेता आएंगे. आने वाले गद्दावर नेताओं में पुतिन से लेकर शी जिनपिंग का भी नाम है. करीब छह साल बाद अगर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सचमुच नई दिल्ली आते हैं तो यह सिर्फ एक राजनयिक दौरा नहीं होगा, बल्कि भारत-चीन रिश्तों के लिए बड़ा संकेत माना जाएगा. साल 2019 के महाबलीपुरम शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के संबंध गलवान संघर्ष और एलएसी पर लंबे सैन्य गतिरोध के कारण सबसे मुश्किल दौर में पहुंच गए थे. ऐसे में अब अगर सितंबर में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए शी जिनपिंग भारत आते हैं तो पूरी दुनिया की नजर इस मुलाकात पर होगी. इसी के साथ एक और सवाल भी तेजी से उठने लगा है. अगर भारत चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी करता है तो क्या 2027 में पाकिस्तान में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जाएंगे? फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब नहीं है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो चुकी है. आने वाले महीनों में भारत की विदेश नीति के कई संकेत इसी घटनाक्रम से निकल सकते हैं. हालांकि पाकिस्तान की ओर से साफ संकेत मिले हैं कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करेगा.

भारत और चीन के रिश्ते केवल दो देशों तक सीमित नहीं हैं. इनका असर पूरे एशिया और वैश्विक राजनीति पर पड़ता है. यही वजह है कि शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को सामान्य कार्यक्रम नहीं माना जा रहा. न्यूज18 को मिली जानकारी के मुताबिक सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति भारत आ सकते हैं. हालांकि अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. दूसरी तरफ पाकिस्तान पहले ही संकेत दे चुका है कि 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया जाएगा. ऐसे में सवाल सिर्फ निमंत्रण का नहीं है, बल्कि यह है कि क्या भारत उस निमंत्रण को स्वीकार करेगा. यह फैसला उस समय की सुरक्षा, कूटनीतिक माहौल और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी निर्भर करेगा.

पाकिस्तान का बयान.

पाकिस्तान ने SCO निमंत्रण पर क्या कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि क्या मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात का अनुरोध किया था और क्या 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा. इसपर उन्होंने कहा, ‘मुझे मनीला में एआरएफ (ARF) बैठक के इतर भारत की ओर से किसी बैठक के अनुरोध की जानकारी नहीं है इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता. जहां तक एससीओ शिखर सम्मेलन का सवाल है, हां, शंघाई सहयोग संगठन के सभी सदस्य देशों को राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष स्तर पर आमंत्रित किया जाएगा, यदि वे उस स्तर पर भाग लेना चाहें. इसलिए हां, निमंत्रण भेजे जाएंगे. मेजबान देश होने के नाते पाकिस्तान का यह दायित्व है कि वह सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करे.’

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा क्यों है खास?

  • अगर यह दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार होता है तो अक्टूबर 2019 के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी. महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ था. लेकिन उसके कुछ ही महीनों बाद 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को गहरे संकट में डाल दिया. इसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकातें ब्रिक्स, जी-20 और एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों तक सीमित रहीं. ऐसे में नई दिल्ली में संभावित मुलाकात को रिश्तों में नई शुरुआत की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले साल 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में शामिल होने गए थे. यह लगभग सात सालों बाद उनकी पहली चीन यात्रा थी. इससे पहले वह 2018 में वुहान और 2019 में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन गए थे. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में भी प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई थी. यह बैठक एलएसी पर सैन्य गतिरोध कम करने को लेकर बनी सहमति के तुरंत बाद हुई थी. इसके बाद तियानजिन में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी.
  • भारत और चीन के बीच संबंधों में अभी भी कई जटिल मुद्दे मौजूद हैं. सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. हालांकि दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखी है. यही वजह है कि यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो व्यापार, निवेश, सीमा प्रबंधन और बहुपक्षीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला भी साबित हो सकता है.

क्या पाकिस्तान जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने भी बड़ा संकेत दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है, ‘SCO की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत मेजबान देश के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करना उसका दायित्व है. इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष शामिल होंगे.’ यानी भारत को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा. हालांकि निमंत्रण भेजना और उसमें शामिल होना दो अलग-अलग बातें हैं. भारत की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

SCO में क्या है भारत की रणनीतिक अहमियत?

शंघाई सहयोग संगठन आज दुनिया के सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक है. इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस जैसे दस सदस्य देश शामिल हैं. सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी इस संगठन के प्रमुख उद्देश्य हैं. भारत के लिए यह मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां चीन, रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ एक साथ बातचीत का अवसर मिलता है. पाकिस्तान में सम्मेलन होने के बावजूद भारत के लिए इसकी रणनीतिक उपयोगिता बनी रहेगी.

अंतिम फैसला हालात तय करेंगे

फिलहाल दो बड़े घटनाक्रम चर्चा में हैं. पहला सितंबर में शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा और दूसरा, 2027 में पाकिस्तान में होने वाला SCO शिखर सम्मेलन. दोनों मामलों में अभी अंतिम निर्णय बाकी है. लेकिन इतना साफ है कि अगले कुछ महीनों में भारत की विदेश नीति की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं. यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो यह रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा. वहीं पाकिस्तान में एससीओ सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी का फैसला उस समय के राजनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक हालात को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा.

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को ऐतिहासिक क्यों माना जा रहा है?

यदि यह यात्रा होती है तो अक्टूबर 2019 के बाद शी जिनपिंग पहली बार भारत आएंगे. यह गलवान संघर्ष और एलएसी पर तनाव के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी. इसलिए इसे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है.

क्या पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को SCO सम्मेलन का निमंत्रण दे दिया है?

अभी औपचारिक निमंत्रण जारी नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया जाएगा. भारत भी संगठन का सदस्य है, इसलिए उसे भी निमंत्रण मिलेगा. हालांकि भारत उसमें शामिल होगा या नहीं, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.

भारत के लिए SCO इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

SCO भारत को चीन, रूस, मध्य एशिया और अन्य सदस्य देशों के साथ सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत का बड़ा मंच देता है. यह संगठन भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं का अहम हिस्सा बन चुका है. इसलिए भारत इसकी बैठकों को गंभीरता से देखता है, चाहे मेजबान कोई भी सदस्य देश क्यों न हो.

6 साल बाद नई दिल्ली आ रहे शी जिनपिंग, तो क्या SCO समिट में पाकिस्तान जाएंगे पीएम मोदी?

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा, ब्रिक्स सम्मेलन, गलवान के बाद भारत-चीन रिश्ते और 2027 पाकिस्तान में होने वाले SCO समिट को लेकर पीएम मोदी की संभावित यात्रा पर जानिए पूरी रिपोर्ट.



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