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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को कथित तौर पर पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ, जिसमें 2 प्रदर्शनकारी घायल हुए. RAF के पेलेट गन के इस्तेमाल को यशोवर्धन आजाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इस याचिका मुख्य न्यायाधीश की सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की.
यशोवर्धन आजाद कौन है?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन (Pellet Gun) के इस्तेमाल हुआ. इसमें दो प्रदर्शनकारी घायल हुए. अब पेलेट गन के इस्तेमाल का सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. यशोवर्धन आजाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में लेकर पहुंचे हैं. उनके साथ दो अन्य लोग भी है, जो पेलेट गन से घायल हुए हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों को चुनौती देकर बदला नहीं जाता, तब तक इनके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी क्लियर किया कि यदि किसी विशेष घटना में पेलेट गन के दुरुपयोग के आरोप हैं, तो उनकी न्यायिक जांच की जा सकती है. इस बीच लोग यशोवर्धन आजाद के बारे में जानना चाहते हैं. कौन है ये? क्या है मामला? आइए जानते हैं.
कौन हैं योशवर्धन आजाद?
यशोवर्धन आजाद देश के सीनियर पुलिस और इंटेलीजेंस अधिकारियों में गिने जाते हैं. वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी रहे हैं और लंबे समय तक अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्रीय खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और आखिर में स्पेशल डायरेक्टर के पद तक पहुंचे. रिटायरमेंट के बाद भी यशोवर्धन आजाद पब्लिक पॉलिसी, नागरिक अधिकारों और पुलिस सुधार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. वे कानून के शासन, मानवाधिकारों और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था के पक्षधर माने जाते हैं. इसी कारण उन्होंने पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
मामला क्या है?
यशोवर्धन आजाद और कथित तौर पर पेलेट गन से घायल दो प्रोटेस्टर्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में मांग की गई है कि नागरिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पूरी तरह या आंशिक रूप से धातु (मेटैलिक) पेलेट वाले प्रोजेक्टाइल हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन हथियारों को भले ही कम घातक (Less Lethal) बताया जाता हो, लेकिन नजदीक से चलाए जाने पर ये आंख, सिर और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर या स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं. उन्होंने प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि 19 वर्षीय एक युवक की आंख में गंभीर चोट आई, जो इस हथियार की खतरनाक क्षमता को दर्शाती है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल पेलेट गन पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर्याप्त नहीं है. बेंच की जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहते हैं कि पेलेट गन का उपयोग पूरी तरह खत्म हो, तो उन्हें उन कानूनी प्रावधानों को ही चुनौती देनी होगी जो असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को इनके इस्तेमाल की अनुमति देते हैं.
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रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी का…
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