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पवित्र श्रावण मास के दूसरे दिन शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में लाखों कांवरिये जलार्पण के लिए पहुंचे। उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल लेकर श्रद्धालु लगभग 105 से 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर देवाधिदेव महादेव की नगरी देवघर पहुंचे। पूरे कांवरिया पथ पर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। झारखंड-बिहार सीमा पर स्थित दुम्मा बॉर्डर से लेकर खिजुरिया तक कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगातार आगे बढ़ती रहीं। कांवरियों की टोलियां नाचते, गाते और भजन-कीर्तन करते हुए बाबा बैद्यनाथ मंदिर की ओर बढ़ रही थीं। सावन के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर देखा गया। पटना और छपरा से पहुंचे कई कांवरियों ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से श्रावण मास में बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने देवघर आते रहे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने इस बार भी तीन दिनों की कठिन पैदल यात्रा पूरी कर बाबा धाम पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त किया है। उनका अनुभव था कि बाबा धाम पहुंचते ही एक अलग तरह की आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव होता है। कांवरियों ने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान शारीरिक थकान अवश्य होती है, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति देती है। उनका विश्वास है कि बाबा स्वयं अपने भक्तों को बुलाते हैं और उनकी यात्रा को सफल बनाते हैं। यही कारण है कि लंबी दूरी तय करने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट महसूस नहीं होता। श्रावण मास के दूसरे दिन बाबा नगरी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं।
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