भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

Kesariya Kalakand: कोडरमा का GI टैग वाला केसरिया कलाकंद बनाएं घर पर,...


Last Updated:

Kesariya Kalakand Recipe: कोडरमा के केसरिया कलाकंद को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता और बढ़ गई है. इसी क्रम में स्वीट संगम के राजू मोदी ने घर पर ही केसरिया कलाकंद बनाने की आसान विधि साझा की. जानते हैं यह खास मिठाई कैसे तैयार होती है.

ख़बरें फटाफट

कोडरमा. झारखंड की पहचान बन चुके कोडरमा के प्रसिद्ध कलाकंद को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. यह झारखंड का खाद्य उत्पाद श्रेणी में जीआई टैग पाने वाला एकमात्र उत्पाद है. जीआई टैग मिलने के बाद न केवल इसकी मांग में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से लोग इस पारंपरिक मिठाई के बारे में जानने और इसे चखने के लिए उत्सुक हैं. वहीं, जिन लोगों तक यह मिठाई अभी नहीं पहुंच पा रही है, वे इसे घर पर बनाने की विधि भी जानना चाहते हैं. इसी को लेकर झुमरी तिलैया शहर की प्रसिद्ध मिठाई की दुकान स्वीट संगम के संचालक राजू मोदी ने विशेष बातचीत में जीआई टैग वाले केसरिया कलाकंद को बनाने की पूरी प्रक्रिया साझा की.

ऐसे तैयार कर सकते हैं केसरिया कलाकंद
विशेष बातचीत में राजू मोदी ने बताया कि स्वादिष्ट और असली कलाकंद बनाने के लिए भैंस का दूध सबसे अच्छा माना जाता है. क्योंकि इसमें गाढ़ापन अधिक होता है और मिठाई का दानेदार स्वाद बेहतर बनता है. उन्होंने बताया कि सबसे पहले भैंस के दूध को बड़ी कड़ाही में धीमी आंच पर लगातार पकाया जाता है. इस दौरान दूध को लगातार चलाना बेहद जरूरी होता है, ताकि वह नीचे से जले नहीं.

ऐसे आता है केसरिया रंग
इस समय केसर भी डाला जाता है, ताकि दूध का रंग केसरिया हो जाए. काफी देर तक पकाने के बाद दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होकर दानेदार रूप लेने लगता है. यही कलाकंद की सबसे जरूरी प्रक्रिया होती है. जब मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब उसमें स्वादानुसार हल्की मात्रा में चीनी मिलाई जाती है. उन्होंने बताया कि असली कलाकंद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दूध के अलावा किसी दूसरी सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जाता. केवल दूध और थोड़ी-सी चीनी से ही इसका मूल स्वाद तैयार होता है.

कलाकंद तैयार होने में लगता है इतना समय
उन्होंने बताया कि इसके बाद तैयार मिश्रण को एक ट्रे में समान रूप से फैला दिया जाता है. अगर केसरिया कलाकंद तैयार करना हो, तो उसके ऊपर केसर छिड़की जाती है, जिससे इसका रंग और सुगंध दोनों आकर्षक हो जाते हैं. मिठाई को और अधिक स्वादिष्ट साथ ही आकर्षक बनाने के लिए ऊपर से बादाम, काजू, पिस्ता जैसे ड्राई फ्रूट्स की गार्निशिंग की जाती है. उन्होंने बताया कि कलाकंद को तैयार होने में सामान्यतः 50 से 55 मिनट का समय लगता है. हालांकि, दूध की मात्रा और आंच के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है.

कोडरमा का जलवायु और पानी निभाता है महत्वपूर्ण भूमिका
उन्होंने कहा कि कोडरमा के कलाकंद की खासियत केवल इसकी पारंपरिक विधि ही नहीं, बल्कि यहां का पानी और स्थानीय जलवायु भी है, जो इसके स्वाद को अलग पहचान देती है. यही कारण है कि झुमरी तिलैया का कलाकंद देश के दूसरे स्थानों पर बनने वाले कलाकंद से अलग स्वाद और बनावट लिए होता है. जीआई टैग मिलने के बाद कोडरमा के कलाकंद की ब्रांड वैल्यू में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इससे स्थानीय मिठाई कारोबारियों को नया बाजार मिला है और पारंपरिक मिठाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

और पढ़ें



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top