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अपर बाजार में नगर निगम की प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर व्यापारियों और निगम के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। 70-80 वर्षों से कारोबार कर रहे दुकानदारों को तीन दिन के भीतर प्रतिष्ठान खाली करने के नोटिस के बाद झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स खुलकर विरोध में उतर आया है। सोमवार को चैंबर के प्रतिनिधिमंडल ने नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार से मिलकर नोटिस निरस्त करने और पुनर्वास के बाद ही कार्रवाई करने की मांग की। चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों को खाली कराने का फैसला हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा असर डालेगा। चैंबर महासचिव रोहित अग्रवाल ने कहा कि अपर बाजार राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी हितधारकों से संवाद जरूरी है। व्यापारियों की 5 प्रमुख मांगें अपर बाजार आर्थिक धड़कन है
अपर बाजार के प्रतिष्ठानों से राज्यभर में सामान की सप्लाई होती है। यहीं से करोड़ों रुपए का राजस्व सरकार को प्राप्त होता है। इसका हिस्सा छोटे और बड़े व्यापारी हैं। अपर बाजार के बाजारटांड़ में निगम ने 65 साल पहले 4.39 एकड़ में 608 लोगों को अस्थायी दुकानें बनाने के लिए जमीन दी थी। निगम किराया भी वसूल रहा है। अब इस जमीन पर मल्टी स्टोरी कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स बनाने की योजना है।
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