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एक ओर जहां राज्य सरकार पौधरोपण अभियान पर जिले में करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं पौधों के संरक्षण सही से नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते है। वहीं अब भी प्रखंड क्षेत्रों में अवैध रूप से वनों की कटाई का काम जारी है। यही कारण है कि धीरे धीरे हरियाली कम होती जा रही है। हालांकि विभाग गत वर्षों की अपेक्षा 5 प्रतिशत ग्रीनरी बढ़ने का दावा करती है। अभी कुछ माह पहले तक जंगलों में आग लगने के कारण भारी संख्या में हरियाली पर आंच आई थी। इधर प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर विभाग लोहरदगा डिवीजन क्षेत्र में पांच लाख से पौधे लगाने का लक्ष्य रखता है। जो विभिन्न कार्यक्रमों व अभियान के तहत लगाए भी जाते हैं। परंतु लगाए जाने वाले पौधों का संरक्षण या फिर घेराबंदी या बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण गाय बकरी सहित अन्य जानवरों का चारा बन जाती है। गत वर्ष जिले में लक्ष्य के विपरीत लगभग लगभग 4:30 लाख पौधे लगाए गए थे। जिसमें से अधिकांश पौधे संरक्षण नहीं होने के कारण या तो मर गए या फिर जानवरों का चारा बन गए। इस वर्ष भी लगभग अब तक लगभग डेढ़ लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। जिसमें से महत्वपूर्ण जगहों पर तो लगाए जाने वाले पौधों की घेराबंदी बांस से की जाती है। परंतु विभिन्न कार्यक्रमों के तहत अलग-अलग क्षेत्र में लगाए जाने वाले पौधे की कार्यक्रम के बाद सुध लेने वाला कोई नहीं होता। जिलेभर में विभिन्न जगहों पर चल रहे पथ निर्माण कार्य और एनएच के किनारे भी पौधे लगाए जाने थे परंतु खुले में पौधे लगाए जाने के कारण संरक्षित नहीं होने के कारण अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं। नतीजा जंगल क्षेत्र बढ़ने की जगह यहां के जंगल सपाट मैदान में परिवर्तित होते जा रहे हैं। प्रखंड के जंगली इलाकों में लकड़ी काटने वाले लोगों का एक बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा है। लोहरदगा के पेशरार प्रखंड के ऊपर तुरियाडीह, चपाल, केकरांग, जवाखाड़ आदि क्षेत्र में जंगल अंदर से खोखले होते जा रहे हैं। जंगल माफिया थोड़े से पैसों के लिए हरे-हरे पेड़ों की बलि दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण को लालच देकर वन माफिया अपना काम निकालते हैं। हालत ऐसी है कि जंगल बाहर से तो हरे-भरे नजर आते हैं, लेकिन जंगल में थोड़ा अंदर जाते ही, हर तरफ कटे हुए पेड़ नजर आते हैं, मौजूदा हालात ऐसी है कि जंगल वन माफियाओं के आसान निशाने पर हैं। इस क्रम में पौधों का संरक्षण आवश्यक है। जिले के कुल क्षेत्रफल का लगभग 32-35 प्रतिशत वन क्षेत्र है। लोहरदगा जिले में कुल 44.36 वर्ग किलोमीटर में वनाच्छादित क्षेत्र है। ऐसे में पौधों का समय समय पर अभियान चलाकर रोपन और संरक्षण जरूरी है।
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