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बारिश में मच्छर के काटने से डॉग्स को होती है हार्टवर्म बीमारी,...


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Dog Heartworm Disease Prevention: बरसात में डॉग्स में हार्टवर्म डिजीज का खतरा बढ़ता है. यह बीमारी दिल-फेफड़ों को प्रभावित करती है और मच्छरों से होती है. समय पर इलाज न मिलने पर डॉग की मौत भी हो सकती है. बचाव के लिए नियमित जांच और दवा जरूरी है.

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बोकारो. बरसात के मौसम में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है. ऐसे में इंसानों के साथ-साथ पालतू डॉग्स भी मच्छरों से प्रभावित होते हैं. खासकर संक्रमित मच्छरों के काटने से डॉग्स में हार्टवर्म डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यह बीमारी कुत्तों के दिल और फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और समय पर इलाज न मिलने पर कई मामलों में उनकी मृत्यु भी हो सकती है.

ऐसे करता है कुत्ते के शरीर में प्रवेश
बोकारो के पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, हार्टवर्म एक गंभीर बीमारी है, जो डायरोफिलेरिया इमिटिस नामक परजीवी के कारण होती है. यह बीमारी संक्रमित मच्छर के काटने से कुत्ते के शरीर में प्रवेश करती है. इसके बाद यह धीरे-धीरे विकसित होकर दिल और फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं तक पहुंच जाती है. शरीर में प्रवेश करने के बाद यह परजीवी लगभग 6 महीने में 12 इंच तक लंबा हो सकता है. इसके बाद यह बड़ी संख्या में प्रजनन कर कुत्ते के शरीर में संक्रमण को और गंभीर बना देता है.

ऐसे दिखते हैं लक्ष्ण
हार्टवर्म बीमारी के लक्षण कई चरणों में दिखाई देते हैं. शुरुआत में डॉग्स को हल्की खांसी होने लगती है. दूसरे चरण में जानवर जल्दी थकने लगता है, उसकी ऊर्जा कम हो जाती है और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है. बीमारी बढ़ने पर लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी बढ़ जाती है. वहीं, अंतिम चरण में डॉग्स खाना-पीना छोड़ देता है, जिससे वजन तेजी से कम होने लगता है और मसूड़े नीले पड़ सकते हैं.

सबसे पहले होता है टेस्ट
हार्टवर्म की पुष्टि के लिए सबसे पहले हार्टवर्म एंटीजन टेस्ट कराया जाता है. इसके अलावा एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या दूसरे स्कैनिंग की मदद से संक्रमण की गंभीरता का पता लगाया जाता है. रिपोर्ट के आधार पर दवाइयां और विशेष इंजेक्शन दिए जाते हैं. वहीं, गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है. इलाज के दौरान डॉग्स को पर्याप्त आराम देना और अधिक शारीरिक गतिविधियों से बचाना जरूरी होता है.

ऐसे कम किया जा सकता है खतरा
हार्टवर्म से बचाव इलाज से कहीं आसान है. इसके लिए डॉग्स की नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए और पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार हर महीने हार्टवर्म से बचाव की दवा और कृमिनाशक दवा समय पर देनी चाहिए. साथ ही मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाकर इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

About the Author

Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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