संसद के मानसून सत्र में बुधवार को दोनों सदनों में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण कार्यवाही बाधित रही. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़े ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया. हालांकि कुछ समय बाद तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, आरजेडी, सीपीएम और झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत कई दलों के सदस्य वापस लौटे और बहस में हिस्सा लिया.
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने विधेयक पर चर्चा के दौरान अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का मुद्दा उठाना चाहा. उपसभापति हरिवंश ने इसे विधेयक के दायरे से बाहर बताते हुए अनुमति नहीं दी. इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया. सदन में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया और INDIA गठबंधन के सांसदों के साथ वॉकआउट की घोषणा कर दी.
इसी दौरान विपक्षी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सरकार को जवाब देना चाहिए. विपक्ष के बहिर्गमन के बावजूद सदन में विधेयक पर चर्चा जारी रही.
उधर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के हंगामे को लेकर तीखा पलटवार किया. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने आरोप लगाया कि विपक्ष पिछले कई दिनों से बिना किसी ठोस कारण के संसद की कार्यवाही बाधित कर रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.
जगदंबिका पाल ने झारखंड में जेपीएससी परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस समर्थित राज्य सरकार को निशाने पर लिया. उन्होंने दावा किया कि रांची में छात्र पिछले 13 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब तक उनसे मुलाकात तक नहीं की. उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे झारखंड के छात्रों के आंदोलन पर पूरी तरह खामोश हैं.
उधर बीजेपी सद सुष्मिता देव ने कहा कि यदि विपक्ष किसी मुद्दे को लेकर गंभीर है तो उसे संसद के भीतर बहस करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय सदन में अपनी बात रखना लोकतांत्रिक परंपरा है, क्योंकि संसद में दिए गए बयान आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं. उनके मुताबिक विपक्ष चर्चा से इसलिए बचता है क्योंकि सत्ता पक्ष तथ्यों के साथ उसका जवाब देता है.
केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने भी झारखंड सरकार पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में हजारों छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी सुध नहीं ली. उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को भारी बारिश के बीच तिरपाल लगाने तक की अनुमति नहीं दी गई और बिजली व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं. संजय सेठ ने जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने की मांग भी दोहराई.
बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने भी विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष संसद में केवल प्लेकार्ड लेकर आता है और हंगामा करता है, जबकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चर्चा से बचता है. उनके अनुसार, संसदीय लोकतंत्र में बहस सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और विपक्ष को उसका सम्मान करना चाहिए.
संसद के भीतर न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक पर बहस और विपक्ष के वॉकआउट के साथ-साथ झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष के हमलों ने बुधवार को संसद का सियासी तापमान और बढ़ा दिया. आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.