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Organic Waste series-2: गीले कचरे से कैसे करें लाखों की कमाई, कंपोस्ट...


बायोगैस प्‍लांट क्‍या होता है और कैसे लगाया जाता है.

बायोगैस प्‍लांट क्‍या होता है और कैसे लगाया जाता है.

सबसे पहले जानते हैं कि बायोगैस प्लांट होता क्या है. दरअसल बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) एक ऐसी तकनीक या ढांचा है जो जैविक कचरे ( घर से निकले गीले कचरे, गोबर, और पेड़-पौधों के अवशेष) को सड़ाकर उससे उपयोगी गैस और अच्छी किस्म का खाद बनाता है. इस प्लांट में जैविक कचरा जमा किया जाता है और फिर उसकी प्रोसेसिंग करके गैस बनाई जाती है. इससे मीथेन और कार्बन डाई ऑक्साइड गैस मिलती है, जिसका उपयोग खाना पकाने और बिजली बनाने में होता है. इससे खाद भी पैदा होता है जो काफी उपयोगी होता है.

कंपोस्टिंग बिजनेस क्या है?
कंपोस्टिंग का मतलब है खाद तैयार करना और जब इसे बड़े और व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है तो वह कंपोस्टिंग बिजनेस (Composting Business) कहलाता है. इसमें गीले और ऑर्गेनिक कचरे को प्राकृतिक खाद (ऑर्गेनिक कंपोस्ट) में बदलना और उसे बाजार में बेचना शामिल है. यह ईको-फ्रेंडली और ज्यादा मुनाफा देने वाला तरीका है. इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है. इसमें शहरों या सोसायटियों से निकलने वाले कचरे को इस्तेमाल किया जा सकता है.

बायोगैस प्लांट या कंपोस्टिंग, क्या शुरू करना है ज्यादा आसान? आइए जानते हैं एक्सपर्ट की सलाह…

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह कहती हैं कि बायोमेथेनेशन या बायोगैस प्लांट लगाने की तुलना में कंपोस्टिंग को आमतौर पर कम समय में और आसानी से शुरू किया जा सकता है. देश में कचरा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था भी यही दर्शाती है.

कंपोस्‍ट खाद बनाने को लेकर जानें अहम बातें.

कंपोस्‍ट खाद बनाने को लेकर जानें अहम बातें.

वर्तमान में , जैविक कचरे को इस्तेमाल करने की क्षमता में कंपोस्टिंग का हिस्सा लगभग 96 प्रतिशत, जबकि बायोगैस का हिस्सा लगभग 4 प्रतिशत है. आवासीय सोसायटियों, संस्थानों आदि छोटे पैमाने पर, विकेंद्रीकृत कंपोस्टिंग यूनिट्स को लगाना आसान होता है, क्योंकि इन्हें लगाने के लिए लंबी-चौड़ी योजना नहीं बनानी होती और तमाम जगहों से अनुमतियां लेने की जरूरत नहीं होती है.

वहीं, बायोगैस संयंत्रों को लगाने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, क्योंकि इनमें डाइजेस्टर, गैस शोधन उपकरण इत्यादि शामिल होते हैं. हालांकि, एक बार चालू होने के बाद बायोगैस प्लांट ज्यादा मुनाफा पैदा करते हैं.अगर आप बड़े स्तर पर काम शुरू करना चाहते हैं तो यह बेहतर विकल्प है.

कितनी जगह की होती है जरूरत?

प्रियंका सिंह बताती हैं कि जहां तक कंपोस्टिंग और बायोगैस प्लांट लगाने के लिए जगह की जरूरत का सवाल है,तो छोटे पैमाने पर कंपोस्टिंग और बायोगैस लगाने के लिए अलग-अलग मॉडल और विकल्प उपलब्ध हैं. अलग-अलग कंपोस्टिंग या बायोगैस यूनिट्स को 50-60 वर्ग मीटर की मामूली जगह से शुरू किया जा सकता है. बेंगलुरू के कोरमंगला में 5 टन प्रति दिन का बायोगैस प्लांट एक शिपिंग कंटेनर के भीतर लगाया गया है. हालांकि, बड़े प्लांट के लिए जमीन की जरूरत काफी महत्वपूर्ण होती है.

इसे ऐसे समझ सकते हैं, जैसे 100 टन प्रतिदिन की क्षमता के बड़े बायोगैस प्लांट के लिए आमतौर पर 4-5 एकड़ जमीन की जरूरत होती है, वहीं, 200 टन प्रतिदिन की क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र के लिए 6-7 एकड़ की जरूरत पड़ती है. इसी तरह 500 टन प्रतिदिन की क्षमता के प्लांट के लिए लगभग 13-14 एकड़ भूमि की जरूरत होती है. इसके अलावा भविष्य में प्लांट की क्षमता को बढ़ाने और अतिरिक्त भंडारण को समायोजित करने के लिए 30-50% अतिरिक्त जमीन की जरूरत होती है.

कंपोस्टिंग बिजनेस के लिए कितनी जगह चाहिए?

इन्हें लगाने से क्या मिलता है? फायदे क्या हैं?

प्र‍ियंका सि‍ंंह कहती हैं,  ‘कंपोस्टिंग प्लांट से मिलने वाली जैविक खाद को जैविक उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो रासायनिक उर्वरकों का विकल्प बन सकता है. यह मिट्टी की सेहत में सुधार लाता है. कंपोस्टिंग को बार-बार दोहराया जा सकता है. छोटे पैमाने पर जैविक कचरा प्रबंधन के लिए कंपोस्टिंग सबसे बेहतर है.

जबकि बड़े पैमाने पर जैविक कचरा प्रबंधन के लिए बायोगैस प्लांट लगाने का सुझाव दिया जाता है. बायोगैस प्लांट स्वच्छ ऊर्जा के जरिए अधिक लाभ देता है, जिसे परिवहन, खाना पकाने और बिजली उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकता है. इससे जैविक खाद और तरल उर्वरक भी मिलता है, जिसे मिट्टी की सेहत सुधारने में इस्तेमाल किया जा सकता है.

ये दोनों तरीके लैंडफिल में कचरे का बोझ, उत्सर्जन और दुर्गंध को घटाने जैसे फायदे देती हैं. साथ में, यह गीले कचरे को अलग करके कागज और प्लास्टिक जैसी अन्य रीसायकिल होने वाली चीजों को दूषित होने से बचाती हैं.’

ऐसे में आप अपने पास मौजूद जमीन की उपलब्धता, काम करने की क्षमता या मुनाफा कमाने की मंशा और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए गीले कचरे से बिजनेस का चुनाव कर सकते हैं. कचरे का व्यवसाय आपको मालामाल भी कर सकता है.

इस सीरीज की तीसरी स्टोरी में जानते हैं… ‘अपने शहर की नगरपालिका के साथ मिलकर वेस्ट मैनेजमेंट का काम कैसे शुरू करें? क्या इसे अकेले भी शुरू किया जा सकता है? क्या चुनौतियां आती हैं?’

पढ़ते रहें न्यूज18हिंदी….



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