भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

चंदौली के कांशीराम आवास की हकीकत, करोड़ों की योजना फेल, 10 साल...


चंदौली जिला विकास के दावों को लेकर अक्सर चर्चा में रहता है. लेकिन जिला मुख्यालय स्थित कांशीराम शहरी आवास परिसर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयान करती है. यहां सड़कें और इमारतें देखने पर पहली नजर में विकास का आभास होता है. लेकिन जैसे-जैसे अंदर की स्थिति सामने आती है. समस्याओं की लंबी फेहरिस्त नजर आने लगती है. परिसर के बाहर जनप्रतिनिधियों के नाम वाले बोर्ड लगे हुए है. जिससे यह स्पष्ट होता है कि यहां विभिन्न सरकारी योजनाओं का संचालन हुआ है. हालांकि लोगों ने कहा कि योजनाओं का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पाया.

दरअसल, कांशीराम शहरी आवास परिसर के पास एक बड़ी पानी की टंकी बनाई गई है. दूर से देखने पर यह नई दिखाई देती है. लेकिन पास जाकर देखने पर इसकी दीवारों में दरारें साफ नजर आती है. स्थानीय लोगों का दावा है कि टंकी बनने के बाद आज तक इसमें पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी. यानी जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया था, वह पूरा नहीं हुआ. अब टंकी केवल एक ढांचा बनकर रह गई है. ग्रामीणों ने कहा कि समय-समय पर इसकी रंगाई-पुताई जरूर हुई, लेकिन पानी कभी नहीं आया. ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा.

सरकारी शौचालय पर लटका ताला
पानी की टंकी के ठीक बगल में सरकारी शौचालय भी बनाया गया है. हालांकि मौके पर शौचालय के दरवाजे बंद मिले और उस पर ताला लगा था. स्थानीय लोगों ने कहा कि शौचालय का नियमित उपयोग नहीं हो रहा. लोगों ने बताया कि यदि यह चालू होता, तो आसपास रहने वाले परिवारों को काफी राहत मिलती, लेकिन बंद होने की वजह से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

10 साल से रह रही महिला ने बताई परेशानी
कांशीराम शहरी आवास परिसर में रहने वाली नीलम देवी ने लोकल 18 से बताया कि वह करीब 10 वर्षों से यहां रह रही हैं. उन्होंने कहा कि आवास तो मिला. लेकिन सबसे बड़ी समस्या पानी की है. उन्होंने बताया कि उनके घर में कमरे, रसोई और शौचालय की व्यवस्था है, लेकिन पानी की कोई सुविधा नहीं है. मजबूरी में उन्हें चापाकल से पानी भरना पड़ता है. नीलम देवी ने बताया कि परिसर में बनी पानी की टंकी कभी चालू नहीं हुई. आज भी पूरा परिवार चापाकल पर निर्भर है. बरसात के मौसम में परेशानी कुछ कम रहती है, लेकिन गर्मियों में हालात बेहद कठिन हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि घर की ऊपरी मंजिल तक बाल्टी से पानी ले जाना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कत होती है.

गर्मी में बढ़ जाती है मुश्किल
स्थानीय लोगों ने कहा कि अगस्त के महीने में बारिश होने के कारण कुछ राहत रहती है, लेकिन अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी में पानी की समस्या गंभीर रूप ले लेती है. चंदौली में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, ऐसे समय में चापाकल से पानी भरकर घरों तक पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है.

युवा ने उठाए विकास पर सवाल
स्थानीय निवासी माधवेंद्र मूर्ति ओझा ने लोकल 18 से कहा कि कांशीराम शहरी आवास तो बनाए गए, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का विकास अधूरा रह गया. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से पानी की टंकी बंद पड़ी है और लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जनता की समस्याएं जस की तस रह जाती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवासों में नियमित जलापूर्ति होती, तो लोगों को रोजाना पानी ढोने की मजबूरी नहीं होती.

पूर्व प्रधान ने भी उठाए सवाल
पूर्व प्रधान संजय सिंह ने भी पानी और शौचालय की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने लोकल 18 से कहा कि यदि सरकारी शौचालय चालू रहता, तो महिलाओं और लड़कियों को अधिक सुविधा मिलती. उन्होंने कहा कि विकास का वास्तविक मतलब लोगों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है. उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र की मूल समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की.

चापाकल ही बना लोगों का सहारा
कांशीराम शहरी आवास परिसर में रहने वाले अधिकांश परिवार आज भी चापाकल के पानी पर निर्भर हैं. लोग पहले चापाकल से बाल्टी भरते हैं और फिर उसे अपने घरों तक लेकर जाते हैं. निचली मंजिल पर रहने वालों के लिए यह काम कुछ आसान है, लेकिन ऊपरी मंजिलों में रहने वाले परिवारों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह रोजाना की बड़ी चुनौती है

गंदगी और जल निकासी भी बनी समस्या
कांशीराम शहरी आवास परिसर के पास जल निकासी की समुचित व्यवस्था भी नजर नहीं आती. स्थानीय लोगों ने बताया कि नालियों का पानी पास के गड्ढे और नहरनुमा स्थान में जमा होता है, जिससे गंदगी फैलती है. इसके अलावा परिसर में गीले और सूखे कचरे के लिए डस्टबिन तो लगाए गए हैं, लेकिन उनके उपयोग और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

स्थानीय लोगों ने की यह मांग
स्थानीय निवासियों की मांग है कि वर्षों से बंद पड़ी पानी की टंकी को जल्द चालू कराया जाए, सरकारी शौचालय को नियमित रूप से संचालित किया जाए और जलापूर्ति की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. लोगों ने कहा कि केवल भवन और बोर्ड लगाने से विकास पूरा नहीं होता. जब तक लोगों को पीने का पानी, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक विकास के दावे अधूरे ही माने जाएंगे.

करोड़ों रुपये की योजनाओं के दावे
बता दें कि चंदौली जिला मुख्यालय स्थित कांशीराम शहरी आवास परिसर की तस्वीर यह संकेत देती है कि बुनियादी सुविधाओं के मामले में अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है. एक ओर करोड़ों रुपये की योजनाओं के दावे हैं. वहीं, दूसरी ओर लोग पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए चापाकल पर निर्भर हैं. बंद पड़ी पानी की टंकी, ताले में कैद शौचालय और जल निकासी की बदहाल व्यवस्था स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है. अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं.



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top