चंदौली: जिले के चकिया विधानसभा क्षेत्र के पहाड़ी इलाके में स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुसाखांड प्रथम सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक बेहतर तस्वीर पेश करता है. जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर होने के बावजूद विद्यालय में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, खेल सामग्री और स्वच्छ परिसर जैसी कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. हालांकि, विद्यालय में शिक्षकों की कमी और पेयजल की समस्या जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद है. लोकल 18 की टीम ने स्थानीय स्तर पर इस स्कूल की पड़ताल की. जिसमें विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आई.
विद्यालय के प्रधानाध्यापक कृष्णानंद सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि विद्यालय में पुस्तकालय, खेल सामग्री, कंप्यूटर लैब और स्मार्ट बोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा भी दी जाती है और समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया जाता है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति अच्छी रहती है और अभिभावकों का भी सहयोग मिलता है. उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी निष्ठा के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं.
कक्षाओं में मिला अनुशासित माहौल
विद्यालय की अलग-अलग कक्षाओं का निरीक्षण करने पर अधिकांश छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई में व्यस्त दिखाई दिए. कक्षाओं की दीवारों पर गणितीय सूत्र, शैक्षणिक चार्ट और अन्य अध्ययन सामग्री लगी हुई थी, जिससे बच्चों को पढ़ाई में मदद मिलती है. विज्ञान और गणित की कक्षाओं में शिक्षक बच्चों को विषयों को सरल भाषा में समझाते नजर आए. विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अच्छी देखने को मिली.
बच्चों से पूछे सवाल, मिला सही जवाब
पड़ताल के दौरान विद्यार्थियों से विज्ञान, गणित, इतिहास और कंप्यूटर जैसे विषयों से जुड़े सामान्य प्रश्न पूछे गए. कुछ विद्यार्थियों ने बढ़िया से उत्तर दिए, जबकि कुछ बच्चे कैमरे के सामने थोड़े घबरा गए. विज्ञान और गणित के विषयों में बच्चों की समझ बेहतर दिखाई दी. हालांकि अंग्रेजी स्पेलिंग और सामान्य उच्चारण में कुछ विद्यार्थियों को कठिनाई महसूस हुई. शिक्षकों ने कहा कि नियमित अभ्यास के माध्यम से इन कमियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.
कंप्यूटर लैब बनी आकर्षण का केंद्र
विद्यालय में कंप्यूटर लैब की व्यवस्था की गई है, जहां कंप्यूटर और स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध है. बच्चों ने बताया कि उन्हें समय-समय पर कंप्यूटर चलाने का अवसर मिलता है. हालांकि कंप्यूटर शिक्षक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पाते, जिससे तकनीकी शिक्षा प्रभावित होती है. प्रधानाध्यापक ने कहा कि यदि प्रशिक्षित कंप्यूटर शिक्षक की नियमित नियुक्ति हो जाए, तो विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का और अधिक लाभ मिल सकेगा.
मिड-डे मील की व्यवस्था मिली बेहतर
विद्यालय में बच्चों को सरकार की योजना के तहत नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाता है. बच्चों ने बताया कि उन्हें दाल, चावल, सब्जी और अन्य निर्धारित भोजन समय पर मिलता है. बच्चों ने भोजन की गुणवत्ता को अच्छा बताया. इससे विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति बनाए रखने में भी मदद मिल रही है.
मानव संसाधन की है सबसे बड़ी समस्या
विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार ने लोकल 18 से बताया कि विद्यालय में पढ़ाई का माहौल अच्छा है, लेकिन शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हो जाएं, तो प्रत्येक विषय की पढ़ाई और अधिक प्रभावी तरीके से कराई जा सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि कंप्यूटर शिक्षा के लिए शिक्षक की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान बेहतर तरीके से मिल सके.
पेयजल की समस्या अब भी बरकरार
विद्यालय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक पेयजल है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में पानी की गुणवत्ता अच्छी नहीं है. कई बार बच्चों को बाहर से पानी लाना पड़ता है. इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग को जानकारी भी दी गई है. यदि स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था हो जाए, तो विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी.
बाउंड्रीवाल का अभाव भी चिंता का विषय
विद्यालय में बाउंड्रीवाल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. परिसर खुला होने के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी रहती हैं. प्रधानाध्यापक ने कहा कि यदि विद्यालय की चारदीवारी पूरी हो जाए, तो बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय की संपत्ति दोनों सुरक्षित रहेंगे.
हरियाली और स्वच्छ वातावरण बना रहे आकर्षण
विद्यालय परिसर में कई प्रकार के पौधे लगाए गए हैं. पीपल सहित अन्य छायादार वृक्ष बच्चों को स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराते हैं. पहाड़ों से घिरे इस विद्यालय का वातावरण किसी पर्यटन स्थल जैसा प्रतीत होता है. स्थानीय लोग भी विद्यालय के स्वच्छ परिसर और हरियाली की सराहना करते हैं.
सरकारी विद्यालयों के लिए बना आदर्श
बता दें कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुसाखांड प्रथम यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन हो तो दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों के सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट शिक्षा का उदाहरण बन सकते हैं. विद्यालय में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, खेल सामग्री, स्वच्छ परिसर और अनुशासित वातावरण जैसी सुविधाएं इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं. हालांकि शिक्षकों की कमी, नियमित कंप्यूटर शिक्षक का अभाव, स्वच्छ पेयजल की समस्या और अधूरी बाउंड्रीवाल जैसी चुनौतियां अब भी मौजूद हैं. यदि इन कमियों को दूर कर दिया जाए, तो यह विद्यालय चंदौली ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी विद्यालयों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है.