जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में जहां अधिकतर लोग जगह की कमी का हवाला देकर पेड़-पौधे नहीं लगा पाते, वहीं मीरा जी ने अपनी छोटी-सी बालकनी को हरियाली से भर दिया है. उनकी बालकनी अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है. वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति एक बार रुककर इस खूबसूरत गार्डन को जरूर देखता है. उनकी बालकनी सिर्फ एक गार्डन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति उनके प्रेम और समर्पण की मिसाल है. रंग-बिरंगे फूल, हरे-भरे पौधे और हैंगिंग पॉट्स इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं.
बालकनी में 200 से अधिक पौधे
मीरा जी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से बेहद लगाव रहा है. समय के साथ यह शौक उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. आज उनकी बालकनी में 200 से अधिक पौधे लगे हुए हैं. छोटे और बड़े गमलों के अलावा उन्होंने हैंगिंग पॉट्स में भी कई तरह के पौधे लगाए हैं. इसी वजह से उनकी पूरी बालकनी किसी मिनी गार्डन जैसी नजर आती है. वह हर पौधे की देखभाल परिवार के सदस्य की तरह करती हैं.
बालकनी हमेशा हरी-भरी रहती है
उनकी बालकनी में गुलाब, गुड़हल, गेंदा, मोगरा, चमेली, पेटूनिया, बोगनवेलिया, सदाबहार, पोर्टुलाका, डहेलिया और जीनिया जैसे रंग-बिरंगे फूल खिले रहते हैं. इसके अलावा स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, एरेका पाम, स्पाइडर प्लांट, पीस लिली, एलोवेरा, तुलसी, जेड प्लांट, क्रोटन और फर्न जैसे सजावटी और उपयोगी पौधे भी लगे हैं. इन पौधों की वजह से उनकी बालकनी हमेशा हरी-भरी और ताजगी से भरी रहती है.
सबसे अच्छे दोस्त यही पौधे
मीरा जी का कहना है कि सुबह उठने के बाद से लेकर रात तक जब भी उन्हें समय मिलता है, वह अपने गार्डन में ही बिताती हैं. पौधों को पानी देना, उनकी सफाई करना, सूखे पत्तों को हटाना और नए पौधे लगाना उनकी रोज की दिनचर्या का हिस्सा है. उनका मानना है कि पेड़-पौधों के बीच समय बिताने से मन को शांति मिलती है. इससे दिनभर की थकान भी दूर हो जाती है. वह मुस्कुराते हुए कहती हैं कि उनके असली परिवार और सबसे अच्छे दोस्त यही पौधे हैं.
आसपास के लोग भी प्रेरित
मीरा जी की इस अनोखी पहल से आसपास के लोग भी प्रेरित हो रहे हैं. कई लोग उनकी बालकनी देखने पहुंचते हैं. उनसे पौधों की देखभाल और गार्डन तैयार करने के तरीके सीखते हैं. जो लोग पहले जगह की कमी का बहाना बनाते थे, वे अब अपनी बालकनी और छत पर छोटे-छोटे गार्डन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. मीरा जी का कहना है कि अगर मन में इच्छा और लगन हो, तो छोटी-सी जगह को भी हरियाली से सजाया जा सकता है.
बड़े दिल और सच्चे लगाव की जरूरत
आज के समय में शहरों में हरियाली लगातार कम होती जा रही है. ऐसे में मीरा जी का यह प्रयास लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रकृति से प्रेम करने के लिए बड़े बगीचे की नहीं, बल्कि बड़े दिल और सच्चे लगाव की जरूरत होती है. उनकी हरियाली से सजी बालकनी न सिर्फ घर की सुंदरता बढ़ा रही है, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और पौधे लगाने का संदेश भी दे रही है.