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Jharkhand Student Protest: हमारी मांगें मान ली जाएं… ये कहते हुए आंदोलनकारी छात्र झारखंड विधानसभा के काफी निकट तक पहुंच गए. प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार की गई तो छात्र डांस करते हुए झूमने लगे. पुलिसवालों ने आंसू गैस छोड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन छात्रों ने पुलिसवालों को घेर लिया और आंसू गैस के गोले नहीं छोड़े गए… वाटर कैनन से पानी की बौछार ब्रेक ले-लेकर होती रही तो छात्र रेन डांस का मजा लेते रहे. इस बीच कुछ छात्र दूसरे रास्ते से विधानसभा से महज 100 मीटर तक पहुंच गए, लेकिन वे भी बाउंड्री के पास रुक गए… इतना सबकुछ हो गया लेकिन छात्र उग्र नहीं हुए और न ही पुलिसवालों ने बल प्रयोग किया…. जाहिर तौर पर झारखंड का आंदोलन बिल्कुल अलग फील कराता रहा…
आंदोलनों से कितना अलग है रांची का छात्र आंदोलन
रांची. झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का जमावड़ा है और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर आंदोलित हैं. JPSC और JSSC परीक्षाओं में पेपर लीक और कथित धांधली के खिलाफ राज्य के युवा सड़कों पर हैं, और अब तक बेहद संयमित रहे हैं.. आमतौर पर छात्र आंदोलनों के बारे में लोगों की धारणा होती है कि इसमें उग्र और हंगामेदार प्रदर्शन होते है, लेकिन रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अपनी गजब की अनुशासन और लोकतांत्रिक गरिमा के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गया है. राजनीति के जानकारों ने इसे एक ‘आदर्श सामाजिक आंदोलन’ माना है…वैचारिक और व्यावहारिक तौर पर झारखंड का यह छात्र आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर या अन्य राज्यों के हिंसक प्रदर्शनों से अलग और अनोखा है… हालांकि, एक दो बार छात्रों के बीच भगदड़ भी दिखी, ऐसा कहा गया कि छात्रों पर पुलिसवालों ने कुछ बल प्रयोग किया… वहीं, छात्र पीछे हटे और फिर आगे बढ़े, लेकिन उग्रता नहीं दिखी.
झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन की सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं है कि छात्र CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, बल्कि आंदोलन का तरीका भी ध्यान खींच रहा है. बिल्कुल गांधीवादी तरीका… छात्रों का एक धड़ा जरूर विधानसभा की ओर गया… लेकिन छात्रों के हाथों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीरें कुछ अलग ही कहानी कहती रही… छात्र नेतृत्व की ओर से राजनीतिक और धार्मिक झंडों से दूरी, व्यक्तिगत या आपत्तिजनक नारों से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने की अपील की गई है. दिल्ली के जंतर मंतर से बिल्कुल अलग अनुभव के साथ झारखंड का छात्र आंदोलन… खास यह कि सीएम हेमंत सोरेन का जन्मदिन भी है, और छात्र उनको शुभकामनाएं और बधाई देते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते रहे… जंतर मंतर जैसे हिंसक आंदोलन से बिल्कुल अलग…
राजनीति और निजी हमलों से पूरी तरह दूरी
प्राय: देखा जाता है कि छात्र आंदोलनों में किसी न किसी राजनीतिक दल का दखल हो जाता है, जिससे असली मुद्दा पीछे छूट जाता है. लेकिन झारखंड के इस आंदोलन ने अपनी राजनीतिक दूरी और भाषा की मर्यादा को पूरी तरह बनाए रखा है. प्रदर्शनकारी छात्र किसी भी राजनेता या बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत गाली-गलौज या अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर मंतर नीट प्रोटेस्ट जैसे आंदोलनों में लगने वाले ‘आजादी’ के नारों या देश विरोधी विमर्शों को यहां कोई जगह नहीं दी गई है. यहां आंदोलनकारी छात्रों का साफ कहना है कि यह मंच सिर्फ परीक्षाओं और सिस्टम को सुधारने के लिए है, किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं.
सरकार गिराना नहीं, परीक्षा व्यव स्था में सुधार है उद्देश्य
जानकारों की नजर में इस आंदोलन की सबसे बड़ी खूबी इसका सकारात्मक और स्पष्ट नजरिया है. प्रदर्शन कर रहे युवा वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार को गिराने या मुख्यमंत्री के इस्तीफे जैसी मांगें नहीं कर रहे हैं. उनका पूरा ध्यान सिस्टम के भीतर मौजूद कमियों और भ्रष्टाचार को खत्म करने पर टिका है. छात्रों की मुख्य मांगें JPSC और JSSC जैसे आयोगों के कामकाज में पूरी पारदर्शिता लाना, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराना है. स्पष्ट है कि आंदोलनकारी छात्रों का यह रवैया दिखाता है कि छात्र सत्ता बदलने नहीं, बल्कि नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार चाहते हैं.
खराब मौसम में भी गजब का संयम और शांतिपूर्ण प्रदर्शन
रांची की सड़कों पर हजारों की संख्या में छात्रों का हुजूम उमड़ा हुआ है, लेकिन कहीं से भी तोड़फोड़, आगजनी या आम जनता को परेशान करने की एक भी घटना सामने नहीं आई है. खराब मौसम के बावजूद छात्र बेहद अनुशासित तरीके से अनशन और शांतिपूर्ण धरने पर बैठे रहे हैं. इस शालीनता और सभ्य व्यवहार ने आम लोगों के दिलों में भी छात्रों के प्रति गहरा समर्थन और सहानुभूति पैदा की है. खास बात यह कि विरोध जताने का यह शांत और अहिंसक तरीका इस आंदोलन को देश के अन्य उग्र प्रदर्शनों से बिल्कुल अलग खड़ा कर जाता है.
प्रशासन का संयम और पुलिसिया एक्शन नहीं होना
देश के दूसरे हिस्सों में जब भी युवाओं का ऐसा बड़ा जमावड़ा होता है तो प्रशासन प्राय: लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोलों और सख्त रवैये का सहारा लेता है. लेकिन 16 दिनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान झारखंड में स्थिति इसके बिल्कुल उलट रही है. जहां राज्य पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति काफी संवेदनशीलता और धैर्य दिखाया है, वहीं छात्रों ने भी पुलिस प्रशासन के विरुद्ध कोई काम नहीं किया है. खास बात यह भी है ति सरकार की तरफ से भी बातचीत के रास्ते खुले रखे गए हैं, जिसके चलते आयोग के शीर्ष पदों पर बदलाव और सुधार की प्रक्रिया भी शुरू हुई है. हालांकि छात्र अभी भी ठोस और लिखित फैसले की मांग पर अड़े हैं, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से संयम बनाए रखना इस आंदोलन की बड़ी परिपक्वता को बताता है.
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