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सौरभ भारद्वाज का ओपन चैलेंज- दिल्ली की सीएम और शिक्षा मंत्री खुद...


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दिल्ली की सीएम और शिक्षा मंत्री देखकर बताएं कौन सी साइकिल बेहतर, AAP का चैलेंज

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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर साइकिल घोटाले का बड़ा आरोप लगाया है. पार्टी मुख्यालय में सौरभ भारद्वाज ने सरकारी और रिटेल साइकिलों को आमने-सामने रखकर तुलना की. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 6957 रुपए में जो साइकिलें खरीदीं, वे 4200 रुपए की साइकिल से भी घटिया हैं. सरकारी साइकिल में नकली स्टीकर और सस्ते पार्ट्स लगे हैं. AAP ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है.

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दिल्ली की सीएम और शिक्षा मंत्री देखकर बताएं कौन सी साइकिल बेहतर, AAP का चैलेंजZoom

भाजपा की सात हजार वाली घोटाला साइकिल से बेहतर है 4200 वाली साइकिल- सौरभ भारद्वाज.

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दावा है कि स्कूली छात्राओं को बांटी जाने वाली साइकिलों में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश किया गया है. बुधवार को पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ. यहां आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मीडिया के सामने दो साइकिलें पेश कीं. एक साइकिल वह थी जो सरकार ने छात्राओं को बांटी है. दूसरी साइकिल वह थी जिसे पार्टी ने खुद बाजार से खरीदा है. दोनों साइकिलों को आमने-सामने रखकर सरकार के दावों की हवा निकाल दी गई. सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि सरकार ने 6957 रुपए में जो साइकिल खरीदी है. उससे कहीं बेहतर साइकिल उन्होंने खुद 4200 रुपए में बाजार से खरीदी है. सरकारी साइकिल के पार्ट्स सस्ते और लोकल बताए जा रहे हैं.

बुधवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मुख्यालय में एक अलग ही नजारा देखने को मिला. मीडिया के कैमरों के सामने दो अलग-अलग साइकिलें खड़ी थीं. इनमें से एक साइकिल भगवा रंग की थी. यह वही साइकिल है जिसे भाजपा सरकार ने दिल्ली की गरीब लड़कियों को बांटा है. वहीं दूसरी तरफ एक लाल रंग की साइकिल खड़ी थी. यह लाल साइकिल आप नेताओं ने खुद बाजार से फुटकर कीमत पर खरीदी थी. सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘लाल रंग की साइकिल की रसीद मेरे नाम पर कटी है.’ इसकी मूल कीमत 4000 रुपए है. इस पर 200 रुपए का टैक्स लगा है. इस तरह यह साइकिल उन्हें 4200 रुपए में पड़ी है. वहीं भाजपा सरकार ने टेंडर के जरिए भगवा रंग की साइकिल खरीदी है. सरकार ने थोक में ऐसी 1 लाख 30 हजार साइकिलें खरीदी हैं. हैरानी की बात यह है कि थोक में खरीदने के बाद भी सरकार को एक साइकिल 6957 रुपए की पड़ी है. इन दोनों साइकिलों में हूबहू समानता दिखती है. लेकिन असली फर्क नीयत का है. जो साइकिल फुटकर में 4200 रुपए की मिल रही है. सरकार ने उसे थोक में लगभग 7000 रुपए में कैसे खरीद लिया. यह सीधा-सीधा घोटाले की ओर इशारा करता है.

एक्सपायर ट्रेडमार्क वाली साइकिलें बांटने का आरोप, AAP ने की सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो जांच की मांग.

सौरभ भारद्वाज ने मीडिया को दोनों साइकिलों की तकनीकी खूबियों के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि सरकार ने जो स्पेसिफिकेशन टेंडर में दी थी, लाल रंग की साइकिल बिल्कुल वैसी ही है. यह लाल साइकिल एक एमटीबी यानी माउंटेन टेरेन बाइक है. इसके टायर काफी चौड़े और मजबूत हैं. लाल साइकिल में मेट्रो कंपनी के ब्रांडेड टायर लगे हुए हैं. दूसरी तरफ भाजपा सरकार द्वारा बांटी गई भगवा साइकिल है. इस सरकारी साइकिल पर स्काइलर कंपनी का स्टीकर लगा हुआ है. लेकिन यह स्टीकर पूरी तरह से नकली है. सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘अगर कोई हीरो साइकिल्स को फोन करेगा तो वे बताएंगे कि असली स्काइलर का मॉडल वे एक साल पहले ही बंद कर चुके हैं.’ इस मॉडल का ट्रेडमार्क भी एक्सपायर हो चुका है. कोई भी व्यक्ति ट्रेडमार्क की वेबसाइट पर जाकर इसे आसानी से चेक कर सकता है. दिल्ली की झंडेवालान होलसेल मार्केट में भी यह साइकिल अब नहीं मिलती है. सरकार के टेंडर के मुताबिक 7000 रुपए वाली असली स्काइलर साइकिल में सात गियर होने चाहिए. उसमें सस्पेंशन और डिस्क ब्रेक भी होने चाहिए थे. लेकिन भगवा साइकिल में ना तो गियर हैं और ना ही डिस्क ब्रेक.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ नेता ही नहीं बोल रहे थे. आम आदमी पार्टी ने सच्चाई साबित करने के लिए एक साइकिल मिस्त्री को भी वहां बुलाया था. मिस्त्री ने दोनों साइकिलों को बारीकी से चेक किया और उनका अंतर सबके सामने रखा. मिस्त्री ने मीडिया को बताया कि 4200 रुपए वाली लाल साइकिल में एल्युमिनियम की क्लच लगी है. इस साइकिल में मेट्रो कंपनी का टायर इस्तेमाल हुआ है. इस टायर की बाजार में कीमत लगभग 350 से 500 रुपए के बीच आती है. इसके उलट सरकारी साइकिल की कहानी बिल्कुल अलग है. मिस्त्री ने बताया कि सरकारी साइकिल में क्लच प्लास्टिक की बनी है. इसमें बहुत ही लोकल और सस्ता टायर लगा हुआ है. इस लोकल टायर की कीमत बाजार में मात्र 150 रुपए है. सरकारी साइकिल की रिम भी बहुत हल्की क्वालिटी की है. इसके अलावा पेडल वाली क्रैंक भी काफी हल्की और सस्ती है. मिस्त्री ने अपना रोजाना का अनुभव भी साझा किया. उसने बताया कि उसकी दुकान पर सरकारी वाली ऐसी दो-चार साइकिलें रोज रिपेयर होने आती हैं. इन साइकिलों में हमेशा कुछ न कुछ ढीला रहता है या टूट जाता है. इससे साफ पता चलता है कि ब्रांडेड के नाम पर बच्चियों को कबाड़ थमा दिया गया है.



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