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JPSC Recruitment Scam: JPSC भर्ती घोटाले की जांच में गिरफ्तार अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान से बड़ा खुलासा हुआ है. उसके अनुसार, 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के नंबर बढ़ाने के लिए कथित तौर पर सेटिंग की जाती थी. FRO और ACF पदों के लिए करीब 20 अभ्यर्थियों से 5.80 करोड़ रुपये लेने का दावा किया गया है. इनमें 19 अभ्यर्थियों के पास होने और एक के फेल होने की बात कही गई है. CDPO परीक्षा में भी 10 लाख रुपये लेने का दावा सामने आया है. अभय तिवारी ने JPSC के तत्कालीन चेयरमैन और तीन पूर्व सदस्यों से संपर्क कर इंटरव्यू में सेटिंग कराने की बात कही है. इन आरोपों की पुष्टि के लिए CID जांच कर रही है.
भर्ती घोटाले में करोड़ों के लेन-देन का दावा
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कथित घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ है. गिरफ्तार अभय तिवारी ने CID के सामने दिए अपने स्वीकारोक्ति बयान में कई गंभीर दावे किए हैं. उसके बयान के अनुसार, JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं में इंटरव्यू के नंबर बढ़ाने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए. अभय तिवारी के मुताबिक, FRO और ACF पदों पर चयन के लिए करीब 20 अभ्यर्थियों से कुल 5.80 करोड़ रुपये वसूले गए थे. इनमें से 19 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए. वहीं, एक अभ्यर्थी के फेल होने की बात भी सामने आई है. जांच में CDPO परीक्षा को लेकर भी बड़ा दावा सामने आया है. अभय तिवारी ने कथित तौर पर इस परीक्षा में भी 10 लाख रुपये लेने की बात कही है. उसके बयान के बाद भर्ती परीक्षाओं में कथित पैसों के खेल को लेकर जांच एजेंसियों की जांच और गंभीर हो गई है.
12 से ज्यादा परीक्षाएं पास करने का दावा
अभय तिवारी TDPL में मैनेजर के पद पर काम कर चुका है. बताया जा रहा है कि उसने करीब 13 साल के दौरान 12 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं. इसी वजह से वह कई परीक्षाओं की प्रक्रिया और अभ्यर्थियों से जुड़े मामलों में सक्रिय था. CID के सामने दिए बयान में उसने JPSC की परीक्षाओं में कथित सेटिंग का पूरा तरीका बताया है. उसके अनुसार, इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने के लिए आयोग के तत्कालीन पदाधिकारियों से संपर्क किया जाता था.
पूर्व सदस्यों से संपर्क का दावा
अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू की सेटिंग के लिए आयोग के तत्कालीन सदस्यों से संपर्क किया गया था. बयान में JPSC के पूर्व सदस्यों जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा के नाम का भी उल्लेख किया गया है. इसके अलावा तत्कालीन JPSC चेयरमैन से संपर्क कर इंटरव्यू में सेटिंग कराने का दावा किया गया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. बयान में जिन पूर्व सदस्यों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका जांच का विषय है.
करोड़ों रुपये के लेन-देन की जांच
CID अब इस पूरे मामले में कथित पैसों के लेन-देन और अभ्यर्थियों के चयन की प्रक्रिया की जांच कर रही है. FRO और ACF पदों के लिए 5.80 करोड़ रुपये की कथित वसूली का दावा सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ सकता है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अभ्यर्थियों से पैसे किस माध्यम से लिए गए. रकम किस-किस तक पहुंची. इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि जिन अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, उनके परीक्षा परिणाम और इंटरव्यू के नंबर में किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी या नहीं.
परीक्षाओं को लेकर कई सवाल
अभय तिवारी के बयान से JPSC की 11वीं, 12वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं. अब जांच एजेंसी उसके दावों की पुष्टि के लिए दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है. अगर जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो JPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार का यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
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