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माध्यमिक सहायक आचार्य नियुक्ति:877 अभ्यर्थियों में से 218 निजी विवि से पास,...




माध्यमिक सहायक आचार्य के लिए अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने में अभी देरी होगी। नियुक्ति पत्र देने की योजना फिलहाल टल गई है। राज्य के विभिन्न प्लस-टू स्कूलों में नियुक्ति के लिए 877 अभ्यर्थियों की अनुशंसा की गई है। इनमें 218 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने बीएड, एमए या अन्य संबंधित शैक्षणिक डिग्रियां देश या राज्य के निजी विश्वविद्यालयों से हासिल की हैं। निजी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के बाद शिक्षा विभाग ने इनके प्रमाण पत्रों की जांच का फैसला लिया है। शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने विभागीय अधिकारियों को हर प्रमाण पत्र की बारीकी से जांच करने का निर्देश दिया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि 33 महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति में अनियमितता सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इंटरनल जांच कराई थी। इसी स्क्रूटनी के दौरान यह बात सामने आई कि माध्यमिक सहायक आचार्य की अनुशंसा सूची में भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी से पास अभ्यर्थियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। शिक्षा सचिव ने कहा कि जरूरत पड़ी तो फ्रेश काउंसलिंग भी कराई जा सकती है। नियुक्ति पत्र कब दिया जाएगा, इसके लिए कोई योजना नहीं बनी है। नियुक्ति पत्र मिलने में देरी…शिकायत के बाद जांच, कुछ प्रमाण पत्र संदिग्ध मिले राज्य में करीब 1373 माध्यमिक सहायक आचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा जेएसएससी ने शिक्षा विभाग से की है। इन अभ्यर्थियों को लेकर शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पास पहले शिकायतें पहुंची थीं। शिकायतों के आधार पर हुई इंटरनल जांच में कुछ शिकायतों की पुष्टि हुई। मिली जानकारी के अनुसार, साइबर सिक्यूरिटी एंड डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस और एआई एंड कोडिंग जैसे विषयों में सफल कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग ने नियुक्ति पत्र वितरण की योजना फिलहाल रोक दी है। परीक्षा-दस्तावेज सत्यापन के बाद बनी थी अनुशंसा सूची माध्यमिक सहायक आचार्य की नियुक्ति राज्य के प्लस-टू उच्च विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक के विभिन्न विषयों के लिए की जा रही है। जेएसएससी की लिखित परीक्षा, निर्धारित शैक्षणिक अर्हता और दस्तावेज सत्यापन के बाद अंतिम अनुशंसा सूची तैयार की गई थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और झारखंड सरकार के नियुक्ति नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री लेने वाले अभ्यर्थी इस प्रक्रिया में शामिल होने के पात्र हैं। अब अनुशंसा के बाद शिक्षा विभाग यह जांच करेगा कि निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त डिग्रियां संबंधित संस्थानों की यूजीसी और एनसीटीई की मान्यता के अनुरूप हैं या नहीं।



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