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JSSC-CGL Exam Controversy | Ranchi High Court Statement on Cancellation


JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्यभर के छात्र 20 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। रांची में 9 अगस्त को छात्रों और सरकार के प्रतिनिधिमंडल से तीसरे राउंड की बातचीत हुई, सरकार के अनुसार छात्रों की 98% मांगे मान ली गई है। लेकिन छात्रो

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बातचीत के दौरान रिफॉर्म मंच ने सरकार से पूछा कि JSSC-CGL परीक्षा को रद्द क्यों नहीं किया जा रहा और इसकी CBI जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। इस पर सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कराया गया।

कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है, ऐसे में CGL परीक्षा को रद्द करना संभव नहीं है। बातचीत के दौरान सरकार ने छात्रों को ये आश्वासन भी दिया कि वह न्यायिक जांच कराने के लिए तैयार है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि छात्र इस परीक्षा के खिलाफ आंदोलन क्यों कर रहे हैं और सरकार इसे रद्द करने में असमर्थ होने का दावा क्यों कर रही है।

पहले जानिए क्या है JSSC-CGL परीक्षा, जिसपर पूरा विवाद हुआ

जिस परीक्षा को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उसका पूरा नाम झारखंड जनरल ग्रेजुएट लेवल कंबाइंड कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन (JGGLCCE) है। आम बोलचाल में इसे JSSC-CGL कहा जाता है। इसके जरिए झारखंड सरकार के अलग-अलग विभागों और कार्यालयों में ग्रुप ‘बी’ और ग्रुप ‘सी’ के कई पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं।

2023 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने JGGLCCE-2023 (Regular) और JGGLCCE-2023 (Backlog) के नाम से विज्ञापन जारी किया था। इन पदों के लिए करीब 6.40 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। बैकलॉग विज्ञापन-2023 के तहत रिजर्व कैटेगरी के लिए जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट के पदों पर आवेदन लिए गए थे। दोनों विज्ञापनों के लिए आवेदन अलग-अलग थे, लेकिन परीक्षा एक ही आयोजित की जानी थी।

परीक्षा से पहले ही पेपर लीक

पहले यह परीक्षा 28 जनवरी और 4 फरवरी 2024 को होनी थी, लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित की गई। उस दौरान पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट, मोबाइल डेटा और मोबाइल वाई-फाई सेवाएं बंद कर दी गई थीं।

सितंबर 2024 की परीक्षा के बाद करीब एक हजार छात्र, अभिभावक और शिक्षक झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे। उनका आरोप था कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही बाहर आ गया था। उन्होंने बड़े पैमाने पर, नकल, उम्मीदवार की जगह दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने, प्रश्नपत्र और उत्तर पहले से उपलब्ध कराने जैसे आरोप लगाए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तस्वीरें, वीडियो और अन्य उदाहरण भी पेश किए।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्थापना 6 दिसंबर 2008 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम 2008 के तहत की गई थी।

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्थापना 6 दिसंबर 2008 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम 2008 के तहत की गई थी।

छात्रों-टीचर ने ये आरोप लगाए…

  • बलियापुर केंद्र पर एक व्यक्ति को मोबाइल पर बात करते हुए उत्तर लिखते देखा गया। बाद में उसके पास मौजूद कागज के उत्तर परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाने का दावा किया गया।
  • रांची के एक कोचिंग छात्र ने आरोप लगाया कि पांच छात्रों को प्रश्नपत्र याद कराने के लिए बिहार ले जाया गया था।
  • एक छात्र ने कहा कि उसे टेलीग्राम पर प्रश्नों और उत्तरों की तस्वीरें मिली थीं। आरोप लगाया गया कि परीक्षा से पहले आसनसोल, नियामतपुर, मुजफ्फरपुर, रांची, मांडू, दिल्ली और नेपाल के काठमांडू में प्रश्नपत्र औऱ उत्तर उपलब्ध कराए गए। इन स्थानों पर चयनित उम्मीदवारों को विशेष तैयारी कराई गई।

सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- पेपर लीक नहीं हुआ

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आरोपों की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने की। डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई गई और गवाहों से पूछताछ की गई। सरकार ने इसे पेपर लीक नहीं, बल्कि ठगी का मामला बताया। उसके अनुसार कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र दिलाने का झांसा देकर पैसे वसूले।

सरकार ने कोर्ट को बताया-

  • अब तक पेपर लीक का कोई प्रमाण नहीं मिला।
  • चार गवाहों के मोबाइल से 187 उत्तर मिले।
  • इनमें से केवल 66 उत्तर परीक्षा के प्रश्नों से मेल खाते थे।
  • कई प्रश्न पहले की परीक्षाओं से दोहराए गए थे।

याचिकाकर्ता का दावा- आरोपियों के मोबाइल से 28 उम्मीदवारों के नाम मिले, जिनमें 10 परीक्षा में सफल हुए

याचिकाकर्ताओं ने CID के मई और जून 2025 में दाखिल हलफनामों में विरोधाभास होने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, पैसे का लेन-देन परीक्षा के बाद बताया गया, जबकि उम्मीदवारों से परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र देने का दावा किया गया था।

जिन लोगों के नाम आए, उनके खिलाफ न चार्जशीट हुई, न उन्हें गवाह बनाया गया। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों के मोबाइल से 28 उम्मीदवारों के नाम मिले, जिनमें से 10 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर 15 उम्मीदवारों की लोकेशन नेपाल के बीरगंज, रक्सौल या बिहार के मोतिहारी में मिलने का दावा किया गया। CID के हलफनामे में कहा गया कि उम्मीदवारों को असली प्रश्नपत्र नहीं दिया गया था, बल्कि हाथ से लिखे 5-6 पन्नों पर कुछ प्रश्न और उत्तर याद करने के लिए दिए गए थे।

SIT बदलने पर भी सवाल

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने SIT को बिना पर्याप्त कारण के तीन बार बदला। उनका कहना है कि जून और सितंबर 2025 में दाखिल चार्जशीट में कई तथ्यों की पुष्टि हुई, हालांकि अदालत ने यह नहीं माना कि CID ने पेपर लीक की पुष्टि की है।

हाईकोर्ट का आदेश क्या था?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने JSSC को अगली सुनवाई तक रिजल्ट जारी नहीं करने और शिकायतों पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद जनवरी 2025 में FIR दर्ज की गईं। याचिकाकर्ताओं ने CBI जांच की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया क्योंकि SIT जांच में गड़बड़ी साबित नहीं हो सकी।

बाद में हाईकोर्ट ने रिजल्ट जारी करने, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और SIT को छह महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि जिन 10 संदिग्ध उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था, उनका परिणाम रोककर रखा जाए और उनका चयन जांच के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा।

2024 दिसंबर को में झारखंड हाईकोर्ट JSSC-CGL परीक्षा के रिजल्ट पर रोक लगा दी थी।

2024 दिसंबर को में झारखंड हाईकोर्ट JSSC-CGL परीक्षा के रिजल्ट पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जारी और भविष्य में जारी होने वाले नियुक्ति पत्रों में यह स्पष्ट लिखा जाए कि नियुक्ति आपराधिक मामलों के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

पूर्व महाधिवक्ता की राय

राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने कहा कि JSSC-CGL को रद्द करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। उनके अनुसार यह पूरी तरह सरकार की मंशा पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अदालत ने भी माना है कि यदि गड़बड़ियों के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। उनका दावा है कि अब और भी साक्ष्य सामने आए हैं और सरकार चाहे तो परीक्षा रद्द कर सकती है।

अब आगे क्या?

इस समय स्थिति यह है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन जांच अभी भी जारी है, छात्र परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार न्यायिक जांच की बात कर रही है, लेकिन परीक्षा रद्द करने से इनकार कर रही है। यही वजह है कि JSSC-CGL विवाद झारखंड में छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।



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