मैं CGL की तैयारी कर रहा हूं। तीन बार एग्जाम दे चुका हूं। घर-परिवार को छोड़ यहां सभी बैठे हुए हैं। परिवार को परेशानी हमारी बेरोजगारी से होती है। हम अपने अधिकार के लिए यहां पर आए हैं।
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यह कहना है बोकारो के राहुल की। वो रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में धांधली को लेकर छात्रों के आंदोलन का गुरुवार को 20वां दिन है।
कई जिलों से आए छात्र इस आंदोलन में शामिल हैं और लगातार रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। खुले आसामन के नीचे टेंट में रहना, खाना-पीना चल रहा है।
सभी छात्र काफी परेशान भी हैं। उनका यही कहना है कि जल्द सरकार उनकी मांगों को पूरा करें और वो यहां से घर के लिए रवाना हो जाए। भास्कर की टीम ने ऐसे ही कुछ छात्रों से बातें कीं।

विधानसभा घेराव के दौरान लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च निकाला। अल्बर्ट एक्का चौक पहुंच कर मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाई और मौन खड़े रहे।
‘जेपीएससी में यह मेरा लास्ट अटेम्प्ट होगा’ सरायकेला से आए वनमानी प्रमाणिक कहते हैं- मैंने जेपीएससी की तीन बार मेंस एग्जाम दिया है। फिर भी आज हम सड़क पर हैं। मेरी अब उम्र 35 साल हो गई है। जेपीएससी में यह मेरा लास्ट अटेम्प्ट होगा। अगर ऐसे ही धांधली होती रही तो मैं तो ऐसे ही जेपीएससी से बाहर हो जाऊंगा।

वनमानी प्रमाणिक कहते हैं- घर वाले काफी परेशान हैं।
उन्होंने कहा- इसको लेकर मेरे घर वाले काफी परेशान हैं। घर वाले कह रहे हैं कि कई दिनों से घर से बाहर हो। विधानसभा में लाठीचार्ज हुआ, तुम लाठी खा रहे हो। तुम्हारी कोई सुन नहीं रहा है।
‘एजुकेशन ही हम लोगों का हथियार है’ वहीं, पलामू से रांची पहुंचे अरुण कुमार ने बताया कि वो JSSC और JPSC का तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा- मैंने 14वीं JPSC का एग्जाम भी दिया है। मुझे 124 मार्क्स मिले। उसके बाद भी मेरा कुछ नहीं हो रहा है। आप भली भांति जानते हैं। इस राज्य में क्या चल रहा है, मेरे यहां आने से घर वाले को तो परेशानी हो ही रही है। एजुकेशन ही हम लोगों का हथियार है।

संतोष कुमार मीणा कहते-हम लोगों की मांग जायज है।
‘पांच हजार की जनसंख्या में एक भी सरकारी नौकरी नहीं’ इधर, धरने पर बैठे देवघर के रहने वाले संतोष कुमार मीणा कहते हैं- मैं शुरू से ही इस प्रोटेस्ट में शामिल हूं। छात्र कितना परेशान है, यह आप देख सकते हैं। हम लोग दिन-रात मेहनत करते हैं। पढ़ाई करते हैं और पता चलता है कि पैसे की बल पर इनका रिजल्ट कोई और छीन कर ले गया।
संतोष कुमार मीणा कहते-हम लोगों की मांग जायज है। हम लोग जिस गांव में रहते हैं, वहां कुल तीन टोला है। वहां 5000 की जनसंख्या है, जिसमें एक भी छात्र की सरकारी नौकरी नहीं है। हमारे गांव में लोग बहुत गरीब हैं। सरकार ध्यान देती तो आज हमारे गांव से भी कोई ना कोई सरकारी जॉब प्राप्त कर लेता है।

प्रदीप महतो ने कहा-जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक हम लोग वापस नहीं जाएंगे।
‘सिस्टम को सुधार कर यहां से हटेंगे’ रामगढ़ के रहने वाले प्रदीप महतो ने कहा कि 29 जुलाई से हम लोग धरने पर बैठे हुए हैं। सिर पर कफन बांध लिया है कि जब तक यह सिस्टम नहीं सुधरेगा, तब तक हम लोग यहां से हटेंगे नहीं। चाहे जान देना क्यों ना पड़ जाए। घर से हम लोग निकले हैं। जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक हम लोग वापस नहीं जाएंगे।
परेशानी तो बहुत हो रही है, लेकिन बेरोजगारी की वजह से घर में रहा नहीं जा रहा है। क्या करें, कहां जाएं। 2015 से झारखंड पुलिस की एक भी वैकेंसी नहीं आाई। उत्पाद सिपाही का एग्जाम हुआ। कट ऑफ 95% चल गया। 508 नंबर लाकर भी हमारा रिजल्ट नहीं हुआ।